माँ का आँचल

माँ का आँचल
माँ का आँचल कोई साधारण कपड़ा नहीं होता, वह तो दुनिया का सबसे नरम और सुरक्षित कोना होता है।
जहाँ हर डर छिप जाता है, आँसू थम जाते हैं, और नींद भी बिना बुलाए चली आती है। जब मैं हारकर और थककर लौटता हूँ, उस आँचल की छाँव में सुकून मिल जाता है।
न दवा की ज़रूरत पड़ती है, न किसी दुआ की, बस माँ के आँचल में सिर रखते ही दर्द आधा हो जाता है।
बारिश हो या तेज धूप, चाहे दुनिया रूठ जाए, माँ का आँचल कभी साथ नहीं छोड़ता। उसमें तुलसी की पवित्र महक, रोटी की सौंधी खुशबू, और एक भरोसा छिपा होता है “बेटा, मैं हूँ ना।”
बड़ा होकर भी जब कभी टूट जाता हूँ, तो ये आँखें फिर उसी आँचल को ढूँढती हैं। क्योंकि माँ का आँचल उम्र नहीं देखता, वह तो बस ममता से ढकना जानता है। चाहे मैं कितना भी ऊचा आसमान छू लूँ, सच्चा सुकून तो माँ के आँचल की छाँव में ही मिलता है।
नाम :- दीपली सिंह

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