भजन, गीत और नृत्य की प्रस्तुतियों से सजी सांस्कृतिक संध्या, आपसी एकता और सौहार्द का दिया संदेश
सिलचर। बराक हिंदी साहित्य समिति की ओर से शनिवार शाम दुर्गापूजा एवं दशहरा मिलन समारोह का आयोजन किया गया। समिति के अध्यक्ष उदय शंकर गोस्वामी के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, सदस्यों और उनके परिवारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आपसी मेल-मिलाप का सुंदर संगम देखने को मिला। मंच पर समिति के पुूर्व अध्यक्ष महावीर प्रसाद जैन सहित अवधेश कुमार सिंह, गिरिजा शंकर अग्रवाल, तपेश्वर सिंह की मौजूदगी रही। कार्यक्रम का संचालन समिति के महासचिव प्रदीप कुमार कुर्मी ने किया।
समारोह का शुभारंभ किरण त्रिपाठी, सविता जायसवाल, कमला सोनार और अपर्णा तिवारी द्वारा सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ से हुआ। इस अवसर पर नन्हे बाल कलाकारों से लेकर समिति के सदस्य कलाकारों तक ने गीत, नृत्य और भजन की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। उपस्थित लोगों ने सभी प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद उठाया और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
समिति के अध्यक्ष गोस्वामी ने उपस्थित सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सदस्यों को दुर्गापूजा एवं दशहरा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि समिति की ओर से इस तरह का मिलन समारोह पहली बार आयोजित किया गया है। ऐसे आयोजन सदस्यों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इस मिलन समारोह को प्रतिवर्ष आयोजित करने का आह्वान करते हुए कार्यक्रम के आयोजकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। समारोह के दौरान रात्रिभोज की भी व्यवस्था की गई थी। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, आत्मीय मुलाकातों और उत्साहपूर्ण माहौल के बीच सभी ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया।
समिति के महासचिव प्रदीप कुमार कुर्मी ने इस तरह के आयोजन को प्रतिवर्ष जारी रखने के प्रस्ताव का समर्थन किया। मिलन समारोह में कन्हैयालाल सिंगोदिया,अरूण कुमार महतो,दुर्गेश कुर्मी,ललित जैन, सावरमल काबरा, ,अनन्त लाल कुर्मी,सबिता जयसवाल ,सीमा गोस्वामी,धर्मेंद्र राय,सुवचन ग्वाला,लालन प्रसाद ग्वाला,प्रमोद जयसवाल,सुर्पणा तिवारी,अमरनाथ सिंह,राजु वर्मा, राम र्श्वाथ सिंह सहित लगभग 150 सदस्यों की उपस्थिति रही।
यह मिलन समारोह धार्मिक उत्सव के साथ-साथ सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक सहभागिता और आपसी सौहार्द को मजबूत करने का माध्यम बना।