संघ के शताब्दी वर्ष में आदर्श, अनुशासन और सेवा का संदेश

महालया पर उधारबंद में आरएसएस का भव्य पथ संचलन, संस्थापक डॉ. हेडगेवार के जीवनादर्श और समाजसेवा की भावना पर सुब्रत दास ने रखे विचार

नीहार कांति राय, उधारबंद, नॉर्थ ईस्ट न्यूज़।

महालया के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को उधारबंद में भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया। अनुशासित पदयात्रा, ध्वज आरोहण, प्रार्थना और बौद्धिक सत्र के माध्यम से संघ के आदर्शों, संगठन की यात्रा तथा सेवा की भावना को सामने रखा गया। महालया के आध्यात्मिक वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर स्वयंसेवकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम का शुभारंभ उधारबंद स्थित श्रीश्री कांचाकांति माता मंदिर परिसर से हुआ। प्रारंभिक चरण में ध्वज आरोहण और प्रार्थना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इसके बाद बौद्धिक सत्र आयोजित हुआ, जिसमें संघ की स्थापना के उद्देश्यों, संगठनात्मक आदर्शों, राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक एकता तथा समाज के लोगों में सेवा भाव जागृत करने की आवश्यकता पर चर्चा की गई। संघ के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में इस कार्यक्रम के माध्यम से संस्थापक के जीवनादर्श और संगठन की दीर्घकालीन यात्रा के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दक्षिण प्रांत के संघ कार्यवाह सुब्रत दास ने बौद्धिक संबोधन दिया। अपने वक्तव्य में उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन, विचारों और संगठन की स्थापना के मूल उद्देश्यों पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने संस्थापक के जीवनादर्शों तथा समाजसेवा संबंधी विचारों की व्याख्या करते हुए समाज के सभी वर्गों में एकता, अनुशासन, देशभक्ति और पारस्परिक सहयोग की भावना विकसित करने के महत्व को रेखांकित किया।

सुब्रत दास के संबोधन में संघ की संगठनात्मक यात्रा के साथ-साथ व्यक्तिगत जीवन में आदर्शों के प्रति निष्ठा, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय जीवन में नागरिकों की भूमिका जैसे विषय भी प्रमुखता से सामने आए। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी सद्भाव और सहयोग का वातावरण विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। संगठन के शताब्दी वर्ष के इस विशेष अवसर पर संस्थापक के विचारों और उद्देश्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के महत्व पर भी चर्चा की गई।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने वर्ष 1925 में नागपुर में की थी। स्थापना के समय से ही संगठन की गतिविधियों, अनुशासन और सामाजिक जीवन में स्वयंसेवकों की भूमिका को लेकर विभिन्न अवसरों पर चर्चा होती रही है। स्थापना के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से उधारबंद में भी संघ के आदर्शों और कार्यप्रणाली के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया गया।

बौद्धिक सत्र के समापन के बाद भव्य पथ संचलन शुरू हुआ। श्रीश्री कांचाकांति माता मंदिर से प्रारंभ होकर स्वयंसेवकों का यह संचलन कांदी ग्राम, उत्तरपाड़ा और डायट रोड से होकर गुजरा। अनुशासित ढंग से निकाली गई यह पदयात्रा क्षेत्र के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए पुनः मंदिर परिसर में आकर संपन्न हुई। पथ संचलन के दौरान स्वयंसेवकों की अनुशासित उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।

मार्ग के विभिन्न स्थानों पर मातृ मंडल की सदस्यों ने ध्वज पर पुष्पवर्षा कर श्रद्धा व्यक्त की। उनकी सहभागिता से कार्यक्रम का वातावरण विशेष रूप से भावपूर्ण हो उठा। पथ संचलन को लेकर स्थानीय क्षेत्र में भी उत्साह का माहौल देखने को मिला। महालया जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर धार्मिक वातावरण के साथ संगठनात्मक कार्यक्रम का यह समन्वय विशेष महत्व रखता था।

इस कार्यक्रम में उत्तर कछार जिले के कार्यवाह प्रदीप कुमार दास, शिलचर विभाग के व्यवस्थापक सुशांत देव, दक्षिण प्रांत के प्रांत सदस्य क्षौनिश चक्रवर्ती, रजत देव राय, सुजीत देव, सुदीप गोयाला, रामेश्वर कुर्मी, मुकुंद, अंशुमान दत्त, रूपक देव सहित अन्य स्वयंसेवक उपस्थित थे।

संघ के स्थापना शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संगठन के संस्थापक आदर्शों, सामाजिक उत्तरदायित्व और सेवा भावना को लोगों के सामने प्रस्तुत करना था। किसी संगठन की लंबी यात्रा के दौरान उसके मूल उद्देश्यों और आदर्शों का स्मरण करने के साथ-साथ उन विचारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्व भी इस आयोजन में परिलक्षित हुआ।

बंगाली समाज में महालया को पितृपक्ष की समाप्ति और देवपक्ष के शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है। ऐसे पावन अवसर पर उधारबंद में संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित पथ संचलन के माध्यम से आदर्श, अनुशासन और समाजसेवा की भावना को प्रमुखता से सामने रखा गया। ध्वज आरोहण से लेकर बौद्धिक सत्र और उसके बाद अनुशासित पदयात्रा तक, पूरे कार्यक्रम में संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवनादर्शों को स्मरण करने तथा संगठन के शताब्दी वर्ष के महत्व को रेखांकित करने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रम के दौरान शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उधारबंद थाना के पुलिस अधिकारी चिरंजीत बोरा कड़ी निगरानी में तैनात रहे। पथ संचलन के साथ पुलिसकर्मी भी मौजूद थे, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

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