चाय उद्योग की सुनो पुकार-वरना होगा बंटाधार-(1)— आनंद शास्त्री
सम्माननीय मित्रों ! पहले जब कभी यहाँ अर्थात अखण्ड असम में यत्र तत्र सर्वत्र घनघोर जंगल थे ! प्रकृति के आंचल तले हमारे गिरिवासी वनवासी सीधे सादे सच्चे लोग बसते थे अर्थात लगभग सन् 1821 के आसपास इस्ट इंडिया कम्पनी ने सर्वप्रथम दो उद्योगों की नींव रखी थी! वे स्वार्थी तत्त्व थे ! उनकी दृष्टि … Read more