हाइलाकांदी में ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ, टिकाऊ कृषि एवं मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर जोर

हाइलाकांदी में ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ, टिकाऊ कृषि एवं मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर जोर
प्रीतम दास हाइलाकांदी, १ जून : किसानों के बीच टिकाऊ कृषि प्रणाली, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हाइलाकांदी जिले में ‘खेत बचाओ अभियान’ का औपचारिक शुभारंभ किया गया। सोमवार को जिला कृषि विभाग तथा आईसीएआर कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), हाइलाकांदी के संयुक्त तत्वावधान में इस माहव्यापी कार्यक्रम की शुरुआत हुई। यह अभियान आगामी ३० जून तक जिले के विभिन्न गांवों एवं कृषि क्षेत्रों में संचालित किया जाएगा।भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की देशव्यापी पहल के अंतर्गत आयोजित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक एवं असंतुलित उपयोग से मृदा उर्वरता में हो रही कमी, कृषि उत्पादन लागत में वृद्धि तथा पर्यावरणीय क्षति के प्रति किसानों को जागरूक करना है। साथ ही वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना भी इस कार्यक्रम का प्रमुख लक्ष्य है।उद्घाटन समारोह में डॉ. सौरभ शर्मा, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख, आईसीएआर केवीके, हाइलाकांदी कृषि विकास अधिकारी राजीबुल हक मोल्ला; नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक आयुष्मान यश; जिला पशुपालन अधिकारी डॉ. जयंत तालुकदार; लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर विभाष रंजन दास तथा एएसआरएलएम के ब्लॉक परियोजना प्रबंधक राजीव सोरेन उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त कृषि विभाग के विभिन्न अधिकारी, किसान मित्र तथा बड़ी संख्या में किसान भी कार्यक्रम में शामिल हुए।कार्यक्रम में वक्ताओं ने मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग, हरित खाद के प्रयोग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, गोबर खाद तथा जैविक कीटनाशकों के उपयोग पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी के प्राकृतिक गुण प्रभावित हो रहे हैं जिसका प्रतिकूल प्रभाव कृषि उत्पादन एवं पर्यावरण दोनों पर पड़ रहा है। इसलिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियां वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता हैं।इसके अलावा किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), कृषि ऋण सुविधाएं, पशुपालन विकास कार्यक्रम तथा ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वरोजगार के अवसरों सहित किसानों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।कार्यक्रम का संचालन जिला कृषि कार्यालय के सहायक कृषि निरीक्षक फैजुल हुसैन ने किया।आयोजकों ने बताया कि जून माह के दौरान जिले के विभिन्न गांवों में किसान जागरूकता शिविर, खेत प्रदर्शनियां, किसान वैज्ञानिक संवाद तथा प्रचार-प्रसार कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचकर जलवायु अनुकूल, लाभकारी एवं टिकाऊ कृषि प्रणाली को लोकप्रिय बनाना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है।

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