हिन्दुत्व की आग में हेमंत सोरेन भी राख क्यों होना चाहते हैं ?       — आचार्य विष्णु हरि

हिन्दू आस्था को प्रतिबंधित करने और दमन करने की हेमंत सरकार की नीति न केवल बेपर्द हो गयी है बल्कि इस पर न्यायिक प्रश्न भी खड़ा हुआ है। झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड की हेमंत सरकार को न केवल बेनकाब किया है बल्कि गंभीर आलोचना भी की है। हिन्दू आस्था को प्रतिबंधित करने और दमन करने … Read more

जन गण मन के महानायक हैं वाजपेयी

अटल जी का नाम सारी दुनिया के प्रमुख नेताओं में वरिष्ठ है। वे भारतीय जन गण मन के महानायक हैं। उनकी स्मृति बार-बार आती है। उनका पूरा व्यक्तित्व एक छंद और भावप्रवण काव्य था। विधाता ने उन्हें पूरे जतन से गढ़ा था। प्रकृति ने अपना सारा मधुरस उड़ेल दिया था उनके व्यक्तित्व में। वे सरस … Read more

ममता बनर्जी का राजनीतिक वार घायल हुए सभी दिग्गज — मदन सुमित्रा सिंघल

जब भी लोकसभा चुनाव आते हैं सताधारी दल के विरोध में विपक्षी दलों द्वारा लामबंद होते रहे हैं। पहले भाजपा को अक्षूत पार्टी मानकर कांग्रेस के भी विरोध में तिसरा मोर्चा यहाँ तक की चौथा मोर्चा तक बनाया गया। यह कसरत राजनीतिक दलों में होती रहती हैं। आज भाजपा के पास 303 स्वयं के सांसद … Read more

भारतीय इक्विटी और इण्डेक्स का कमाल विश्व बेहाल-(1) — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! वैश्विक अर्थव्यवस्था के सापेक्ष भारतीय अर्थव्यवस्था आज सभी चुनौतियों को बहुत पीछे छोड़कर मंथर गति से किसी एरावत हाथी की तरह वैश्विक बाजारों की अनदेखी करती हुयी चलती जा रही है ! चलती ही जा रही है ! मानवीय जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की आवश्यकताओं को अपनी पैनी नजर से भांपकर स्वदेशी … Read more

“दीर्घा वै जाग्रतो रात्रिः दीर्घ श्रान्तस्य योजनम् — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! अंतर्राष्ट्रीय असुरक्षित,सामरिक अत्याधुनिक एवं प्राचीन अस्त्रों के साथ-साथ शस्त्रों की अंधी दौड़,प्राकृतिक आपदाओं,अतिशय विकसित एवं अतिशय अविकसित राष्ट्रों के नाम पर छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटी तथाकथित मानव सभ्यता आज किंकर्तव्यविमूढ़ सी हुयी आत्मविश्लेषण करने को बाध्य हो चुकी ! और ऐसा होना ही था ! महाभारत से लेकर प्रथम एवं द्वितीय विश्वयुद्ध … Read more

“न कालो दण्डमुद्यम्य शिरः कृतन्ति कस्यचित्” — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! संत तुलसीदास जी कहते हैं कि- “राम किसी को मारत नहीं, इतने पापी नहीं राम। अपने- अपने पाप से, मर जाते हैं आपोआप॥” यत्र तत्र सर्वत्र मंहगाई,बेरोजगारी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाला देश का सबसे मंहगा और भ्रष्ट राजनैतिक दल अर्थात-“भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस” आज अपनी अर्थी अपने कन्धों पर ढोने को … Read more

भिखारी ठाकुर प लिखाइल पहिला किताब 

[ इ किताब भिखारी ठाकुर जी के जिअता में ही लिखाइल रहे आ किताब के लेखक एह किताब के लिखे से पहिले, क हाली भिखारी ठाकुर जी से मिल चुकल रहनी । ] किताब के नाव –  भिखारी ठाकुर किताब के लेखक – महेश्वर प्रसाद ( महेश्वराचार्य ) किताब के प्रकाशन वर्ष – 1964 निःसंदेह … Read more

विलक्षण गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन —  अतुल कोठारी

  शून्य और अनंत (इन्फिनिटी) जैसी गणितीय शोध न हुई होती तो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के जिन शिखरों पर मानव सभ्यता आज खड़ी है, वहां तक पहुंचना शायद संभव न हो पाता। इन शोधों के बिना मंगल तक पहुंचने, चांद और धरती के बीच की दूरी का अंदाजा लगाने या समुद्र की गहराई नापने जैसे … Read more

“भिखारी ठाकुर के जनमदीन आ छपरा के गाँव” 

सरोज सिंह जी के कहानी “करियट्ठी” पर काम बहुत महीना से सुरु रहे बाकिर एक्टर लोकेशन इत्यादि के काम सितम्बर में सुरु भईल, मित्र अंकित आनंद भाई छपरा के अपहर गांव के रहेवाला बाड़ें, आपन घर देलन शूटिंग ला | अक्टूबर में तीन चार हाली उनकर गाँवे गईनी, सब फाइनल भईल | फिल्म में बहुत … Read more

वयमिह परितुष्टा वल्कलैस्त्वं दुकूलैः — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! एक योगी और राजा में अंतर होता है ! महाराजा को कितना भी मिल जाये ! वो संतुष्ट नहीं होते ! उनकी पिपासा बढती ही जाती है ! बढती ही जाती है, अंतर इतना ही होता है कि या तो उनकी प्यास देशवासियों के खून से बुझती है अथवा उनकी प्यास देश … Read more