4 नवम्बर/पुण्य-तिथि पूर्वोत्तर भारत के मित्र मधुकर लिमये

श्री मधुकर लिमये का जन्म 1927 ई. में ग्राम पूर्णगढ़ (रत्नागिरी, महाराष्ट्र) में अपने ननिहाल में श्रीमती गिरिजा देवी की गोद में हुआ था। उनका अपना घर इसी तहसील के गोलप ग्राम में था। उनके पिता श्री विश्वनाथ लिमये मुंबई उच्च न्यायालय में वकील थे। उनका कल्याण में साबुन का बड़ा कारखाना भी था। सात … Read more

       राख होने की….

एक दुसरे से आगे निकलने की      भीड़ मे होड़ सी लगी है             साथ ही          शोहरत,दौलत कमाने की बाजार हर मोड़ पर लगी है             और अपना वर्चस्व कायम करने की मन मे अनीति जोर लगी है        … Read more

       राख होने की….

एक दुसरे से आगे निकलने की      भीड़ मे होड़ सी लगी है             साथ ही          शोहरत,दौलत कमाने की बाजार हर मोड़ पर लगी है             और अपना वर्चस्व कायम करने की मन मे अनीति जोर लगी है        … Read more

शीर्षक – कार्तिक मास

पावन कार्तिक मास सखी री देख आया,“आनंद” उत्सव खूब हर्षोल्लास मनाया । वेद पुराणों ने कार्तिक की महिमा गाई,कार्तिक बारह महिनों में से अति फलदाई,जप-तप-हवन-मनन सत्संग और संकीर्तन,गोधन की सेवा दीपदान भगवत् वंदन,सच्ची उपासना से भक्तों ने सुख पाया,“आनंद” उत्सव खूब हर्षोल्लास मनाया । तड़के श्रद्धालु नित करें गंगा स्नान ध्यान,संकल्पित पूजन का है ये … Read more

शीर्षक – कार्तिक मास

पावन कार्तिक मास सखी री देख आया,“आनंद” उत्सव खूब हर्षोल्लास मनाया । वेद पुराणों ने कार्तिक की महिमा गाई,कार्तिक बारह महिनों में से अति फलदाई,जप-तप-हवन-मनन सत्संग और संकीर्तन,गोधन की सेवा दीपदान भगवत् वंदन,सच्ची उपासना से भक्तों ने सुख पाया,“आनंद” उत्सव खूब हर्षोल्लास मनाया । तड़के श्रद्धालु नित करें गंगा स्नान ध्यान,संकल्पित पूजन का है ये … Read more

करवा चौथ का त्योहार

सच्ची खुशियों का संगम करवा चौथ का त्योहार,बरसाना हम बच्चों पर माता अपनी अमृत धार । करें प्रार्थना करवा माता से सुहागिनें सारी,सदा सलामत रखना ये जोड़ी हे मात ! हमारी,श्रद्धा से निर्जल व्रत कर चरणों में धरा है शीश,पति की दीर्घायु का मॉंगती हूॅं आपसे आशीष,बढें हमेशा इस जीवन में निश्छल निरंतर प्यार,बरसाना हम … Read more

रास पूर्णिमा (गोपी छंद)

शरद पूर्णिमा की रश्मियॉं, अमृत “आनंद” बहाती है, शुभागमन में शरद ऋतु के, प्रकृति गीत गुनगुनाती है । देख आज कण-कण धरा का, पूर्ण रसामृत से है भरा, सुधाकर सोलह कला लिए, व्योम में झूमता मुस्कुरा, श्वेत शांति का ये तोहफ़ा, धरा को निशाकर से मिला, दिव्य अमिय माधुर्यता से, रोम-रोम पुलकित हो खिला, चॉंदनी … Read more

अद्भुत अलौकिक, अविस्मरणीय 

जगन्नाथ धाम में मातृशक्तियों का अद्भुत दृश्य  – भावना सक्सेना  कल एकादशी की शाम जगन्नाथ पुरी में थी। भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने मंदिर पहुँचे तो अत्यंत भीड़ थी। लेकिन उस भीड़ के बीच भी न जाने कैसे, बहुत देर तक प्रभु के सम्मुख खड़े रहने का अवसर मिला। मन तृप्त था और हृदय में … Read more

अद्भुत अलौकिक, अविस्मरणीय 

जगन्नाथ धाम में मातृशक्तियों का अद्भुत दृश्य  – भावना सक्सेना  कल एकादशी की शाम जगन्नाथ पुरी में थी। भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने मंदिर पहुँचे तो अत्यंत भीड़ थी। लेकिन उस भीड़ के बीच भी न जाने कैसे, बहुत देर तक प्रभु के सम्मुख खड़े रहने का अवसर मिला। मन तृप्त था और हृदय में … Read more

         झुकी हुई पलकें !

 टेढ़ी कमर, झुकी हुई पलकें बढ़ती डगमगाती हुई, थम- थमके   हालातों  से   थी   दु:खी आज सुबह से थी भूखी  यही लड़खड़ाती शब्द थे उसके अधर पर  वो वृद्ध भिक्षुकी नजर आई सड़क पर कंपकंपाते  हाथ फैलाई तन पर उम्र की झुरियां थी छाई सामने  था सेठों का मोहल्ला  पर कईयों ने दरवाजा तक न खोला … Read more