” क्या होता है पितृ पक्ष , और क्यों करते हैं श्राद्ध ? ” सन्दीप अग्रवाल

हिन्दू धर्म के शास्त्रों में तीन प्रकार के ऋण कहे गये है – देव ऋण , ऋषि ऋण एवमं पितृ ऋण | और इनमें से पितृ ऋण के निवारण हेतु ही पितृ पक्ष का वर्णन किया गया है , जिसे सरल शब्दों में श्राद्ध कर्म भी कहा जाता है | शास्त्रों में वर्णन है कि … Read more

हम तेरे याद में सारा आलम खो बैठे ! खो बैठे ! तुम कहते हो कि ऐसे प्यार को भूल जाओ ! भूल जाओ ? आनंद शास्त्री

मित्रों ! अंततः शिवसेना के मार्ग पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी भागवताचार्य जी धीरे-धीरे ले जाते दिख रहे हैं ! कभी संघ की शाखाओं में ध्वज प्रणाम कर जो शपथ हमलोगों ने ली थी ! उन्होंने भी ली होगी ! आज उस शपथ की धज्जियां उड़ती देख अंतःस्थल किसी विषैले फोडे की तरह दुखता … Read more

पितृ-सूक्त मंत्र~१ अंक~१

प्रिय मित्रों !अपने पितृ-गणों को समर्पित करती हुयी इस श्रृंखला का मैं अपने पूर्वजों,ऋषियों के चरणों में इसकी प्रथम ऋचा प्रस्तुत करता हूँ- “उदीरतामवर उत् परास उन्मध्यमाः पितरः सोम्यासः। असुं य ईयुरवृका ऋतज्ञास्ते नोऽवन्तु पितरो हवेषु॥” सुधिजन! ऋग्वेद दशम मण्डल के १५ वें सूक्त की १ से लेकर १४ पर्यन्त की ऋचायें पितृ-सूक्त के नाम … Read more

सनातनी संस्कृति के ध्वज वाहक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी कुलपति, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा उपनिषदों में वर्णित है – ‘माता भूमि पुत्रोऽहं पृथिव्या:’  अर्थात् भूमि माता है एवं हम उसके पुत्र हैं। मानव हृदय में इस सूत्र का अनुभव होने पर राष्ट्रीयता की भावना बलवती होती है एवं राष्ट्र निर्माण के अंकुर प्रस्फुटित होते हैं। राष्ट्र रूपी संगठन को सम्यक रूप … Read more

आजादी के बाद महिलाओं को 33% आरक्षण फिर भी संपूर्णता बाकी

हालांकि सताइस साल बाद प्रधान नरेंद्र मोदी ने अपने दुसरे कार्यकाल के लगभग अंतिम पङाव में काफी आपाधापी के बाद नये संसद भवन में महिलाओं को 33% आरक्षण देने के लिए लोकसभा में बिल पेश किया जो निश्चित रूप से सराहनीय कदम है। इस बिल को पास कराने के लिए काफी पापङ बेलने पङे। इस बिल … Read more

हिंदी हैं हम: हाथों को दें आराम, मोबाइल में बोलकर करें हिंदी टाइपिंग, यह है तरीका

हिंदीहैंहम: हाथों को दें आराम, मोबाइल में बोलकर करें हिंदी टाइपिंग, यह है तरीका 14 सितंबर को भारत में हिंदी दिवस मनाया जाता है। 14 सितंबर 1949 को ही संविधान सभा ने यह निर्णय लिया था कि हिंदी केन्द्र सरकार की आधिकारिक भाषा होगी। उसके बाद 14 सितंबर 1953 को पहली बार हिंदी दिवस मनाया … Read more

*”इंडिया से भारत का पहचान की प्राप्ति”*

डॉ. पार्थ प्रदीप अधिकारी प्राचार्य प्रणबानंद इंटरनेशनल स्कूल, भारत सेवाश्रम संघ, तारापुर सिलचर।_ ऐतिहासिक युग में, नामों का हमेशा गहरा महत्व रहा है, जो अक्सर राष्ट्रों और उनके लोगों की धारणाओं, आकांक्षाओं और नियति को आकार देते हैं।  ऐसा ही मामला उस देश का है जिसे अब हम भारत के नाम से जानते हैं, यह … Read more

“इंडिया से भारत, पहचान की प्राप्ति”

_डॉ. पार्थ प्रदीप अधिकारी प्राचार्य प्रणबानंद इंटरनेशनल स्कूल, भारत सेवाश्रम संघ, तारापुर शिलचर ऐतिहासिक युग में, नामों का हमेशा गहरा महत्व रहा है, जो अक्सर राष्ट्रों और उनके लोगों की धारणाओं, आकांक्षाओं और नियति को आकार देते हैं।  ऐसा ही मामला उस देश का है जिसे अब हम भारत के नाम से जानते हैं, यह … Read more

अतुल्‍य नेतृत्‍व में विकास के पथ पर भारत

प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी, पूर्व महानिदेशक, भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली किसी भी राष्‍ट्र की सुख-समृद्धि का पता इस बात से चलता है कि वहां की प्रजा कितनी सुखी है और आर्थिक, सामाजिक और वैचारिक रूप से कितनी विकसित हुई है। प्रजा का यह विकास उसके नेतृत्‍व की कुशलता, सामर्थ्‍य और दूरदर्शिता से पता … Read more

हमारा आपका भविष्य फल—

प्रिय मित्रों !!आज जैसे-जैसे चुनाव समीप आते जा रहे हैं ,वैसे-वैसे मैं अपने कुछ मित्रों से दूरी सी बढता देख रहा हूँ! मैं स्वीकार करता हूँ कि इसमें मेरे ही दोषों की प्रधानता होगी! किन्तु मैं कर भी क्या सकता हूँ  ? मन कुछ क्लान्त तथा उद्विग्न सा है,मैं सिलचर “असम”में रहता हूँ ! और … Read more