कभी ये भी धुनें दिया करता था..
यूं ही बरसों से, धूल और गर्द के, साये में खामोश पड़े, साज के तार, चुपके से हिला के क्यूं तुमने याद दिला दिया कि….. कभी ये भी धुनें दिया करता था, कभी ये भी धुनें दिया करता था… तंज कसते है, मुझपे, दूब के कांटे से जख्मी हुए ये मोम के लोग, कि दर्द … Read more