हिंदी मेरी भाषा

हिंदी भाषा है मधुवन जिस में डूबा मेरा मन जब सुनु हिंदी में गाना मन हो जाये मेरा सुहाना नानी सुनाती हिंदी में कहानी जिसमे होते राजा रानी बड़ी निराली है ये हिंदी प्रगति की राह उसने चिन्धि हिंदी को न छोड़े एक क्षण आओ मिलके करे ये प्रण हिंदी भाषा हम सब को जोड़े मन का मेल पल भर में तोड़े में हिन्द का रहने वाला, हिंदी मेरी भाषा देश की उन्नति के लिए, मैंने खुद को साझा आओ हम सब मिल के करे, हिंदी का प्रचार पूरी दुनिया हिंदी बोले, बहुत उमदा विचार

उसके शहर का यही रिवाज़……..

सारे सहरा अपने हिस्से में रखकर समंदर सभी, उसमें उड़ेल दिए मैंने मेरी चाह उसकी हंसी उसकी तलाश जाने क्या ? क्या करें, अपनी अपनी अपनी तिशनगी का मिजाज़ है ! जहां गया नहीं मुसाफिर कोई उस आखिरी छोर तक भी गया मैं हर घड़ी, हर किसी, हर कहीं वो उस दौर तक भी गया … Read more

“लुप्त होती मानवता”

सभ्यता हुई थी विकसित मानव को बुद्धि आने से, इसलिए मानव हुआ श्रेष्ठ पशु से अंतर दिखलाने में। मानव को हुआ ज्ञान बोध आदर्श समाज का निर्माण हुआ, मगर आजके सभ्य जीवन मे मानव फिर से अज्ञान हुआ। व्यक्तिगत लाभहानी के चलते अपना मानवता भूल गया, आधुनिकता के चकाचौंध में समाज निर्माता समाजिकता भूल गया। … Read more

“चन्द्रयान -3”

हर घर है तिरंगा – हर मन है तिरंगा । अब चंदा पर भी है तिरंगा । चन्द्रयान ने कर दिया कमाल दोस्तों । भारत का विश्व में बढ़ गया सम्मान दोस्तों । मुश्किल बहुत थी इसके डगर में अंतरिक्ष में जाना सीमित बजट में दल कुछ ही देश हमसे पहले गए थे असीमित संसाधन … Read more

एक जबाब खामोशी

विश्वास राणा “GYPSY” सैकड़ों बेमतलबी बवाल, हजारों अटपटे मलाल, लाखों बेतुके सवाल एक जवाब- खामोशी दिन रात के अनचाहे झमेले, अनगिनत सरों के झुंड वाले मेले, साजिशों से भरे गैर ज़रूरी खेले एक जवाब खामोशी । बेहिसाब शोरगुल वाले दिनों के ताते, बेअदब महाफिलों वाली रातें, और वो ही बे वजनी खोखली बातें, एक जवाब … Read more

” छू लिया हमने चांद की चांदनी को “

बधाई हो ! बधाई हो! छू लिया हमने चांद की चांदनी को । भारत का पल भारत का गर्व भारत का पर्व ! जय चंद्रयान जय हिंदूस्थान जय विज्ञान! यह नारे देखे … हमने टेलिविजन में प्रधानमंत्री को सूना हमने टेलिविजन में ! रंग लाई मेहनत रंग लाया जज्बा हो गया अजूबा ! चंदा मामा … Read more

मन का द्वंद

मेरे मन के अंदर है एक महा समंदर, अथाह गहराई है समेटे जिसके तल में लेटे, हुए हैं हर्ष-विषाद मेरे जीवन का अवसाद। ज्वार-भाटा के जैसे आते हैं अक्सर वैसे, होकर लहरों पर सवार चाहते हैं करना वार, असंख्य मुझ पर प्रहार ताकि मैं जाऊं हार। पूछते हैं भीषण सवाल होता है मुश्किल हाल, मेरी … Read more

प्रेमी के चक्कर में घर छोड़ना ठीक नहीं

ट्रेन के ए.सी. कम्पार्टमेंट में मेरे सामने की सीट पर बैठी लड़की ने मुझसे पूछा ” हैलो, क्या आपके पास इस मोबाइल की सिम निकालने की पिन है??” उसने अपने बैग से एक फोन निकाला, वह नया सिम कार्ड उसमें डालना चाहती थी। लेकिन सिम स्लॉट खोलने के लिए पिन की जरूरत पड़ती है, जो … Read more

मेरी ज़मीर में नहीं………✍️

बेवजह किसी को सताना, मेरे ज़मीर में नहीं .. जुल्मों को सह जाना खून की तासीर में नहीं  खून की तासीर में नहीं …….. सब कुछ खो कर भी पा लिया तुझको, सौदा ……… ….. सस्ता है ! जो उसी ने कहा था , तू मेरे हाथ की लकीर में नहीं, तू मेरे हाथ की … Read more

प्रेरक कहानी

पति ने पत्नी को किसी बात पर तीन थप्पड़ जड़ दिए, पत्नी ने इसके जवाब में अपना सैंडिल पति की तरफ़ फेंका, सैंडिल का एक सिरा पति के सिर को छूता हुआ निकल गया। मामला रफा-दफा हो भी जाता, लेकिन पति ने इसे अपनी तौहिनी समझी, रिश्तेदारों ने मामला और पेचीदा बना दिया, न सिर्फ़ … Read more