साहित्य
अश्व प्रत्याशा के रथ पर
अश्व प्रत्याशा के रथ पर , झंकृत है , अलंकृत है,, स्रोत जिसका संस्कृत है अन्वेषित है ,अभिप्रेषित है ज्योत जिसकी परिष्कृत है हिंदी ! , अश्व प्रत्याशा के रथ पर , विश्व भाषा के पथ पर उन्नत है, प्रेरित है, सृजन जिसकी विस्तृत है। गूँजित है, प्रवाहित है, अक्षरों में उज्ज्वलित है। हिंदी ! … Read more
वनवासियों के हितैषी राजा विजयभूषण सिंहदेव
11 जनवरी/जन्म-दिवस वनवासियों के हितैषी राजा विजयभूषण सिंहदेव भारत में सैकड़ों साल से ईसाई मिशनरियां काम कर रही हैं। वे सेवा के जाल में फंसा कर भोले-भाले वनवासियों को ईसाई बनाती हैं। यह धर्मान्तरण कभी-कभी राष्ट्रान्तरण जैसी बीमारी भी बन जाता है। वे उन्हें आदिवासी कहकर भारत और शेष हिन्दू समाज से काट देते हैं। … Read more
हास्य व्यंग्य नेता जी का गृहप्रवेश
नेता जी का गृहप्रवेश गाँव मे सेठ जी बनाए भव्य महल भव्यता देख लोग कहने लगे शीशमहल॥ सेठ जी शुभ मुहूर्त देख रखा महल का गृहप्रवेश उस दिन वैदिक मंत्रोच्चारण से गुंजयमान हुआ परिवेश॥ सेठ जी के द्वार पर लगा आम-खास लोगों का तांता निमंत्रण पाकर अपने अनुज संग पहुंचे नेता॥ अनुज … Read more
शब्दवीणा सृजन त्रिविधा में बिहार, मध्य प्रदेश, एवं हरियाणा के रचनाकारों ने किया काव्य पाठ
कर्नल गोपाल अश्क, कुमार कांत एवं सुशीला यादव ने पढ़ीं एक से बढ़कर एक रचनाएँ गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक सह सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ द्वारा आयोजित “शब्दवीणा सृजन त्रिविधा” के गत अंक में गया जी से कवि कुमार कांत, इंदौर, मध्य प्रदेश से कवि कर्नल गोपाल अश्क एवं गुरुग्राम, हरियाणा से कवयित्री सुशीला यादव ने बतौर … Read more
एक बेल के सारे तुंबे खारे ( व्यंग्य)
वैसे तो तुंबे खारे ही होते हैं क्योंकि तुंबे की बेल ही ऐसी होती है कि उससे उगने वाले सारे ही तुंबे खारे होगें फिर यह कहावत क्यों बनी? क्यों व्यंगात्मक अंदाज मे कहा जाता है जबकि सभी जानते हैं कि विष वृक्ष की उपज क्या होगी। ईमली सैतान पृवृति की इसलिए थी कि … Read more
ज़रूरी तो नहीं
ज़रूरी तो नहीं यह ज़रूरी तो नहीं कि हर बीमारी के लिए खून की जाँच करवाई जाए कभी – कभी हमें अपने व्यक्तित्व की जाँच भी करवा लेनी चाहिए क्या पता हमारे अंदर मानवता, उदारता, दया, करुणा आदि की कमी न हो गई हो? आग में तप कर ही सोना खरा बनता है अपने जीवन … Read more
शब्दों का जाल
शब्दों का जाल — संजय अग्रवाला, जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल ये जो तनहाई में बैठकर अक्षरों से बातें करते हो न तुम, जो शब्दों की डोर बुनकर अपनी ही दुनिया रचते हो न तुम, एक दिन यही जाल तुम्हें खुद में ही उलझा लेगा। जो कागज़ पर बहते ये अनजाने एहसास हैं, जो हर पंक्ति में … Read more
प्रेरक कहानी बदनसीब बेटी और पिता
लड़कियों के एक विद्यालय में आई नई अध्यापिका बहुत खूबसूरत थी, बस उम्र थोड़ी अधिक हो रही थी लेकिन उसने अभी तक शादी नहीं की थी… सभी छात्राएं उसे देखकर तरह तरह के अनुमान लगाया करती थीं। एक दिन किसी कार्यक्रम के दौरान जब छात्राएं उसके इर्द-गिर्द खड़ी थीं तो एक छात्रा ने बातों बातों … Read more