धम्मपद्द चित्तवग्गो~सूत्र- १० अंक~४५-आनंद शास्त्री

प्निय मित्रों ! नित्यसत्यचित्त बुद्धमुक्त पदऽस्थित तथागत महात्मा बुद्ध द्वारा उपदेशित-“धम्मपद्द” के भावानुवाद अंतर्गत स्वकृत बाल प्रबोधिनी में चित्त वग्गो के दसवें पद्द का पुष्पानुवाद उनके ही श्री चरणों में निवेदित कर रहा हूँ– दिसो दिसं यं तं कयिरा वेरी वा पन वेरिनं। मिच्छा पणिहितं चित्तं पापियो नं ततो करे।। न तं माता-पिता कयिरा अञ्ञो वापि … Read more

धम्मपद्द चित्तवग्गो~सूत्र- ९ अंक~४४-आनंद शास्त्री

प्निय मित्रों ! नित्यसत्यचित्त बुद्धमुक्त पदऽस्थित तथागत महात्मा बुद्ध द्वारा उपदेशित-“धम्मपद्द” के भावानुवाद अंतर्गत स्वकृत बाल प्रबोधिनी में चित्त वग्गो के नौवें पद्द का पुष्पानुवाद उनके ही श्री चरणों में निवेदित कर रहा हूँ– “अचिरं वतयं कायो पठविं अधिसेस्सति। छुद्धो अपेतविञ्ञाणो निरत्थं व कलिड़्गरं।।९।।” पुनः तथागतजी कहते हैं कि,हे भंते ! मित्रों ! इस-“भंते” सम्बोधन को … Read more

बौद्धिक विकास के बिना कोई भी व्यक्ति समाज उन्नति नहीं कर सकता-मदन सुमित्रा सिंघल

हर चीज अभ्यास एवं त्याग तपस्या से मिलती है इसी तरह बौद्धिक विकास भी धीरे धीरे अध्ययन एवं एक अच्छे श्रोता को तब मिलता है जब वो संत महात्माओं राजनेताओं कथा वाचकों एवं अन्य वक्ताओं के संबोधन ध्यान से सुनकर एक एक शब्दों को चुनकर माला बनाने के बाद श्रोताओं को संक्षिप्त सारगर्भित एवं सही … Read more

धम्मपद्द चित्तवग्गो~सूत्र- ८ अंक~४३– आनंद शास्त्री

प्निय मित्रों ! नित्यसत्यचित्त बुद्धमुक्त पदऽस्थित तथागत महात्मा बुद्ध द्वारा उपदेशित-“धम्मपद्द” के भावानुवाद अंतर्गत स्वकृत बाल प्रबोधिनी में चित्त वग्गो के आठवें पद्द का पुष्पानुवाद उनके ही श्री चरणों में निवेदित कर रहा हूँ– “कुम्भूपमं कायमिदं विदित्वा नगरूपमं चित्तमिदं  उपेत्वा। योधेघ मारं पञ्ञायुधेन जितं च रक्खे अनिवेसनो सिया”॥८॥” पुनः तथागत जी कहते हैं कि-“रमता जोगी बहेता … Read more

धम्मपद्द चित्तवग्गो~सूत्र- ७ अंक~४२– आनंद शास्त्री

प्निय मित्रों ! नित्यसत्यचित्त बुद्धमुक्त पदऽस्थित तथागत महात्मा बुद्ध द्वारा उपदेशित-“धम्मपद्द” के भावानुवाद अंतर्गत स्वकृत बाल प्रबोधिनी में चित्त वग्गो के सातवें पद्द का पुष्पानुवाद उनके ही श्री चरणों में निवेदित कर रहा हूँ– “अनवस्सुतचित्तस्स अनन्वाहतचेतसो । पुञ्ञ पापपहीनस्स नत्थि जागरतो भयम् ।।७।।” निजात्म स्नेही प्रिय मित्रों ! अब पुनः तथागतजी कहते हैं कि- “अनवस्सुतचित्तस्स अनन्वाहतचेतसो” … Read more

केजरीवाल निर्दोष नहीं शराब घोटाले में, चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत पर हैं — अशोक भाटिया

दिल्ली शराब घोटाले के मामले में 50 दिन तक तिहाड़ जेल की हवा खाने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए 20 दिन की अंतरिम जमानत दे दी है। अब वह एक जून तक जेल के बाहर रहेगें और चुनाव प्रचार कर सकेंगे। जेल से बाहर आते ही … Read more

कांग्रेस पर मुस्लिमों को आरक्षण व संपत्ति देने का आरोप और सच — अवधेश कुमार

मुस्लिम आरक्षण इस चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बन गया है।। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित पूरी भाजपा कांग्रेस पर आरोप लगा रही है कि वह अनुसूचित जाति – जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्ग के आरक्षण हटाकर मुसलमान को देना चाहती है। कांग्रेस सहित समूचा विपक्ष और भाजपा विरोधी कह रहे हैं कि मोदी और भाजपा … Read more

शीर्षक-:तप ,त्याग और संकल्पों का अक्षय पर्व ॐ ऋषभाय नमः जय गुरु नाना जय गुरु राम — सुंदरी पटवा

सभी शुभसंकल्पों और विकल्पों को केंद्रीभूत कर जिस क्षण पुरुषार्थ की शुरुआत की जाए,वही क्षण सबसे बड़ा शुभ मुहूर्त होता हैं और वही सबसे बड़ा शुभ संयोग होता हैं ।ऐसे क्षणों में किया जाने वाला कोई भी शुभ कार्य साध्य होता हैं । ज्योतिष शास्त्र में हिन्दु वर्ष के वैशाख शुक्ल की तृतीया तिथि को … Read more

धम्मपद्द चित्तवग्गो~६ सूत्र- अंक~४१ — आनंद शास्त्री

प्निय मित्रों ! नित्यसत्यचित्त बुद्धमुक्त पदऽस्थित तथागत महात्मा बुद्ध द्वारा उपदेशित-“धम्मपद्द” के भावानुवाद अंतर्गत स्वकृत बाल प्रबोधिनी में चित्त वग्गो के छठवें पद्द का पुष्पानुवाद उनके ही श्री चरणों में निवेदित कर रहा हूँ– “अनिवट्ठित चित्तस्स सद्धम्मं अविजानतो । परिप्लवपसादस्स पञञा न परिपूरति ।।६।।” अब  पुनः कहते हैं कि– “अनिवट्ठित चित्तस्स सद्धम्मं अविजानतो” अर्थात “बुद्धत्व” प्राप्ति … Read more

धम्मपद्द चित्तवग्गो~५ सूत्र- अंक~४०– आनंद शास्त्री

प्निय मित्रों ! नित्यसत्यचित्त बुद्धमुक्त पदऽस्थित तथागत महात्मा बुद्ध द्वारा उपदेशित-“धम्मपद्द” के भावानुवाद अंतर्गत स्वकृत बाल प्रबोधिनी में चित्त वग्गो के पाँचवें पद्द का पुष्पानुवाद उनके ही श्री चरणों में निवेदित कर रहा हूँ– “दूरंगमं एकचरं असरीरं गुहासयं । ये चित्तंसंयमेस्सन्ति मोक्खन्ति मार बन्धना।।५।।” अब पुनः कहते हैं कि-” दूरंगमं एकचरं असरीरं गुहासयं” विषयों के प्रति … Read more