गीता के ऊपर दिल्ली के कवि हरेंद्र नाथ श्रीवास्तव जी की कविता
निम्न कविता ( जो मैंने गीता की अपनी समझ के बारे में लिखी है और १८ अड़े का सार १८ पड़ो में अपनी अकिंचन बुद्धि के अनुसार लिखा है) मैं “ गीता “समझ रहा हूँ – हरेंद्र नाथ श्रीवास्तव मैं “ गीता “समझ रहा हूँ जो अर्थ निकालेंगे मैं उनसे कह रहा हूँ जाने जीने … Read more