श्री राम शकल : पांच दशकों की राष्ट्रसेवा, सामाजिक सरोकार और संसदीय गरिमा की प्रेरक यात्रा

सोनभद्र के ग्रामीण परिवेश से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुँचे पूर्व सांसद एवं पूर्व मनोनीत राज्यसभा सदस्य श्री राम शकल का सार्वजनिक जीवन सेवा, संगठन, सामाजिक समरसता और जनप्रतिबद्धता का उदाहरण प्रेरणा भारती, विशेष संवाददाता भारतीय लोकतंत्र के लंबे इतिहास में ऐसे जनप्रतिनिधियों की भूमिका विशेष महत्व रखती है, जिन्होंने राजनीति को व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का माध्यम … Read more

आखिरी बार पिता ने बेटियों को पुकारा था… मगर कोई नहीं आया

शहर के पुराने कपड़ा बाजार में रघुनाथ अग्रवाल की छोटी-सी दुकान थी—“रघुनाथ वस्त्र भंडार।” दुकान बड़ी नहीं थी, लेकिन रघुनाथ की मेहनत बहुत बड़ी थी। सुबह दुकान खोलने से पहले वह अपनी पत्नी सरोज के साथ भगवान के सामने हाथ जोड़कर बस एक ही प्रार्थना करते— “हे भगवान… मेरी बेटियों को हमेशा खुश रखना।” रघुनाथ … Read more

शाह संसद में बयान देने को तैयार, लेकिन विपक्ष सुनने को नहीं राजी

संजय सक्सेना,लखनऊ,वरिष्ठ पत्रकारमो-9454105568, 8299050585 छात्र आंदोलनों और प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर संसद में जारी गतिरोध के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का रुख साफ किया है। उन्होंने कहा है कि सरकार संसद में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई सहित हर पहलू पर विस्तृत चर्चा कराने के … Read more

पत्रकार : इतिहास के गुमनाम सिपाही

जिसकी तस्वीर कभी छपी नहीं, वही आंदोलन की पहली आवाज़ था।आंदोलन जीतने वाले अक्सर मंच पर नहीं, कैमरे के पीछे खड़े होते हैं। इतिहास के गुमनाम सिपाही ! आंदोलन इतिहास बनाते हैं, पत्रकार उसकी पहली आवाज़ दर्ज करते हैं!आंदोलन खत्म हो गया, नेता याद रह गए—पत्रकार फिर अगले संघर्ष में निकल पड़े! इतिहास की एक अजीब आदत है। वह … Read more

संघ का जेन जी से संवाद, बीजेपी को वैचारिक नसीहत

अजय कुमार,                                वरिष्ठ पत्रकारलखनऊ ( उ. प्र.)मो-9335566111 भारतीय राजनीति में क्या जेन जी के बीच एक ऐसा वैचारिक और सामाजिक बदलाव आकार ले रहा है, जिसे पारंपरिक राजनीतिक चश्मे से देखना अब संभव नहीं रह गया है। हाल ही में … Read more

करुणा : सुखी और सुंदर समाज की आधारशिला।

-सुनील कुमार महला भारतीय संस्कृति अनेक सद्गुणों और जीवन-मूल्यों से समृद्ध है, लेकिन करुणा का स्थान उनमें सर्वोपरि है। वास्तव में, करुणा केवल किसी के दुःख को देखकर मन में संवेदना उत्पन्न होने का नाम नहीं है, बल्कि उस दुःख को समझकर उसे कम करने का प्रयास करना है। सच तो यह है कि जिस … Read more

सवाल, बहस और जवाबदेही के लिए जरूरी है संसद का सुचारू संचालन

– सूरज मोहन झा वरिष्ठ पत्रकार  लोकतंत्र में संसद सिर्फ एक इमारत या सदन नहीं है। यह वह मंच है, जहां देश के करोड़ों लोगों की आवाज उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के जरिए उठती है। सरकार की नीतियों पर चर्चा होती है, कानून बनाए जाते हैं, बजट पर विचार होता है और सरकार से सवाल … Read more

1983 की बेतवा की बाढ़ से 2026 की ब्रह्मपुत्र की त्रासदी तक : बाढ़ के बीच मेरी जीवन-यात्रा

प्रो. डॉ. बी. के. एस. संजय पद्मश्री सम्मानित | अध्यक्ष, एम्स गुवाहाटी | गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक | अस्थि एवं मेरुदंड शल्य चिकित्सक जब भी मानसून की बारिश लगातार और भयावह रूप लेने लगती है, मेरा मन अनायास ही वर्ष 1983 में लौट जाता है। उस समय मैं 27 वर्ष का था और नई दिल्ली … Read more

क्या जेन-जी को राहुल गांधी की ‘क्लास भा गई?

सौरभ वार्ष्णेयजिस नेता को वर्षों तक राजनीतिक विरोधियों ने ‘पप्पू कहकर खारिज करने की कोशिश की, उसी नेता की कक्षाओं में आज युवा बैठकर सवाल पूछ रहे हैं। राजनीति में इससे बड़ा व्यंग्य शायद ही कोई हो सकता है। लेकिन इसे केवल राहुल गांधी की व्यक्तिगत लोकप्रियता में अचानक आई वृद्धि मान लेना भी जल्दबाजी … Read more