ना शिकवा ना शिकायत
क्या है आज ये सब कुछ, कुछ नया है कुछ बदला सा, कुबूल है दिया हर तोहफा तेरा, तू दे दे मुझे जो है तेरी मनसा। हमने देखा है जिंदगी का हर बदला स्वरूप, हर पल बदलते देखा है लम्हा कुछ, बदल गया है मानो सारा जहां, … Read more
क्या है आज ये सब कुछ, कुछ नया है कुछ बदला सा, कुबूल है दिया हर तोहफा तेरा, तू दे दे मुझे जो है तेरी मनसा। हमने देखा है जिंदगी का हर बदला स्वरूप, हर पल बदलते देखा है लम्हा कुछ, बदल गया है मानो सारा जहां, … Read more
बाढ़__ छाया अब तो खौफ बाढ़ का, चारों ओर । चिंता में अब रात बीतती , डर में भोर ।। डूब गए हैं गांव न जाने, कितनी दूर । कैसे हो भरपाई सबकी , इसकी पूर ।। बिखर गया है घर तो अब है, टुकड़े चार । नहीं दिख रहा दूर-दूर तक, घर का द्वार … Read more
*देहरी, आंगन, धूप नदारद।* *ताल, तलैया, कूप नदारद।* *घूँघट वाला रूप नदारद।* *डलिया,चलनी,सूप नदारद।* आया दौर फ्लैट कल्चर का, देहरी, आंगन, धूप नदारद। हर छत पर पानी की टंकी, ताल, तलैया, कूप नदारद।। लाज-शरम चंपत आंखों से, घूँघट वाला रूप नदारद। पैकिंग वाले चावल, दालें, डलिया,चलनी, सूप नदारद।। ?? बढ़ीं गाड़ियां, जगह कम … Read more
” ई-वसुधरा प्रकाशन,पटना द्वारा नवरात्रि विशेषांक साझा काव्य संग्रह “नमामि दुर्गे” प्रकाशित ई-वसुधरा प्रकाशन,पटना द्वारा आज नवरात्रि विशेषांक साझा काव्य संग्रह “नमामि दुर्गे” का प्रकाशन किया गया। इस पुस्तक में माता रानी के नौवो स्वरूपों की आराधना की गयी हैं। यह पुस्तक माता रानी के चरणों में समर्पित हैं। इस पुस्तक के संपादक आकाश सिंह … Read more
नई दिल्ली, पुत्रिकामेष्टि कथा कहने के लिए साहस चाहिए। समाज में जिन विषयों पर सोचना भी वर्जित है, वहां सहजता से उस बात को लिख जाना, एक धारा के विपरीत रचते लेखक के बस की ही बात है। यह बात प्रख्यात साहित्यकारों और संपादकों ने शुक्रवार को सच्चिदानंद जोशी के नए कहानी संग्रह पुत्रिकामेष्टि के … Read more
यह पोस्ट काफी पुरानी है, पता नही किसने लिखा – सत्य घटना है या नही। पर जब भी पड़ता हू, मन छू जाता है: “मैं पैदल घर आ रहा था । रास्ते में एक बिजली के खंभे पर एक कागज लगा हुआ था । पास जाकर देखा, लिखा था: कृपया पढ़ें “इस रास्ते पर मैंने … Read more
।। एक जुट।। एक जुट एक मंच मिलकर हमे बनाना है आपसी मतभेद भूल कर सबको हाथ बढाना है।। हैं बिखरे हुवे बादल जो बिन बारिश घूम रहे हैं बादल जब जुड़ जाय तो, … Read more
आँसुओं का कीमत भला तुम क्या जानो। आँसुओं की एक छोटी सी झलक भी मैं दुनिया के सामने छिपा नहीं पाता हूँ। जब आता है मेरा बोलने का समय, अपना फिलींग उसको बता नहीं पाता हूँ। कोशिश करता हूँ हजार,लेकिन भावनाओं के समंदर में अक्सर बह जाता हूँ। चित्त रहता है उथल-पुथल और हैरान, दुखी … Read more
श्री राम जानकी मंदिर समिति,एच.पी.सी.टाउनशीप, पंचग्राम (आसाम) के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध हिन्दी कथाकार श्री चित्तरंजन लाल भारती के सम्मानार्थ एक विदाई समारोह का आयोजन संध्या मंदिर परिसर में किया गया जिसमें एच.पी.सी.टाउनशीप, पंचग्राम (आसाम) के पारिवारिक सदस्यों ने अपनी परम्परा के अनुरूप उपस्थित होकर श्री चित्तरंजन लाल भारती जी को उनकी उत्कृष्ट साहित्य सेवा के … Read more