धम्मपद यमकवग्गो~ सूत्र- 14 अंक~14 — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! नित्यसत्यचित्त बुद्धमुक्त पदऽस्थित तथागत महात्मा बुद्ध द्वारा उपदेशित धम्मपद्द के भावानुवाद अंतर्गत स्वकृत बाल प्रबोधिनी में यमकवग्गो के १४ वें पद्द का पुष्पानुवाद उनके ही श्री चरणों में निवेदित कर रहा हूँ— “यथा अगारं सुच्छन्नं वुट्ठि न समतिविज्झति। एवं सुभावितं चित्तं रागो न समतिविज्झति।।४।।” अर्थात- यथा ह्यगारं सुच्छन्नं वृष्टिर्नैवाभिविध्यति। एवं सुभावितं चित्तं नैव … Read more

देश के लिए खतरा है अलगाव और नफ़रत के बीज! 

हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में हाल ही में कुछ समय पहले अतिक्रमण हटाने को लेकर बवाल हो गया, जिसके बाद प्रशासन ने उपद्रवियों के पैर में गोली मारने के आदेश जारी किए। मीडिया के हवाले से आई खबरों से पता चला कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में नगर निगम ने गुरुवार 8 फरवरी को एक अवैध … Read more

जन्मदिन विशेष (7 फरवरी) पर  असाधारण, कुशल और प्रभावी व्यक्तित्व ‘संजय द्विवेदी’ – पवन कुमार पाण्डेय

आज प्रो. संजय द्विवेदी का जन्मदिन है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी, माँ सरस्वती के उपासक, मीडिया-शिक्षण को अपनी पुस्तकों और शोध पत्रों के माध्यम से नई दिशा के बोध-कारक तथा संपूर्ण भारत में पत्रकारिता के उच्च मानक स्थापित करने वाले भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी एक पत्रकार … Read more

मुख्य यजमान बनाम पगङीधारी ( हास्य व्यंग्य)

धार्मिक कार्यक्रम में एक रोडमैप तैयार करके आयोजन समिति धन संग्रह के लिए अनेक यजमान तथा एक मुख्य यजमान आर्थिक दृष्टि से  बनाती है जो अधिक धन देगा वो मुख्य यजमान फिर विशेष यजमान कम देने वाले साधारण यजमान जो फोरी तोर एवं परंपरागत तो ठीक ही है लेकिन धन के आधार पर मैरिट बनाकर … Read more

उत्कृष्ट व उपयोगी सृजन के लिए अनिवार्य है मौन — सीताराम गुप्ता,

वसंत के प्रारंभ में कड़कड़ाती शीत ऋतु में असंख्य वनस्पतियाँ व वृक्ष पत्ररूपी अपने समस्त वस्त्र गिराकर ठूँठ से खड़े दृष्टिगोचर होते हैं लेकिन वास्तव में वे जड़वत नहीं एक साधक की तरह चुपचाप साधना में लीन होते हैं। मौन साधना में लीन। कुछ  समय उपरांत इसी मौन साधना की परिणति होती है उनके कोमल … Read more

भविष्योन्मुखी बजट— डॉ. अभिषेक कुमार पाण्डेय

  मोदी सरकार का ये बजट 2024-2025, भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत आर्थिक भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावशाली कदम माना जाना चाहिए। जैसा कि लोगो ने एक लोकलुभावन बजट की उम्मीद की थी पर वैसा कुछ भी नहीं हुआ खास कर वेतनभोगी एवं उद्योगपति वर्ग में कर राहत को लेकर कुछ उम्मीद की … Read more

नीतीश का भाजपा के साथ आना ऐसी अंतिम घटना नहीं होगी — अवधेश कुमार

बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम में ऐसा कुछ नहीं है जिसमें कोई चौंकाने वाला तत्व तलाशे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सत्ता की राजनीति में पलटने और पलटवाने का ऐसा जुगुप्सापूर्ण प्रतिमान रचा है जिसकी तुलना राजनीति में किसी भी पाला बदल से नहीं हो सकती। एक ही सरकार के साढ़े तीन वर्ष में तीन … Read more

विपक्षी एकता का ढहता किला — आशीष वशिष्ठ

इंडी गठबंधन के बारे में राजनीति की समझ रखने वाले अधिकतर व्यक्तियों के अनुमान सही साबित हुए। गठबंधन की पहली बैठक के बाद से ही उसके भविष्य के बारे में जो कुछ कहा जा रहा था, वो शब्दशः धरती पर उतरता दिख रहा है। वास्तव में इंडी नामक विपक्षी गठबंधन में चूंकि वैचारिक साम्यता नहीं … Read more

राघव रंग में डूबा भारतीय गणतंत्र — डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

अरुण की लालिमा फैलने लगी, दसों दिशाओं में भारत की गूंज उठने लगी, वैश्विक रूप से मज़बूत होता भारत अमृत काल की अमृत बेला का नेतृत्व करने लगा, विश्व में भारत भारती का जयघोष होने लगा, क्या अमरीका, क्या ब्रिटेन, सभी राष्ट्राध्यक्ष अब केवल भारत की नीतियों से चमत्कृत हो रहे हैं। जब पश्चिम अपनी सांध्य बेला में भारत की बाँसुरी … Read more

भारतीय गणतन्त्र के सात दशक — डॉ. अवधेश कुमार अवध

परिवर्तन का जोश भरा था, कुर्बानी के तेवर में। उसने केवल कीमत देखी, मंगलसूत्री जेवर में।। हम खुशनसीब हैं कि इस वर्ष 26 जनवरी को 75वाँ गणतन्त्र दिवस मना रहे हैं। 15 अगस्त सन् 1947 को पायी हुई आजादी कानूनी रूप से इसी दिन पूर्णता को प्राप्त हुई थी। अपना राष्ट्रगान, अपनी परिसीमा, अपना राष्ट्रध्वज … Read more