जैव ईंधन : स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत की नई राह।(10 अगस्त दिवस विशेष आलेख)

– सुनील कुमार महला हर वर्ष 10 अगस्त को विश्व जैव ईंधन दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम जैसे जीवाश्म ईंधनों के विकल्प के रूप में जैव ईंधन के महत्व तथा स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह दिवस जैव ईंधन के विकास और उपयोग को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ ऊर्जा … Read more

बराक घाटी का चाय समुदाय: दो सौ वर्षों का संघर्ष, अधिकार और पहचान की अधूरी कहानी

असम की पहचान विश्वभर में उसकी उत्कृष्ट चाय से है। इस चाय की सुगंध ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है। लेकिन इस सफलता के पीछे लाखों चाय बागान श्रमिकों का दो सौ वर्षों का अथक परिश्रम, संघर्ष और त्याग छिपा हुआ है। बराक घाटी के कछार, करीमगंज और हैलाकांडी जिलों में … Read more

संसद में गतिरोध और लोकतंत्र : संवाद की संस्कृति कब लौटेगी?

सौरभ वार्ष्णेयभारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी संसद है। संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं, बल्कि देश की जनता की आकांक्षाओं, समस्याओं और भविष्य की दिशा तय करने वाला सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्थान है। यहां सत्ता और विपक्ष दोनों जनता के प्रतिनिधि के रूप में बैठते हैं। सत्ता पक्ष सरकार चलाने के लिए जनादेश … Read more

बांकीपुर और दतिया का संदेशभ्रष्ट नौकरशाही-दलबदलू प्रेम,नकारे विधायक-सांसद भाजपा का संहार कर देंगे       

आचार्य श्रीहरि बिहार के बांकीपुर विधान सभा और मध्यप्रदेश के दतिया विधान सभा उपचुनाव के परिणाम ने भारतीय जनता पार्टी को असहनीय आधात दिया है, आईना दिखाया है, जातिवाद और वंशवाद आधारित जीत की गारंटी के अंहकार को जमींदोज कर दिया है। नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की टेक्नोलाॅजी और पीआर सोच को भी धसौड … Read more

क्या है मनस्मृति?

– संत समीर आप सबने सुना ही होगा कि दो दिन पहले संसद में #काँग्रेस अध्यक्ष #खड़गे जी ने एक श्लोक की मनु के नाम पर व्याख्या की। श्लोक मनुस्मृति का था ही नहीं, लेकिन देश के नेताओं का क्या किया जाए, जिनका सत्य और तथ्य से लेना-देना नहीं रहा। खड़गे जी को यह तक … Read more

प्रशांत किशोर की जीत से बिहार में बदलाव की बयार  

राधा रमण  कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों। हिंदी के मशहूर कवि स्व दुष्यंत कुमार के एक गजल की यह पंक्तियां जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पर फिलहाल तो सटीक लगती हैं। प्रशांत किशोर ने पटना के बांकीपुर विधानसभा उप चुनाव में वह … Read more

गायें गईं, तो रोज़ी-रोटी भी चली गई: असम का शांत बाढ़ संकट

जैसे ही असम इस साल की भयानक बाढ़ से हुए नुकसान का अंदाज़ा लगा रहा है, राज्य के डूबे हुए गांवों में एक और दुखद घटना चुपचाप हो रही है। टूटे हुए घरों, बेघर हुए परिवारों और टूटी सड़कों के अलावा, एक अनदेखा संकट भी है—मवेशियों का नुकसान, जिसने हज़ारों ग्रामीण परिवारों से उनके गुज़ारे … Read more

आखिर धार्मिक बातों पर संदेह क्यों ?

आर्यिका श्री के मुखारविंद से निकली वाणी का विवेचन सन्तों ने आज की पीढ़ी को हमारे पूर्वजो द्वारा कही गई धार्मिक बातों पर संदेह करने को अनुचित ठहराया है। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग मूल आगम या दर्शन पढ़े बिना केवल सुनी सुनाई बातों के आधार पर अपनी राय बना लेते है। जैन परंपरा … Read more

धरती तप रही है : बढ़ती गर्मी और मानव जीवन पर मंडराता खतरा।

-सुनील कुमार महला  आज धरती का तापमान लगातार बढ़ता ही चला जा रहा है। वास्तव में, कहना ग़लत नहीं होगा कि वैश्विक तापमान में लगातार हो रही वृद्धि आज पूरी मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग, वनों की अंधाधुंध कटाई, तेज़ी से बढ़ते औद्योगीकरण, शहरीकरण और कार्बन … Read more

गुरुपूर्णिमा : सद्गुरु-तत्त्व, आत्मजागरण एवं भारतीय ज्ञान-परम्परा का सनातन महापर्व

– डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय भारतवर्ष की सनातन संस्कृति केवल विविध पर्वों, उत्सवों और अनुष्ठानों की परम्परा नहीं है, अपितु वह मानव-जीवन को लौकिकता से अलौकिकता, सीमितता से अनन्तता तथा अज्ञान से ब्रह्मज्ञान की ओर अग्रसर करने वाली दिव्य जीवन-पद्धति है। यहाँ प्रत्येक पर्व केवल कालगणना का सूचक नहीं, अपितु आत्मपरिष्कार, सांस्कृतिक जागरण और आध्यात्मिक … Read more