डिब्रूगढ़: डिब्रूगढ़ जिले के विभिन्न हिस्सों में सूअरों की असामान्य मौतों की खबरों के बाद पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विभाग की एक टीम ने स्थिति का जायजा लेने के लिए मोरान राजस्व मंडल के अंतर्गत नाहरानी सोनowal और बहानी पाथर गांवों के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
डिब्रूगढ़ के जिला पशुपालन एवं पशु चिकित्सा अधिकारी के निर्देश पर यह दौरा किया गया। निरीक्षण के दौरान टीम को जानकारी मिली कि बहानी पाथर गांव के एक किसान के यहां लगभग दस दिन पहले १६ सूअरों की मौत हो गई थी। बताया गया कि खोवांग स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय के एक संविदा कर्मचारी ने सूअरों का प्राथमिक उपचार किया था। हालांकि, किसान ने उपचार के बाद आगे की जानकारी नहीं दी और न ही सूअरों की मौत के संबंध में पशु चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों को सूचित किया।
वहीं, नाहरानी सोनोवाल गांव में भी दो सूअरों की मौत होने का मामला सामने आया। बताया गया कि स्थानीय सूअर पालकों ने ही उनका उपचार किया था और इस घटना की जानकारी पशु चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों को नहीं दी गई थी।
विभागीय टीम ने दोनों प्रभावित फार्मों का दौरा करने के साथ-साथ दोनों गांवों के आसपास के क्षेत्रों का भी निरीक्षण किया। इस दौरान सूअर पालकों को फार्म में जैव-सुरक्षा के उपायों तथा सूअरों को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए आवश्यक सावधानियों के बारे में जागरूक किया गया।
रोगों की निगरानी के तहत आसपास के उन सूअर फार्मों से भी यादृच्छिक रूप से रक्त के नमूने एकत्र किए गए, जहां सूअरों की मौत की कोई सूचना नहीं मिली थी। इन नमूनों को आगे की जांच के लिए भेजा जाएगा, ताकि पशुओं के स्वास्थ्य की स्थिति का आकलन किया जा सके।
पशु चिकित्सा विभाग ने पशुपालकों से अपील की कि सूअरों सहित किसी भी पशुधन में बीमारी के लक्षण दिखाई देने या असामान्य मौत होने पर तुरंत निकटतम पशु चिकित्सा केंद्र को सूचित करें। विभाग ने कहा कि संक्रामक बीमारियों के प्रसार को रोकने और पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय पर सूचना देना, उचित पशु चिकित्सा उपचार कराना तथा जैव-सुरक्षा के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।