“सिंहासन खाली करो कि जनता आती है !”– आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! महाभारत युद्ध के निहितार्थ अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण हैं ! जन्मान्ध अंधे धृतराष्ट्र के उन वचनों को आप स्मरण करें – ” धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। मामकाः पाण्डवाश्चैव किमऽकुर्वन्तु सञ्जयः॥” अर्थात धृतराष्ट्र की बुद्धि आप देखिये-“मेरे और पाण्डु के पुत्र” ? अर्थात भाई भाई के पुत्र अलग हैं ? अर्थात हमारी मातृसंस्था और … Read more

संदेशखाली का संदेश और तृणमूल का ‘शाहजहाँ’ – डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

पश्चिमी बंगाल के एक ग्राम नंदी ग्राम को उस गाँव के लोगों के सिवा कोई नहीं जानता था । लेकिन सारी दुनिया के वे लोग जो विश्व के सामाजिक आन्दोलनों में रुचि रखते हैं , नंदी ग्राम को जानते हैं । नंदी ग्राम के लोगों ने पश्चिमी बंगाल की कम्युनिस्ट सरकार की तानाशाही का विरोध … Read more

“अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत….” — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! आज पुनश्च अपने एक अभिन्न मित्र,सखा, शिष्य और भी बहुत बहुत कुछ ऐसे महामानव का दैहिक संग छूट गया जिसकी वेदना मनोमस्तिष्क को इस काया के पतन तक सालती रहेगी झकझोरती रहेगी ! मुझसे आयु,पद विद्यादि में हजारों हजार गुना श्रेष्ठ एक आदर्श ऋषितुल्य-“श्रीमान अमरनाथ खण्डेलवाल जी” ने इस नश्वर देह को … Read more

रामकृष्ण परमहंस ब्रह्मर्षि, देवर्षि एवं त्रिकालदर्शी थे – ललित गर्ग-

अंगुलियों पर गिने जाने योग्य कुछ महान् व्यक्तियों को समय-समय पर भारत की रत्नगर्भा वसुंधरा ने पैदा किया, जिनकी आध्यात्मिक चेतना एवं सिद्धियों से समूची दुनिया चमत्कृत होती रही है। जो युग के साथ बहे नहीं, युग को अपने बहाव के साथ ले चले। ऐसे लोग सच्चे जीवन के धनी और जीवन-चैतन्य से ओतप्रोत है। … Read more

समान नागरिक संहिता प्रगतिशील और न्यायपूर्ण समाज की दिशा का बड़ा कदम है अवधेश कुमार

उत्तराखंड सरकार द्वारा कॉमन सिविल कोड या समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करना कायदे से ऐतिहासिक घटना मानी जानी चाहिए। गोवा में समान नागरिक संहिता की पृष्ठभूमि तथा प्रकृति अलग है। संविधान की स्वीकृति के समय से राष्ट्रीय स्तर पर जिस समान नागरिक संहिता की मांग की जा रही थी उस दिशा में कदम बढ़ाने … Read more

मारीशस के डोडो पक्षी की तरह कहीं किताबों में ही नहीं रह जाए हमारा राष्ट्रीय पक्षी मोर ! — सुनील कुमार महला

भारतीय समाज और संस्कृति में मोर या मयूर एक अलग ही स्थान रखने वाला पक्षी है। जानकारी देना चाहूंगा कि 26 जनवरी सन 1963 में मोर को भारत के राष्ट्रीय पक्षी का दर्जा दिया गया था। यह बहुत ही चिंताजनक है कि आज इस राष्ट्रीय पक्षी के अस्तित्व पर लगातार खतरा मंडरा रहा है। कभी … Read more

राष्ट्र चिंतन  *तालिबानी हिंसा से कैसे बचेगी देवभूमि ?  सभ्य देश में हलद्वानी जैसी हिंसा है अस्वीकार्य  — आचार्य विष्णु हरि सरस्वती

              हलद्वानी हिंसा के संदेश बहुत ही डरावने हैं, अमानवीय है, विखंडनकारी है, संविधान और कानून के शासन के लिए प्रतिकूल है, सामानंतर सरकार के प्रतीक है, गुडागर्दी के प्रतीक है, चोरी और सीनाजारी की कहानी कहती है, तालिबानी हिंसा की कॉपी लगती है, तालिबानी हिंसा की आहट सुनाई … Read more

जानिए वसंत पंचमी को सरस्वती पूजा क्यों होती है – डॉ. बी. के. मल्लिक

 हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है और इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ ज्ञान की देवी मां सरस्वती का पूजन किया जाता है । हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल बसंत पंचमी का त्योहार 14 फरवरी 2024 को मनाया जाएगा । कई … Read more

राम लला हम आयेंगे मन्दिर वहीं बनायेंगे-(1) — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! शताब्दियों से चली आ रही मुस्लिम  आक्रांताओं द्वारा दिये गये हमारी सांस्कृतिक अस्मिता पर लगे घावों के प्रथम चिन्ह को अंततः हमारे यशस्वी प्रधानमन्त्री श्रीमान नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी के भगीरथी प्रयास से मिटाने की वो घडी आ गयी जिसकी प्रतिक्षा में हमारे आपके पूर्वजों ने न जाने कितनी बार अपना … Read more

चाय उद्योग की सुनो पुकार-वरना होगा बंटाधार-(2) — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! आप सभी को स्मरण दिला दूं कि सन् 1951 में चाय उद्योग के हितार्थ असमिया सरकार ने-“चालिहा कमेटी” का गठन किया था धीरे-धीरे उसके सुझावों पर सरकार ने ध्यान भी दिया ! किन्तु इस बिन्दु पर यह भी उल्लेखनीय है कि ब्रम्हपूत्र बेली की अपेक्षा बराक उपत्यका के चायबागानों की समस्याओं पर कम … Read more