विशेष प्रतिनिधि शिलचर, 9 जुलाई। महिला कॉलेज, शिलचर के प्राचार्य डॉ. सुजीत तिवारी ने भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी मंगल पांडेय के प्रति सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर गहरा दुःख और चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जो समाज अपने स्वतंत्रता संग्राम, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और राष्ट्रीय नायकों का सम्मान करना नहीं सीखता, वह अपनी ऐतिहासिक जड़ों से स्वयं को अलग कर देता है।
डॉ. तिवारी ने कहा कि विचारों की भिन्नता लोकतंत्र की सुंदरता है, लेकिन देश की स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों का अपमान किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि हाल ही में उनके क्षेत्र में सोशल मीडिया पर ऐसा पोस्ट देखने को मिला, जिसमें भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी वीर मंगल पांडेय का अपमान किया गया। उन्होंने इसकी तुलना उन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से की, जिनमें राष्ट्रीय नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों का अनादर किया गया था। उनके अनुसार इतिहास और राष्ट्रीय विरासत के प्रति ऐसा व्यवहार कभी उचित नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि मंगल पांडेय भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम शहीद और प्रेरणास्रोत थे। 29 मार्च 1857 को बैरकपुर में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध उनके साहसिक विद्रोह ने पूरे देश में स्वतंत्रता की चेतना जगाई। उनके बलिदान के बाद यह विद्रोह देशभर में फैल गया और 1857 का महासंग्राम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गया।
डॉ. तिवारी ने कहा कि बराक घाटी भी इस गौरवशाली इतिहास की साक्षी रही है। मेजर अयोध्या सिंह के नेतृत्व में देशभक्त सिपाहियों ने सिलहट शस्त्रागार पर कब्जा किया तथा बाद में श्रीभूमि के मालेगढ़ और हाइलाकांदी के रणटीला में ब्रिटिश सेना के विरुद्ध वीरतापूर्वक युद्ध लड़ा। उन्होंने कहा कि यह इतिहास पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।
उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस 1857 के विद्रोह को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक शुरुआत मानते थे और उन्होंने अपने विचारों एवं लेखन में मंगल पांडेय सहित उस काल के क्रांतिकारियों के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया है।
डॉ. तिवारी ने बताया कि वीर विनायक दामोदर सावरकर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक The Indian War of Independence, 1857 में 1857 के विद्रोह को भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम बताया है तथा मंगल पांडेय को उस महान संघर्ष की प्रथम प्रेरक शक्ति के रूप में सम्मान दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी पुस्तक The Discovery of India में 1857 के विद्रोह को भारतीय इतिहास की युगांतरकारी घटना बताया है और इसे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध व्यापक जनप्रतिरोध का प्रतीक माना है। उनके अनुसार मंगल पांडेय का साहसिक कदम इस ऐतिहासिक आंदोलन की महत्वपूर्ण शुरुआत था।
डॉ. तिवारी ने कहा कि मंगल पांडेय के योगदान का अपमान करना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास का अपमान करने के समान है। उन्होंने सभी नागरिकों से स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान बनाए रखने और राष्ट्र के इतिहास एवं बलिदान की विरासत का आदर करने का आह्वान किया।