भारतीय चुनावों में विदेशी भूमिका का सच —- अवधेश कुमार

 भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के नाम पर यूएसएड या यूनाइटेड स्टेट एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट के माध्यम से 21 मिलियन डॉलर यानी 182 करोड रुपए आने की सूचना ने पूरे देश में खलबली पैदा की है। ट्रंप प्रशासन के अंदर नवनिर्मित डिपार्मेंट आफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी डोजे यानी सरकारी दक्षता विभाग ने उसकी जानकारी देते … Read more

विवाह भोज या निकाह की पार्टी : विचार करें         –    एक विचारोत्तेजक आलेख

             एक मित्र ने एक मजेदार वाकया सुनाया। उसने बताया कि पिछले दिनों एक जैन परिवार की शादी में प्रीतिभोज में जाना हुआ। स्वागत द्वार पर गुलाब के फूल, मैंगो शेक, ड्राइफूट के साथ स्वागत हुआ। अंदर मैदान में अद्भुत नजारा था। आर्केस्ट्रा की स्वर लहरी चारों तरफ गुंजायमान थी। … Read more

ये कैसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ? — सुनील कुमार महला

इन दिनों देश में कामेडी(हास्य) के नाम पर फूहड़ता और अश्लील सामग्री पेश करने की लगातार बढ़ रही प्रवृत्ति को लेकर बहस छिड़ी हुई है। वास्तव में डिजिटल प्लेटफॉर्मों के नियमन हेतु सख्ती बहुत ही जरूरी और आवश्यक हो गई है। कहना ग़लत नहीं होगा कि आज डिजिटल प्लेटफॉर्मों के नियमन पर सख्ती नहीं होने … Read more

सोशल मीडिया का दुष्प्रयोग और सांस्कृतिक संकट — गिरीश्वर मिश्र

सोशल मीडिया आज संचार की दुनिया में एक बड़ी ताक़त के रूप में उभर रहा है। उसकी साक्रिय उपस्थिति से आबालबृद्ध सभी प्रभावित हो रहे हैं। उसकी अपरिहार्य, तीव्र और लुभावनी और सुगम उपस्थिति आज समाज में सबको अपने आगोश में लेती जा रही है। सूचना की दुनिया से आगे बढ़ कर सोशल मीडिया हमारी … Read more

प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिकी यात्रा में संभावनायें – अवधेश कुमार

केवल भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व की दृष्टि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत तथा प्रतिफलों पर लगी होगी। प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस में एआई शिखर बैठक की सह-अध्यक्षता करने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के आमंत्रण पर अमेरिका जा रहे हैं। अपने इस दूसरे कार्यकाल में ट्रंप अवैध अप्रवासन, … Read more

