झुकी हुई पलकें !
टेढ़ी कमर, झुकी हुई पलकें बढ़ती डगमगाती हुई, थम- थमके हालातों से थी दु:खी आज सुबह से थी भूखी यही लड़खड़ाती शब्द थे उसके अधर पर वो वृद्ध भिक्षुकी नजर आई सड़क पर कंपकंपाते हाथ फैलाई तन पर उम्र की झुरियां थी छाई सामने था सेठों का मोहल्ला पर कईयों ने दरवाजा तक न खोला … Read more