मनके सुगना कुछ बोलत बा
हरदम बेचैनी उलझन में, पलपल जीवनके चिंतनमें, चंदा, सूरज, जुगनू तारा, धरती अंबर सब डोलत बा, मनके सुगना कुछ बोलत बा। *** लागल बावे आना-जाना, दुनिया लागेला बेगाना, सब आइल गइल जोड़ेला, अब बैरागी भी मोलत बा, मनके सुगना कुछ बोलत बा। *** आकुल, व्याकुल बा दीवाना, का लेअइनी का लेजाना, हरदम भटकी मारा मारा, … Read more