NH-37 पर राहत की शुरुआत: पुलिस एस्कॉर्ट में रवाना होने लगे ट्रक, लेकिन सड़ी सब्जियों और फलों से महंगाई बढ़ने की आशंका।

चंद्रशेखर ग्वाला लखीपुर, 9 जुलाई : असम और मणिपुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-37 (NH-37) पर पिछले कई दिनों से हजारों मालवाहक ट्रक और ईंधन टैंकर फंसे हुए थे। राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (NH-2) के बंद रहने तथा मणिपुर में जातीय हिंसा के कारण आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई, जिससे पूरे क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था चरमरा गई।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कछार जिला प्रशासन और मणिपुर के जिरिबाम जिला प्रशासन ने संयुक्त पहल की। हाल ही में लखीपुर थाना परिसर में कछार के जिला आयुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा जिरिबाम के जिला आयुक्त और पुलिस अधीक्षक के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मौजूदा परिस्थितियों की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया कि प्रतिदिन पुलिस एस्कॉर्ट की सुरक्षा में मालवाहक ट्रकों और ईंधन टैंकरों को उनके गंतव्य की ओर रवाना किया जाएगा, ताकि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य हो सके।

पिछले लगभग बारह दिनों से राशन, फल, सब्जियां और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं से लदे हजारों वाहन राजमार्ग पर फंसे रहे। लंबे समय तक खड़े रहने के कारण बड़ी मात्रा में कच्चे फल और सब्जियां खराब होने लगी हैं, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर, जिन राज्यों तक ये आवश्यक वस्तुएं समय पर नहीं पहुंच सकीं, वहां बाजारों में आपूर्ति प्रभावित होने से कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।

राजमार्ग पर फंसे ट्रक चालकों और खलासियों की परेशानियां भी कम नहीं रहीं। कई दिनों तक सड़क पर ही रुकने को मजबूर इन लोगों को भोजन और अन्य जरूरी सामान आसपास की दुकानों से ऊंचे दामों पर खरीदना पड़ा। चालकों का आरोप है कि कुछ स्थानीय दुकानदारों ने स्थिति का फायदा उठाकर मनमाने दाम वसूले, जिससे उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ गई।

हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त बैठक के बाद हालात में धीरे-धीरे सुधार दिखाई देने लगा है। बुधवार से पुलिस सुरक्षा के बीच ट्रकों की आवाजाही शुरू होने से लंबे समय से फंसे वाहन चालकों में राहत और खुशी का माहौल है। अब उन्हें उम्मीद है कि वे शीघ्र ही अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।

इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक परिवहन बाधित रहने से खराब हुई फल एवं सब्जियों की भरपाई तुरंत संभव नहीं होगी। ऐसे में आने वाले दिनों में बाजारों में ताजा कृषि उत्पादों की कमी और उनकी कीमतों में बढ़ोतरी का असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर साफ दिखाई दे सकता है। प्रशासन के सामने अब चुनौती केवल यातायात को सामान्य करना ही नहीं, बल्कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को शीघ्र बहाल कर महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखना भी है।

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