प्रेरक कहानी, बदनसीब बेटी और पिता

लड़कियों के एक विद्यालय में आई नई अध्यापिका बहुत खूबसूरत थी, बस उम्र थोड़ी अधिक हो रही थी लेकिन उसने अभी तक शादी नहीं की थी… सभी छात्राएं उसे देखकर तरह तरह के अनुमान लगाया करती थीं। एक दिन किसी कार्यक्रम के दौरान जब छात्राएं उसके इर्द-गिर्द खड़ी थीं तो एक छात्रा ने बातों बातों … Read more

स्वामी सहजानन्द सरस्वती –किसान आंदोलन के जनक  @ गोपाल जी राय

# जिनका तपा तपाया जीवन ही किसी जगत-सन्देश से कम नहीं है। स्वामी जी का जन्म उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिले के देवा गांव में वर्ष 1889 में महाशिवरात्रि के दिन हुआ था। चूंकि बचपन में ही उनकी माताजी का स्वर्गवास हो गया था, इसलिए पढ़ाई के दौरान ही उनका मन आध्यात्म में रमने लगा। फिर … Read more

*पराजय*

एक *डिप्टी कलेक्टर* के तौर पर जब *जिला शिक्षा अधिकारी* का प्रभार मिलने के बाद ज्वाइन किया..तो जानकारी हुई की ये जिला ..स्कूली शिक्षा के लिहाज से बहुत पिछड़ा हुआ हैं… वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कहा आप ग्रामीण इलाकों पर विशेष ध्यान दें.. बस तय कर लिया … महीने में आठ दस दिन जरूर ग्रामीण … Read more

लघुकथा

मार्मिक प्रसंग आंखो में आंसु आ गए पढ़ कर  एक दिन एक बुजुर्ग डाकिये ने एक घर के दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा…”चिट्ठी ले लीजिये।” आवाज़ सुनते ही तुरंत अंदर से एक लड़की की आवाज गूंजी…” अभी आ रही हूँ…ठहरो।” लेकिन लगभग पांच मिनट तक जब कोई न आया तब डाकिये ने फिर कहा..”अरे … Read more

राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करें- पार्वती कोइरी

राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करें ______________________ आज़ादी का है अमृत महोत्सव आओ मिल कर गुणगान करे तिरंगा है गौरव देश का इस ध्वज का सम्मान करें इसी तिरंगे ने हमारे मातृभूमि का मान बढ़ाया है इसी तिरंगे में लिपट कर लाखों शहीद घर पे आएं हैं। गली मुहल्ले घर और वाहनों में जैसे तिरंगा लहराते … Read more

हर घर में तिरंगा फहराये- डॉक्टर श्रीधर द्विवेदी

हर घर में तिरंगा फहराये किसने हुंकार भरी थी यह , ‘मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी ‘, किसने ललकारा गोरों को , ‘है स्वतंत्रता जन्माधिकार ‘I ‘अंग्रेजों अब भारत छोड़ो ‘ यह नारा किसने किया बुलंद, उद्घोष किया था यह किसने , ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूँगा ‘I ‘कलम आज उनकी जय … Read more

देश प्रेरक गाथा

अनोखा है भारत देश हमारा, है सच्चे इंसानों का ढेर यहां, भरे पड़े हैं देश समस्त, खेत खलिहानों से जगमगाया सारा, है जगह-जगह पहाड़ यहां, मैदान यहां। पठारो और रेगिस्तान का ढेर यहां, गर्मी और बौछारों के सदाबहार यहां, मौसम को देख बदलते, रंग बिरंगे फूलों का त्यौहार यहां, होड़ लगी पड़ी अच्छी इंसानों की … Read more

अपनी अलग पहचान

क्या कहे इस जिंदगी को हम, राह देख अवसर बदल देती, हाल देख मौसम बदल जाते, मिजाज देख परिस्थितियां बदल जाती, लेकिन , लेकिन है कुछ-कुछ खिलाड़ी हम भी, रखते चाह हम बदलने की, हर अनजान लम्हों को । चाहे छिन जाए आसमां हमारी,     हम वह पक्षी नहीं जो उड़ना छोड़ दे, आज … Read more

मन का हर्ष

मन का हर्ष आज मन में एक हर्ष है, हर्ष से मन उत्फुल्लित है, हर्ष ही कारण, स्वाभिमान है हर्ष, आभार हर्ष के नाम, दिन भी है हर्ष, वामसी है हर्ष की जान, छोटी सी कबिता हर्ष के नाम।।। [कबि : रत्नज्योति दत्ता, वैशाली, जुलाई १२, २०२२]