प्रेरक कहानी 

बिस्तर पर लेटी हुई 83 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने अपने 87 वर्षीय बुजुर्ग पति से कहा: सुनो..मैंने बस खिड़की से बाहर देखा और सोचा कि गैराज की लाइट जल रही है। क्या तुम जाकर गैराज की लाइट बंद कर दोगे?” बूढ़ा आदमी बड़ी मुश्किल से बिस्तर से उठा, एक खिड़की खोली और देखा कि पाँच … Read more

मुल्क चलो आंदोलन, शहीदों को नमन।

आजादी की सुप्त कथा एक मेरे हाथ लगी है आज। चंद शब्दों में बयां करूंगा अंदर आग लगी है आज।। पढ़कर सीना कांप उठा और अंतर्मन थर्रा गया। बंधक बनकर कौन जिआ, मैं सोच कर घबरा गया।। घेरे में क्या आग कभी भी रोक के रक्खा जाता है। भुला था बृटीश हुकुमत ये ना संभव … Read more

बड़े ही बावरे हिन्दी के मुहावरे

मुहावरे ….. बुजुर्गों के अनुभवों की खान हैं… सच पूछो तो हिन्दी भाषा की जान हैं.. *बड़े ही बावरे हिन्दी के मुहावरे हिंदी के मुहावरे, बड़े ही बावरे है, खाने पीने की चीजों से भरे हैं… कहीं पर फल है तो कहीं आटा-दालें हैं, कहीं पर मिठाई है, कहीं पर मसाले हैं , फलों की … Read more

एक-एक शब्द को, बार-बार “पढ़ने” को “मन करता” है

ख्वाहिश नहीं, मुझे मशहूर होने की,”         आप मुझे “पहचानते” हो,         बस इतना ही “काफी” है। अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा “जाना” मुझे,         जिसकी जितनी “जरूरत” थी         उसने उतना ही “पहचाना “मुझे! जिन्दगी का “फलसफा” भी कितना अजीब … Read more

आयनाखाल का आईना

वक्त के निर्मम चपेटाघात सहते चीखते चिल्लाते गोली के शिकार बन वे दम तोड़कर चले गए। उनकी कमजोरियों का फायदा उठा लगाकर तोहमत उनपर मोलभाव करते हुए उनके लहूसे सनी मिट्टी को अपने भारी कदमों से आप रौंदकर चले गए। वे डूबते गए, पीसते गए आप सज्जनों के घर को आबाद करते करते वे बेघर … Read more

काश माँ तुम होती! ( माँ बेटे की बिछङुन)

मैं अभी संभला नहीं तुम क्यों चली गई ढूंढता हूँ दिनरात तुम किस गली गई? माँ तुम्हारे बिन मैं निराश हूँ हताश हूं मैं था कुंवर तेरा, सिर्फ अब बकवास हूँ घर तेरा इतना बङा संख्या बेशुमार है सब पङे अचेत ऐसे सबको बुखार है खुब सेवा करने पर भी तु बेदमाल थी आइसू में … Read more

नाचोनी नाचन लागी

कोयल कुहूक रही,तन को सुलगाई रही, केतेकी की खुशबू तो मस्ती बढ़ाई रही, खोपे में ‘कपोऊ’ लगा,बेचैनी बढ़ाई रही, कमरिया टूट रही,बलखाई के मचल रही. भाई बोहाग आई गवा, बिहू आई गवा, ढो़ल पेंपा बाजन लागे,नाचोनी नाचन लागी. ढ़ोलक की थाप पर,टोलीयां मचल रही, बिहू के गान पर,’होरु हजाई’ सजी रहा. पहिन के रेशमी कुर्ता, … Read more

खिंडो मति,बिखरो मति

आजकल देखणें में आवे है कि परिवार बिखरतो जावे है, कारण?सब सूं बड़ों यो है कि सगला ‘धौंस’दिखाणी चावे है. एक बाप रा चार बेटा आप आपरी धौंस तांई चारुं चार घर कर लेवे है बाप रा बाप बण जावे है. बियांई आपणे समाज में भी पैदा होवे आये दिन नई सिंस्था आप आपकी हेकड़ी … Read more

यह जिंदगी मिला क्यूं है।

न कोई चाहत है।      न कोई ख्वाब है।     समझ नहीं आता यह जिंदगी मिला क्यूं है। हर मोड़ पे खमखाह बेवजह भटकते रहते है। कभी उदासी में चुप के रोते है। कभी खुद को मिटा देना चाहते है। अब तक यूं ही नहीं पता      यह जिंदगी मिला क्यूं है। … Read more

नन्ही आंखों से संसार देखा

नन्ही आंखों से संसार देखा, दूसरों की खुशी में खुद को देखा रसोई में बनी वो पहली रोटी अपनी नहीं भाई की थाली में देखा, सरकारी स्कूल में मेरी पढ़ाई, खर्चो में बचत होते देखा, प्राइवेट स्कूल में भाई की पढ़ाई, कम खर्च में भी होते देखा, शादी मेरी हो क्या गई, पति से अपनी … Read more