झुकी हुई पलकें !

 टेढ़ी कमर, झुकी हुई पलकें बढ़ती डगमगाती हुई, थम- थमके   हालातों  से   थी   दु:खी आज सुबह से थी भूखी  यही लड़खड़ाती शब्द थे उसके अधर पर  वो वृद्ध भिक्षुकी नजर आई सड़क पर कंपकंपाते  हाथ फैलाई तन पर उम्र की झुरियां थी छाई सामने  था सेठों का मोहल्ला  पर कईयों ने दरवाजा तक न खोला … Read more

वीरांगना रानी कित्तूर चेन्नम्मा: साहस, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की अमर प्रतीक

कन्नड़ भूमि की वीरांगनाओं में अग्रिम पंक्ति में स्थान रखने वाली कित्तूर की रानी चेन्नम्मा स्वतंत्रता और स्वाभिमान की साक्षात प्रतिमूर्ति थीं। वे कित्तूर के प्रसिद्ध देसाई राजवंश के राजा मल्लसर्जा की छोटी रानी थीं। अपने छोटे-से राज्य की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उन्होंने अंग्रेजों की विशाल सेना के विरुद्ध जिस साहस, वीरता और … Read more

      तालियों का उत्साह  (लघु कथा)

माता – पिता के लाख समझाने, बुझाने, धमकाने के बाद भी मोहन  पढ़ने का नाम ही नही ले रहा था यहां तक कि स्कूल जाने मे भी आनाकानी करता। बदलते युग मे पढ़ाई के बिना मोहन का भविष्य क्या होगा? इसके लिए माता -पिता बड़े चिंता मे रहते थे। मोहन दिन भर कंचा( काच का … Read more

डॉक्टर बेटा बहुत व्यस्त है

जिस बेटे को बचपन में चोट लगती थी तो पिता की आँखों में आँसू आ जाते थे, उसी बेटे ने एक दिन पिता को अस्पताल के बाहर बैठाकर कहा— “पापा, आप हर छोटी बात के लिए मुझे फोन मत किया कीजिए… मेरी भी अपनी जिंदगी है।” पिता ने उस दिन जो जवाब दिया, उसे सुनकर … Read more

              ना  “पाक”  होगा 

          आओ मिलकर               एक दीया जलाएं                आगे बढ़कर                     तिमिर भगाएं              ईर्ष्या छोड़कर                   अपनत्व बढ़ाएं  … Read more

तर्पण 

पितर पक्ष आया बरसे हैं पुरखों का आशीष, तर्पण कर श्रद्धा से नतमस्तक चरणों में शीश, हैं यह सोलह दिनों का श्रद्धेय त्यौहार विशेष, पूर्वज आते देने अपना आशीर्वाद अशेष । मन के विषाद से मुक्त हो करें पवित्र प्रार्थना, नेह आशीष से पितरों के फलीभूत कामना, कर तर्पण कर्म वचन से सदा कीजिए आभार, … Read more

“ आज का गीत – ७५”

“बाप्पा, अबकी ऐसे आना” बाप्पा, अबकी ऐसे आना, मन में दीप जलाना, ढोल बजे तो प्रेम के बजें, करना धरती गुण खाना । बाप्पा, अबकी ऐसे आना, कुछ देकर ही जाना— माटी की खुशबू, निर्मल नदियाँ, और हरा-भरा जमाना। मखमल के मंडप कम कर देना, आँगन थोड़ा खुला रहे, फूलों की दो पंखुरियाँ हों, मन … Read more

विषय: “आओ अब एक दिया जलायें “

विधा: गीत कविता  दिनांक: १७ सितंबर  उपलक्ष्य : आदरणीय प्रधान मंत्री जी का जन्म दिन  “आज का गीत – ७६ “ “आओ फिर एक दिया जलायें” आशीर्वाद मिले राष्ट्र को, सच में सब घर का अँधेरा जाये, किसी कोने, किसी तिमिर का नाम-ओ-निशाँ न रहने पाये। अब तो कुछ दिन बदलें साथी, मुस्कानों की बगिया … Read more

राखी का त्योहार ( सरसी छंद )

भाई को कुंकुम तिलक लगा, करें बहन मनुहार, प्रेम डोर से सजी कलाई, राखी का त्योहार । संजोए प्यारी सी स्मृतियॉं, बूॅंदों की बौछार, बचपन की ये प्रीत निराली, खुशियों की झंकार । रिश्तों का रंगीला सावन, त्यौहारों की धूम, राखी लाई ढेरों खुशियॉं, झूला झूलें झूम । भाई और बहन का रिश्ता, बंधन है … Read more