मणिना भूषितः सर्पः किमसौ न भयङ्करः — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! राज्यस्तरीय न्यायपालिका एवं सर्वोच्य न्यायपालिका ने एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण निर्णय देकर हमारे अपने बांग्ला भाषी लोगों को पुनश्च गम्भीर समस्याओं की गहरी खन्दक में ढकेल दिया है ! बांग्ला देश से आये हमारे बंगबन्धुओं को आज अपने उन समभाषी मुस्लिम लोगों की आतंकवादी एवं अतिक्रमणकारी गतिविधियों के कारण चिंतित होना पडा … Read more

मंगल पांडे जी की मूर्ति स्थापना एक अनसुलझी पहेली क्यूँ ? — आनंद शास्त्री

मंगल पाण्डे जी की मूर्ति स्थापना हमारी मांग के निहितार्थ सम्माननीय मित्रों ! भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, अग्रीम एवं प्रथम बलिदानी मंगल पाण्डे जी की स्मृति में अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुवे हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री श्रीमान हेमन्तो बिस्वशर्मा जी,प्रधानमंत्री श्रीमान नरेन्द्र मोदी जी असम एवं भारत सरकार के साथ-साथ हमारी मातृसंस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक … Read more

चाय उद्योग की सुनो पुकार-वरना होगा बंटाधार-(1)— आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! पहले जब कभी यहाँ अर्थात अखण्ड असम में यत्र तत्र सर्वत्र घनघोर जंगल थे ! प्रकृति के आंचल तले हमारे गिरिवासी वनवासी सीधे सादे सच्चे लोग बसते थे अर्थात लगभग सन् 1821 के आसपास इस्ट इंडिया कम्पनी ने सर्वप्रथम दो उद्योगों की नींव रखी थी! वे स्वार्थी तत्त्व थे ! उनकी दृष्टि … Read more

भारतीय इक्विटी और इण्डेक्स का कमाल विश्व बेहाल-(2) — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! एनएसई एवं बीएसई को सरकारी जूवे एवं सट्टेबाजी के नाम से बदनाम उन धैर्यहीन लोगों ने किया है जो कभी मुम्बई और महाराष्ट्र में संचालित जहन्नुम नशीं दाऊद इब्राहीम के -“मटके के खेल ” को जानते और खेलते थे ! मैं समझता हूँ कि भारतीय एवं वैश्विक शेयर बाजार में लिस्टेड विशुद्ध … Read more

भारतीय इक्विटी और इण्डेक्स का कमाल विश्व बेहाल-(1) — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! वैश्विक अर्थव्यवस्था के सापेक्ष भारतीय अर्थव्यवस्था आज सभी चुनौतियों को बहुत पीछे छोड़कर मंथर गति से किसी एरावत हाथी की तरह वैश्विक बाजारों की अनदेखी करती हुयी चलती जा रही है ! चलती ही जा रही है ! मानवीय जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की आवश्यकताओं को अपनी पैनी नजर से भांपकर स्वदेशी … Read more

“दीर्घा वै जाग्रतो रात्रिः दीर्घ श्रान्तस्य योजनम् — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! अंतर्राष्ट्रीय असुरक्षित,सामरिक अत्याधुनिक एवं प्राचीन अस्त्रों के साथ-साथ शस्त्रों की अंधी दौड़,प्राकृतिक आपदाओं,अतिशय विकसित एवं अतिशय अविकसित राष्ट्रों के नाम पर छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटी तथाकथित मानव सभ्यता आज किंकर्तव्यविमूढ़ सी हुयी आत्मविश्लेषण करने को बाध्य हो चुकी ! और ऐसा होना ही था ! महाभारत से लेकर प्रथम एवं द्वितीय विश्वयुद्ध … Read more

“न कालो दण्डमुद्यम्य शिरः कृतन्ति कस्यचित्” — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! संत तुलसीदास जी कहते हैं कि- “राम किसी को मारत नहीं, इतने पापी नहीं राम। अपने- अपने पाप से, मर जाते हैं आपोआप॥” यत्र तत्र सर्वत्र मंहगाई,बेरोजगारी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाला देश का सबसे मंहगा और भ्रष्ट राजनैतिक दल अर्थात-“भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस” आज अपनी अर्थी अपने कन्धों पर ढोने को … Read more

धम्मपद यमकवग्गो~१७ सूत्र- अंक~१७ — आनंद शास्त्री

प्निय मित्रों ! नित्यसत्यचित्त बुद्धमुक्त पदऽस्थित तथागत महात्मा बुद्ध द्वारा उपदेशित धम्मपद के भावानुवाद अंतर्गत स्वकृत बाल प्रबोधिनी में यमकवग्गो के 18 वें पद्द का पुष्पानुवाद उनके ही श्री चरणों में निवेदित कर रहा हूँ— “इध तप्पति पेच्च तप्पति पापकारी उभयत्ध तप्पति। पापं मे कतं ति तप्पति भिय्यो तप्पति दुग्गतिं गतो।१७।। इसे संस्कृत में कहते हैं … Read more

धम्मपद यमकवग्गो~ सूत्र-16 अंक~16

प्निय मित्रों ! नित्यसत्यचित्त बुद्धमुक्त पदऽस्थित तथागत महात्मा बुद्ध द्वारा उपदेशित #धम्मपद के भावानुवाद अंतर्गत स्वकृत बाल प्रबोधिनी में यमकवग्गो के 16 वें पद्द का पुष्पानुवाद उनके ही श्री चरणों में निवेदित कर रहा हूँ— “इध मोदति पेच्च मोदति कतपुञ्ञो उभयत्थ मोदति। सो मोदति सो पमोदति दिस्स्वा कम्म विसुद्धिमत्तनो।।” इसे संस्कृत में कहते हैं कि- मोदतेऽत्र … Read more

धम्मपद यमकवग्गो~15 सूत्र- अंक~15 — आनंद शास्त्री

नित्यसत्यचित्त बुद्धमुक्त पदऽस्थित तथागत महात्मा बुद्ध द्वारा उपदेशित धम्मपद्द के भावानुवाद अंतर्गत स्वकृत बाल प्रबोधिनी में यमकवग्गो के १५ वें पद्द का पुष्पानुवाद उनके ही श्री चरणों में निवेदित कर रहा हूँ— “इध सोचति पेच्च सोचति पापकारी उभयत्थ सोचति। सोचति सो विहञ्ञति दिस्स्वा कम्म किलिट्ठत्तनो।।१५।।”अर्थात शोचतीह तथा प्रेत्य चोभयत्राऽपि पापकृत्। दुष्कर्म चात्मनो दृष्ट्वा शोचत्येष विहन्यते।। सम्माननीय … Read more