पहलगाम के आगे — अवधेश कुमार

पहलगाम हमले के बाद संपूर्ण देश का सामूहिक मानस ्वैसी कार्रवाई , प्रतिरोध और प्रतिशोध का है जिससे भारत को दोबारा ऐसी भयानक घटना का सामना न करना पड़े। यह स्वाभाविक है। एक समय जम्मू कश्मीर में आतंकवादी घटनाएं आम थी और तब भी लोगों के अंदर क्रोध पैदा होता था लेकिन आम मानस यह … Read more

जाति ही पूछो साधु की … – राधा रमण

पिछले माह पहलगाम के बायसरन में कश्मीर घूमने गए 26 पर्यटकों की धर्म पूछकर नृशंस हत्या से देशभर में गम और गुस्से के बीच केंद्र सरकार ने देशभर में जाति जनगणना कराने का ऐलान किया है। कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में यह फैसला किया गया। देश में आजादी के बाद पहली … Read more

शिक्षित समाज में पाकिस्तान समर्थक विचार! अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या देशविरोधिता? — राजु दास

शिक्षित समाज में पाकिस्तान समर्थक विचार! अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या देशविरोधिता? पिछले कुछ दिनों से देशभर में एक के बाद एक पुलिस कार्रवाई के तहत ऐसे कुछ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने सोशल मीडिया पर खुलेआम पाकिस्तान के समर्थन में बयान दिया है या भारत के खिलाफ नफरत फैलाई है। इसमें असम भी … Read more

अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस लाखों मजदूरों के परिश्रम, दृढ़ निश्चय और निष्ठा का दिवस है —  ब्रह्मानंद राजपूत

हर वर्ष अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मई महीने की पहली तारीख को मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस को मई दिवस भी कहकर बुलाया जाता है। अमेरिका में 1886 में जब मजदूर संगठनों द्वारा एक शिफ्ट में काम करने की अधिकतम सीमा 8 घंटे करने के लिए हड़ताल की जा रही थी। इस हड़ताल के दौरान … Read more

ऑडियोबुक्स व पॉडकास्ट ऐप्स में ही रह गई हैं कहानियां ! — सुनील कुमार महला

बच्चे हों या बूढ़े, कहानियां सुनना सबको अच्छा लगता है। कहानियां सुनने के अनेक फायदे हैं। मसलन, कहानियाँ जहां एक ओर हमारी कल्पनाशीलता को विकसित करती हैं, वहीं दूसरी ओर कहानियां हमें नए विचार सीखने में भी बहुत मदद करती हैं। ये कहानियां ही होतीं हैं जो हमारी भावनाओं को भी समझने में बहुत ही … Read more

भारत ने 1.71 मिलियन लोगों को ग़रीबी से बाहर निकाला (विश्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट) — सुनील कुमार महला

पहलगाम आतंकी हमले की बहुत ही दुखद खबर के बाद हाल ही में विश्व बैंक से एक अच्छी खबर आई है। यह खबर ग़रीबी उन्मूलन पर है। ग़रीबी वास्तव में एक बहुत बड़ी व ज्वलंत समस्या है। यदि हम यहां गरीबी की साधारण परिभाषा की बात करें तो बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए … Read more

बोझ से कराहते पहाड़ों को चाहिए राहत का मलहम !! — संजीव शर्मा

बढ़ती भीड़ से पहाड़ कराह रहे हैं और वाहनों की बेतहाशा संख्या उनका कलेजा छलनी कर रही है। फिर भी पर्यटक बेफिक्र हैं और पहाड़ों के पहरेदार यानि प्रशासन निश्चिंत । पहाड़ लगातार इशारा कर रहे हैं, खुलेआम संकेत दे रहे हैं और कई बार सीधी चेतावनी भी, फिर भी वीकेंड पर शिमला से लेकर … Read more

भारत व हिंदुओं के प्रति शत्रुता — पंकज जगन्नाथ जयस्वाल

यह पहली बार नहीं है जब आतंकवादियों ने हिंदुओं और भारतीय रक्षा बलों पर कायराना हमला किया है। यह कई दशकों से नियमित बर्बर कार्रवाई रही है। पाकिस्तानी सेना द्वारा प्रशिक्षित आतंकवादियों को भारत में स्थानीय समर्थन प्राप्त है; स्थानीय सहायता के बिना, हमला असंभव है। भारत विरोधी तत्वों और कुछ राजनीतिक दलों के बीच … Read more

हिन्दू नरसंहार और पाक का समर्थन करने का घृणित मुस्लिम प्रसंग भारम विरोधी मुस्लिमों की नागरिकता छिनी जानी चाहिए — आचार्य श्रीहरि

पहलगाम हिन्दू नरसंहार और पाकिस्तान का समर्थन करने वाले मुस्लिम वर्ग की खौफनाक, विभत्स और घृणित मानसिकता का कुछ उदाहरण और उनकी भाषा के कुछ उदाहरण यहां उपस्थित किया जा रहा है। कोई एक-दो प्रदेश से नहीं बल्कि पूरे भारत भर में मुस्लिमों ने सोशल मीडिया पर अस्वीकार, घृणित और नागरिकता विरोधी पोस्ट किये हैं। पहलगाम में … Read more

पहलगाम हमला: कब सीखेंगे सही दुश्मन पहचानना? — प्रियंका सौरभ

एक ओर भारत जातियों, उपजातियों, विचारधाराओं और आस्थाओं के नाम पर खुद को खंड-खंड कर रहा है, दूसरी ओर हमारे दुश्मन संगठित होकर हमारी एकता पर प्रहार कर रहे हैं। अभी-अभी जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में जो आतंकवादी हमला हुआ, उसने फिर से हमें यह याद दिला दिया कि असली दुश्मन हमारे भीतर नहीं, सरहद पार … Read more