क्षत -विक्षत कपोत- डाक्टर श्रीधर द्विवेदी
सत्ताईस जनवरी दो हजार इक्कीस – , गणतंत्र दिवस के बाद का सबेरा I कल संपन्न हुए गणतंत्र दिवस के प्रभात परेड की भव्यता , शान -शौकत और मान-मर्यादा दोपहर होते होते लाल किले की शर्मनाक घटनाओं के चलते मिटटी में मिल चुकी थी I आज वातावरण में अजीब सी नीरवता है I ठंड और … Read more