सपने वो हैं जो आपको सोने न दें : डॉ. कलाम के प्रेरक जीवन का संदेश।

-सुनील कुमार महला  ‘सपने वे नहीं जो हम सोते समय देखते हैं, सपने वे हैं जो हमें सोने नहीं देते।’ यह प्रेरक विचार भारत के महान वैज्ञानिक, ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ (अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइल परियोजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले), विंग्स ऑफ फायर, इग्नाइटेड माइंड्स और इंडिया-2020 जैसी प्रसिद्ध पुस्तकों के लेखक, युवाओं … Read more

हरित भविष्य की राह: प्रकृति संरक्षण का संकल्प।(28 जुलाई विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर विशेष आलेख)

-सुनील कुमार महला  प्रतिवर्ष 28 जुलाई को जैव विविधता के संरक्षण, विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित किए जाने,पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति की रक्षा करने के क्रम में विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस मनाया जाता है। आज विकास की होड़ में जगह-जगह कंक्रीट के जंगल खड़े किए … Read more

न्यूज़ चैनलों से नाराज़गी जायज़, पर ‘रिपोर्टर’ पर हमला क्यों?

– संजीव शर्मा  जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए एक युवा आंदोलन की तस्वीरों ने एक असहज सवाल हमारे सामने खड़ा कर दिया। कुछ पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की हुई, कैमरे छीनने की कोशिश की गई और महिला पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार की घटनाएं भी सामने आईं। यह केवल किसी एक चैनल या एक आंदोलन … Read more

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा : राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस का संदेश।

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा हमारे राष्ट्र की पहचान, गौरव, एकता और संप्रभुता का प्रतीक है। प्रत्येक भारतीय के लिए यह केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, लोकतंत्र, राष्ट्रीय अस्मिता और देशभक्ति का प्रतीक है। भारत के इतिहास में 22 जुलाई 1947 का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी दिन संविधान सभा ने वर्तमान तिरंगे को भारत के … Read more

सोशल मीडिया स्टेटस: वर्तमान जीवन का आईना या आभासी दुनिया का चेहरा?

**”आज किसी व्यक्ति की वर्तमान जिंदगी में क्या चल रहा है, इसका सबसे तेज़ संकेत उसके सोशल मीडिया स्टेटस से मिलता है।”** डिजिटल युग में यह कथन काफी हद तक सच प्रतीत होता है। व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म अब केवल संवाद का माध्यम नहीं रहे, बल्कि वे लोगों की दिनचर्या, भावनाओं, … Read more

पूर्वोत्तर भारत से संवैधानिक गलियारों तक: एक युवा लेखक की साहित्यिक यात्रा

सिलचर (असम)। -हिमांशु बोरा पूर्वोत्तर भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक, भाषाई और साहित्यिक विरासत के लिए देशभर में विशिष्ट पहचान रखता है। आठ राज्यों—असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा—से मिलकर बने इस क्षेत्र में 220 से अधिक भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं। यही भूमि भारतीय साहित्य को बीरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य, ममांग … Read more

चातुर्मास: आत्म जागरण, संयम और आध्यात्मिक साधना का पर्व

वीरेन्द्र कुमार जैन भारतीय संस्कृति में चातुर्मास आत्मिक उन्नति, संयम, साधना और जीवन में परिवर्तन का विशेष काल माना जाता है। यह आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक लगभग चार महीनों की अवधि होती है। इस दौरान वर्षा ऋतु के कारण साधु-संत एक स्थान पर रहकर धर्म, तप, स्वाध्याय और आध्यात्मिक साधना करते … Read more

हीरालाल प्रजापति: चाय बागान के श्रमिक परिवार से समाजसेवा और शिक्षा के शिखर तक

— अशोक वर्मा मेदली (सेपिंजुरी) चाय बागान के अंतर्गत स्थित तिलभूम चाय बागान में हीरालाल प्रजापति का जन्म हुआ। वे चार भाइयों में तीसरे थे। उनके माता-पिता दोनों ही चाय बागान के श्रमिक थे। आर्थिक अभाव के कारण परिवार में शिक्षा का अनुकूल वातावरण नहीं था। बड़े दोनों भाइयों की पढ़ाई अधिक आगे नहीं बढ़ … Read more

41वीं साकेतवास पुण्यतिथि पर विशेष

*सद्गृहस्थ-सन्त परम्परा के अमर आलोकस्तम्भ : श्री श्री 1008 साकेतवासी श्री मौनी जी महाराज* *नाम-साधना, लोकमंगल और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के अप्रतिम प्रणेता थे श्रीमौनी जी महाराज – डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय* जम्मू/कठुआ – परम श्रद्धेय प्रातः रमणीय श्री श्री 1008 साकेतवासी श्री मौनी जी महाराज के जीवन लीला के विषय में संक्षिप्त में चर्चा करते … Read more

राष्ट्र चिंतन ईसाई संप्रभुत्ता के केंद्र में पनपती मुस्लिम घृणा      -आचार्य श्रीहरि     

अमेरिका में भारतीय मुस्लिम युवक पर हुए हिंसक, घृणात्मक और जान लेवा हमले का संदेश बहुत ही खतरनाक है, सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि ईसाई संप्रभुत्ता के केंद्र में पनपती मुस्लिम घृणा के प्रदर्शित करता है।  ईसाई और मुस्लिम संप्रभुता के बीच खीची हुई तलवार को भी प्रमाणित करता है। घटना को देखिए फिर सोचिए … Read more