विश्वास के खंडहर पर खड़ी व्यवस्था:सन्नाटे में गूँजते सवाल और कठघरे में खड़ा नागरिक
राजेश कुमार सिंह नई दिल्ली -लोकतंत्र की बुनियाद किसी बहुमंजिला इमारत की तरह पत्थरों पर नहीं, बल्कि सरकार और नागरिकों के बीच ‘भरोसे’ के अदृश्य धागे पर टिकी होती है। जब यह धागा कमजोर होने लगता है, तो पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था हिल जाती है। समकालीन भारतीय परिदृश्य में समाज के एक बड़े वर्ग के भीतर … Read more