*”इंडिया से भारत का पहचान की प्राप्ति”*

डॉ. पार्थ प्रदीप अधिकारी प्राचार्य प्रणबानंद इंटरनेशनल स्कूल, भारत सेवाश्रम संघ, तारापुर सिलचर।_ ऐतिहासिक युग में, नामों का हमेशा गहरा महत्व रहा है, जो अक्सर राष्ट्रों और उनके लोगों की धारणाओं, आकांक्षाओं और नियति को आकार देते हैं।  ऐसा ही मामला उस देश का है जिसे अब हम भारत के नाम से जानते हैं, यह … Read more

लघुकथा समय का प्रभाव डोली शाह

रानी के माता-पिता का देहांत बचपन में ही हो गया था, जिससे बड़े भाई ने उसका पालन- पोषण बड़ी कठिनाइयों से किया था। पढ़ाई के दौरान रानी की दोस्ती सिंटू नामक लड़के से हो गई । धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई। दोनों ने शादी के बंधन की योजना बनाई पर परिवार विरोध … Read more

“इंडिया से भारत, पहचान की प्राप्ति”

_डॉ. पार्थ प्रदीप अधिकारी प्राचार्य प्रणबानंद इंटरनेशनल स्कूल, भारत सेवाश्रम संघ, तारापुर शिलचर ऐतिहासिक युग में, नामों का हमेशा गहरा महत्व रहा है, जो अक्सर राष्ट्रों और उनके लोगों की धारणाओं, आकांक्षाओं और नियति को आकार देते हैं।  ऐसा ही मामला उस देश का है जिसे अब हम भारत के नाम से जानते हैं, यह … Read more

अतुल्‍य नेतृत्‍व में विकास के पथ पर भारत

प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी, पूर्व महानिदेशक, भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली किसी भी राष्‍ट्र की सुख-समृद्धि का पता इस बात से चलता है कि वहां की प्रजा कितनी सुखी है और आर्थिक, सामाजिक और वैचारिक रूप से कितनी विकसित हुई है। प्रजा का यह विकास उसके नेतृत्‍व की कुशलता, सामर्थ्‍य और दूरदर्शिता से पता … Read more

हमारा आपका भविष्य फल—

प्रिय मित्रों !!आज जैसे-जैसे चुनाव समीप आते जा रहे हैं ,वैसे-वैसे मैं अपने कुछ मित्रों से दूरी सी बढता देख रहा हूँ! मैं स्वीकार करता हूँ कि इसमें मेरे ही दोषों की प्रधानता होगी! किन्तु मैं कर भी क्या सकता हूँ  ? मन कुछ क्लान्त तथा उद्विग्न सा है,मैं सिलचर “असम”में रहता हूँ ! और … Read more

हिंदी_पखवाड़ा’ पर समस्त हिंदी प्रेमियों को हार्दिक शुभकामनायें।

भारत में आजादी के समय से ही अंग्रेजी शिक्षा- दीक्षा को अधिक महत्त्व दिया गया है। इस समय तो अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देने का भ्रमजाल इतना फैल चुका है कि राज्यों में संचालित परिषदीय विद्यालयों में भी अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देने का चलन हो गया है। पहले अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय शहरों तक … Read more

हिंदी से जुड़ा है आर्थिक सामाजिक विकास

हिंदी  मेरी मातृभाषा है । रोचक बात यह है कि हिंदी भाषी होने के बावजूद मुझे  ऐसे जगह पर काम करने का मौका मिला जहां पर अहिंदी भाषी लोग रहते हैं। और खास बात यह है कि मैं एक स्कूल में शिक्षक हूं , तो गांव के लोगों के साथ, बच्चों के माता-पिता के साथ … Read more

“हिंदी राष्ट्रभाषा”

हिंदी है हम सबकी राष्ट्रभाषा। पूर्ण करती है सबकी अभिलाषा। हिंदी बढ़ाती है देश की शान। बदल देती जीवन की परिभाषा।। मेल-जोल भी आपस में कराये। अपनेपन का एहसास जगाये। हिंदी अपनी आधिकारिक भाषा। वैमनस्य मिटा बस प्यार बढ़ाये।। हिंदी की हम ही करते उपेक्षा। पूरी करती हिंदी ही अपेक्षा। अंग्रेज़ी ने सभी को भरमाया। … Read more

हमारी हिन्दी

सरल सुंदर कोमल नित नई पहचान बनाती हुई अग्रसर होती हुई हमारी हिन्दी। गावों की पगडंडी से गुजर कर राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तरपर अपनी मुकाम हासिल कर निरंतर आगे बढ़ती हुई हमारी हिन्दी। विश्व के एक सौ बीस देशों में करोड़ों लोगों की भाषा मातृभाषा के रूप में फैली हुई हमारी हिन्दी। कबीर, तुलसी,सूरदास, रहीम राजेंद्र, … Read more

डिजिटल क्रांति से हिंदी को मिली नई पहचान

– प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी, पूर्व महानिदेशक, भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली मातृभाषा वैयक्तिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि का बोध कराती है। समाज को स्वदेशी भाव-बोध से सम्मिलित कराते हृए वैश्विक धरातल पर राष्ट्रीय स्वाभिमान की विशिष्ट पहचान दिलाती है। किसी भी देश का विकास तभी संभव है, जब उसके पास एक सशक्त भाषा हो। … Read more