पाकिस्तान द्वारा शिमला समझौता रद्द किया जाना भारत के हित में है – डॉ. विश्वास चौहान

भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 के युद्ध के बाद 2 जुलाई 1972 को शिमला समझौता (Shimla Agreement) हुआ था। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच शांति बहाली, युद्धबंदियों की रिहाई और आपसी विवादों को शांतिपूर्वक हल करना था। परंतु 21वीं सदी के पहले दो दशकों में पाकिस्तान की ओर से बार-बार सीमा … Read more

शिक्षा और पोषण के बीच हैं द्विदिश संबंध (यूनेस्को वैश्विक शिक्षा निगरानी रिपोर्ट 2025) — सुनील कुमार महला

हाल ही में यूनेस्को वैश्विक शिक्षा निगरानी रिपोर्ट 2025 ‘शिक्षा और पोषण: अच्छा खाना सीखें’ जारी की गई है। पाठकों को बताता चलूं कि शिक्षा और पोषण पर वैश्विक शिक्षा निगरानी (जीईएम) रिपोर्ट 2025 आधिकारिक तौर पर 26 मार्च 2025 को पेरिस पोषण विकास शिखर सम्मेलन में लॉन्च की गई थी। वास्तव में, यह रिपोर्ट … Read more

… चिनगारी का खेल बुरा होता है ! — सुनील कुमार महला

हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले में विदेशी नागरिकों समेत 26 की मौत हो गई, और मरने वालों में अधिकांश पुरुष हैं। वास्तव में यह बहुत ही दुखद व अति निंदनीय घटना है।यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब करीब सवा दो महीने बाद अमरनाथ यात्रा होनी है।कहना ग़लत नहीं होगा कि इससे आतंक का घिनौना … Read more

मुर्शिदाबाद में वर्तमान हालात को लेकर राजनीतिक दलों की भूमिका मानो एक पहले से रची हुई नाटक हो—” राजू दास

“सब अभिनय में व्यस्त हैं, इधर हिंदू हो रहे हैं बेघर।” मुर्शिदाबाद कभी नवाबी राजधानी हुआ करता था। आज भी इस ज़िले की धरती पर इतिहास चलता है। लेकिन आज इतिहास बनाने की राह में इंसान नहीं—राजनीति मुख्य कारण बनती जा रही है। एक छोटी सी उकसावे की घटना से पूरा ज़िला, यहाँ तक कि … Read more

पहलगाम हिन्दू नरसंहार पर संयम अब बईमानी मोदी कायर नहीं, कायर आतंकियों के आका हैं — आचार्य श्रीहरि

कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों के हाथों बलिदान हुए निर्दोष लोगों के प्रति आतंकियों के समर्थकों की सहानुभूति हो ही नहीं सकती है, ये हिंसक लोग है, ये विभत्स लोग हैं, ये मानवता विरोधी हैं, ये शांति के दुश्मन हैं, ये आधुनिक युग के रक्तपिशाचुओं के प्रतीक हैं, ये खून बहाकर, हत्या कर खुश होने … Read more

बोझ से कराहते पहाड़ों को चाहिए राहत का मलहम !! – संजीव शर्मा

बढ़ती भीड़ से पहाड़ कराह रहे हैं और वाहनों की बेतहाशा संख्या उनका कलेजा छलनी कर रही है। फिर भी पर्यटक बेफिक्र हैं और पहाड़ों के पहरेदार यानि प्रशासन निश्चिंत । पहाड़ लगातार इशारा कर रहे हैं, खुलेआम संकेत दे रहे हैं और कई बार सीधी चेतावनी भी, फिर भी वीकेंड पर शिमला से लेकर … Read more

कभी-कभी ऐसे ही

कभी-कभी दिल के अंदर आग जलती है। इस आग का स्रोत पता नहीं चलता। इस आग की शुरुआत और अंत का पता नहीं चलता। बस इतना पता चलता है कि इस आग के प्रभाव से जले हुए इंसान, जैसे एक सिगरेट की तरह, अनंत काल तक धुंआ करते रहते हैं। एक दिन इस आग के … Read more

कवि सम्मेलन बनाम फूहड़पन व चुटकुलेबाज़ी– सीताराम गुप्ता

कवि सम्मेलन बनाम फूहड़पन व चुटकुलेबाज़ीतालियाँ पीटना और पिटवाना ये दोनों ही बातें तथाकथित कवि-सम्मेलनों के लिए ज़रूरी मानी जाती हैं। और ये हास्य कवि-सम्मेलन और हास्य कवि? ये भी अनोखे जीव होते हैं। हँसते-हँसाते न जाने कब गंभीर हो जाएँ और न जाने कब कूदकर राष्ट्रप्रेम की ट्रेन पर सवार हो जाएँ और कब … Read more

साड़ी की उत्पत्ति और महत्व

साड़ी की उत्पत्ति भारत में हुई थी, जो कि प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। साड़ी की उत्पति के बारे में कई मतभेद हैं, लेकिन यह माना जाता है कि यह 5000 वर्ष पुरानी भारतीय सभ्यता से जुड़ी हुई है। यह वस्त्र न केवल भारत में बल्कि अन्य दक्षिण एशियाई देशों में भी अपनी विशेष … Read more

पेंशन की लड़ाई: कर्मचारियों का हक़ या सरकारी बोझ

भारत में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली एक महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक मुद्दा बन चुका है. यह केवल सरकारी कर्मचारियों का ही नहीं, बल्कि देश की वित्तीय नीति और सामाजिक सुरक्षा का भी विषय है. 2004 में पुरानी पेंशन योजना को समाप्त कर नई पेंशन योजना (NPS) लागू की गई, लेकिन बीते कुछ वर्षों … Read more