वाह! एकता..(व्यंग्य)
एक दिन कौवे की सभा आम हुई एकता पर चर्चा खुले आम हुई॥ हमे खूब मूर्ख बनाया जाता है झूठी प्रसंशा कर हमारे मूंह का निवाला सियार लूट ले जाता है॥ कोयल भी हमें खूब उल्लू बनाता है हमारे ही घोंसले मे अण्डा दे जाता है और हम परवरिश कर उनका वंश बढ़ाता है॥ हम … Read more