गुरूदेव (दोहे)

उत्तम हो संसार में, बच्चों का व्यवहार।

गढें गुरुदेव प्रेम से, शिक्षा शुभ संस्कार।। 

वाणी में गुरुदेव की, होता प्रभु का वास।

हाथों से गुरुदेव के, बरसे निधियॉं खास।। 

चलना पथ पर सीखते, गुरु से पाकर ज्ञान।

परम पूज्य गुरुदेव का, सदा करे सम्मान।। 

सदा करो गुरु वंदना, कहते श्री भगवान।

गुरु विवेक जागृत करें, दे गीता का ज्ञान।। 

बाधाओं को गुरु हरें, बरसाए वरदान।

सर्वोपरि हित शिष्य का, वेद रचित व्याख्यान।। 

पदवी दी गुरूदेव को, विधाता ने विशेष।

ईश्वर की प्रतिमूर्ति गुरु, ब्रह्मा विष्णु महेश।। 

गुरु राह दिखाए सही, हरे है अधंकार।

दिव्य प्रकाशित ज्योति से, नौका लगती पार।। 

अपने अनुभव ज्ञान से, करें राह आसान। 

समदृष्टि शिष्य पर रखे, दे उत्तुंग उड़ान।। 

राही को मंजिल मिले, आशाओं के पंख।

गुरु के शुभ आशीष से, बजे जीत के शंख।। 

करूण हृदय की मूर्ति गुरु, थामें रखता हाथ।

संरक्षक बनके सदा, जीवन में दे साथ।। 

सांसारिक बंधन कटें, गुरु चरण तीर्थ धाम।

दयालु श्री गुरुदेव को, बारम्बार प्रणाम।। 

कर्मों में शुचिता बसे, सच्चा श्रद्धावान।

श्रेष्ठ गुरु दक्षिणा यही, देना गुरु को मान।। 

जीवन में “आनंद” हो, गुरुकृपा और ओज।

नया ज्ञान गुरुदेव से, रहें सीखते रोज।। 

– मोनिका डागा “आनंद”, चेन्नई 

आपके स्नेह और प्यार का धन्यवाद 

रचना स्वरचित और सर्वाधिकार सुरक्षित

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