नवरात्र की पूर्व संध्या पर
नौ रात्रियों में नवचेतना इन्द्रिय-संयम का वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक विमर्श है नवरात्र सनातन परम्परा में पर्व केवल उल्लास, अनुष्ठान और सामाजिक समागम के अवसर नहीं हैं; वे मनुष्य के शरीर, मन, बुद्धि, आचरण, समाज और प्रकृति के संतुलन को पुनर्स्थापित करने वाली सुव्यवस्थित जीवन-पद्धतियाँ हैं। यही कारण है कि भारतीय पर्व-परम्परा में काल, ऋतु, आहार, … Read more