दहलीज़ तक आया एक मेहमान
दहलीज़ तक आया एक मेहमान जो चला जाता है, वह चला जाता है— पर जो आदतों में जकड़ा रह जाता है, वही जानता है आदतों को छोड़ने की आदत की पीड़ा। कभी-कभी अधूरे मिलन में ही जीवन की प्राप्ति छिपी होती है। कभी-कभी रिश्तों का नाम न होना ही भविष्य को शांत बना देता है। … Read more