धम्मपद्द चित्तवग्गो~सूत्र- १० अंक~४५-आनंद शास्त्री
प्निय मित्रों ! नित्यसत्यचित्त बुद्धमुक्त पदऽस्थित तथागत महात्मा बुद्ध द्वारा उपदेशित-“धम्मपद्द” के भावानुवाद अंतर्गत स्वकृत बाल प्रबोधिनी में चित्त वग्गो के दसवें पद्द का पुष्पानुवाद उनके ही श्री चरणों में निवेदित कर रहा हूँ– दिसो दिसं यं तं कयिरा वेरी वा पन वेरिनं। मिच्छा पणिहितं चित्तं पापियो नं ततो करे।। न तं माता-पिता कयिरा अञ्ञो वापि … Read more