माधव सदाशिवराव गोलवलकर (गुरुजी) : एक राष्ट्रनिर्माता विचारक

भारत के राष्ट्रवादी इतिहास में माधव सदाशिवराव गोलवलकर, जिन्हें स्नेहपूर्वक ‘गुरुजी’ कहा जाता है, एक ऐसी महान विभूति हैं जिन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारों को सुदृढ़ आधार प्रदान किया। उनका जीवन एक आदर्श राष्ट्रसेवक के रूप में प्रेरणादायक रहा है। वे एक गहन विचारक, प्रभावी संगठनकर्ता और निःस्वार्थ समाजसेवी थे, जिन्होंने भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा माधव सदाशिवराव गोलवलकर का जन्म 19 फरवरी 1906 को महाराष्ट्र के रामटेक में हुआ था। वे बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे और शिक्षा के प्रति गहरी रुचि रखते थे। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से विज्ञान और कानून की पढ़ाई की, साथ ही जैव विज्ञान में भी विशेष ज्ञान प्राप्त किया। हालांकि, उनका झुकाव सामाजिक सेवा की ओर था, जिसके कारण उन्होंने अपना जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पित कर दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव गोलवलकर जी 1931 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और शीघ्र ही वे इसके प्रमुख प्रचारकों में से एक बन गए। 1940 में, संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के निधन के बाद, वे संघ के द्वितीय सरसंघचालक बने। उन्होंने अपने नेतृत्व में संघ को एक सशक्त, अनुशासित एवं राष्ट्रनिष्ठ संगठन के रूप में विकसित किया। उनके प्रयासों से RSS का विस्तार संपूर्ण भारत में हुआ और यह संगठन समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट करने में सफल रहा। राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पुनर्जागरण गुरुजी का दृष्टिकोण राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर आधारित था। वे मानते थे कि भारत की सांस्कृतिक जड़ें अत्यंत मजबूत हैं और हमें अपनी परंपराओं, मूल्यों तथा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना चाहिए। उन्होंने हमेशा भारतीयता पर बल दिया और समाज को आत्मनिर्भर तथा संगठित बनाने की दिशा में कार्य किया। उनके विचारों ने लाखों युवाओं को प्रेरित किया और समाज में राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत की। समाजसेवा और संगठन कौशल गोलवलकर जी का संगठन कौशल अद्वितीय था। उन्होंने संघ के माध्यम से सेवा कार्यों को बढ़ावा दिया और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आपदा प्रबंधन के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी प्रेरणा से वनवासी कल्याण आश्रम, भारतीय मजदूर संघ, विश्व हिंदू परिषद और अन्य सामाजिक संगठनों की स्थापना हुई। सकारात्मक प्रभाव एवं विरासत गोलवलकर जी के विचार और प्रयास आज भी प्रासंगिक हैं। उनका उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर, संगठित और सशक्त बनाना था। उनके नेतृत्व में RSS ने समाज के विभिन्न स्तरों पर सेवा कार्यों को बढ़ावा दिया और राष्ट्रवाद की भावना को मजबूती दी। आज, उनके विचारों से प्रेरित होकर लाखों लोग राष्ट्रसेवा के कार्य में लगे हुए हैं। उनका जीवन हमें अनुशासन, समर्पण और संगठन की महत्ता सिखाता है। वे न केवल एक कुशल नेतृत्वकर्ता थे, बल्कि एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी थे जिन्होंने भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद को एक नई ऊंचाई दी। निष्कर्ष गुरुजी माधव सदाशिवराव गोलवलकर भारतीय राष्ट्रवाद और सामाजिक संगठन के क्षेत्र में एक अमिट छाप छोड़ गए हैं। उनका जीवन और विचारधारा हमें यह सिखाती है कि राष्ट्र के उत्थान के लिए संगठित प्रयास, अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा आवश्यक है। उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और देश के युवाओं को प्रेरित करती हैं कि वे अपने समाज और राष्ट्र के लिए कार्य करें। — डॉ. प्रग्नेश बी. परमार / Dr. Pragnesh B. Parmar  MBBS, MD (Forensic Medicine), GSMC-FAIMER, PGDHL, AMAHA, ACME अतिरिक्त प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष / Additional Professor & HOD  फोरेंसिक मेडिसिन और विष विज्ञान विभाग / Department of Forensic Medicine and Toxicology  अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान … Read more

बच्चों के कोमल मन-मस्तिष्क पर प्रभाव डालती तकनीक। – सुनील कुमार महला

बच्चों का मन बहुत ही कोमल होता है। इतना कोमल कि बच्चे के मन को हम अच्छी शिक्षा देकर किसी भी आकार में ढ़ाल सकते हैं। महान् मनोविज्ञानी वाटसन ने कहा है कि ‘मुझे एक नवजात शिशु दे दो। मैं उसे डॉक्टर, वकील, चोर या जो चाहूँ बना सकता हूँ।’ हम सभी ने कभी न … Read more

‘इंडिया’ गठबंधन : सबके अपने सुर, अपने राग — राधा रमण

भारतीय जनता पार्टी की अगुआई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (National Demokretik Alliance) से मुकाबले के लिए विपक्ष के 39 दलों ने दिसंबर 2023 में आयोजित मुंबई की अपनी बैठक में इंडिया (Indian National Developmental Inclusive Alliance अर्थात भारतीय राष्ट्रीय विकासशील समावेशी गठबंधन) नाम से एक अलग मोर्चा बनाया था। तब तय किया गया था कि … Read more

द स्टोरीटेलर: कला और बाज़ार के बीच का संघर्ष – कल्पना पांडे

सत्यजित राय की कहानी ‘गल्पो बोलिये तरिणी खुरो’ पर आधारित अनंत महादेवन की फ़िल्म ‘द स्टोरीटेलर’ (2025) असली मेहनत और पूँजीवाद के बीच के संघर्ष को केंद्र में रखती है। इस फ़िल्म में दो बिल्कुल विपरीत व्यक्तित्वों की कहानी है। एक तारिणी बंद्योपाध्याय (परेश रावल) है, जो एक वृद्ध बंगाली कहानी कहने वाला है, जिनके विचारों से कम्युनिस्ट … Read more

महाकुंभ विरोधी सनातन-भाजपा के प्रचारक बन गये खडगे, लालू, अखिलेश और कम्युनिस्टों ने हिन्दुओं को अति जाग्रत कर दिया — आचार्य श्रीहरि

भारत की तथाकथित सेक्युलर राजनीतिक पार्टियां सनातन विरोधी हैं, इनकी धर्मनिरपेक्षता का अर्थ सिर्फ और सिर्फ सनातन का रक्तरंजित और अति विरोध है। खासकर सनातन संस्कृति और प्रतीकों को लांक्षित करने, अपमानित करने और उन्हें अंधविश्वास का प्रतीक ही नहीं बल्कि झूठा और मिथक साबित करने का राजनीतिक अभियान अबाधित चलता रहता है। संदर्भ की … Read more