डिब्रूगढ़ में नागरिक अधिकार सुरक्षा समिति की राज्य कार्यकारिणी की बैठक, नागरिकता और भाषाई अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर कई प्रस्ताव पारित

डिब्रूगढ़, 5 जुलाई। नागरिक अधिकार सुरक्षा समिति (सीआरपीसी), असम की राज्य कार्यकारिणी की एक विशेष बैठक रविवार को डिब्रूगढ़ में राज्य अध्यक्ष नृपेन साहा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में संगठन के मुख्य सलाहकार एवं गुवाहाटी उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता हाफिज रशीद अहमद चौधरी, महासचिव साधन पुरकायस्थ, कमल दत्ता, अमर चंद डे, विजय चक्रवर्ती, लामडिंग के पूर्व विधायक स्वप्न कर, निवास रंजन दास, चंदन मजूमदार, देवाशीष राय, अपी भट्टाचार्य सहित अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक की प्रस्तावना रखते हुए महासचिव साधन पुरकायस्थ ने कहा कि वर्तमान सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों में असम के भाषाई एवं धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने इन परिस्थितियों से निपटने के लिए संगठन की भावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा करने का आग्रह किया।

इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता हाफिज रशीद अहमद चौधरी ने नागरिकता एवं विदेशी संबंधी प्रचलित कानूनों तथा असम सरकार द्वारा जारी एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के विभिन्न प्रावधानों की कानूनी व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रावधानों के माध्यम से बंगाली भाषी समुदाय के नागरिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार के अधिकार हनन की आशंका हो तो उसके विरुद्ध कानूनी लड़ाई के साथ-साथ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक जनआंदोलन भी आवश्यक होगा।

इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विजय चक्रवर्ती ने सुझाव दिया कि संबंधित कानूनों और एसओपी का विस्तृत अध्ययन कर एक ज्ञापन असम के सभी जिला आयुक्तों के माध्यम से भारत सरकार को भेजा जाए। साथ ही इसकी प्रतिलिपि संसद के विपक्षी दलों के सांसदों को भी उपलब्ध कराई जाए। आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय गृह मंत्री तथा विभिन्न सांसदों से मिलकर इस विषय पर चर्चा करने और आवश्यक संशोधन की मांग रखने का भी प्रस्ताव रखा गया, जिसका बैठक में उपस्थित सदस्यों ने समर्थन किया।

बैठक में कमल दत्ता और पूर्व विधायक स्वप्न कर ने संगठन को अधिक मजबूत और सक्रिय बनाने पर बल देते हुए नई पीढ़ी के समान विचारधारा वाले लोगों को समिति से जोड़ने की आवश्यकता बताई। अन्य वक्ताओं ने भी संगठन को पहले की तरह जनआंदोलन केंद्रित बनाने की अपील की।

बैठक के अंत में निम्नलिखित प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए—

1. आगामी 20 सितंबर को गुवाहाटी में एक राज्य स्तरीय अधिवेशन आयोजित कर आगे के आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।

2. संगठन को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक जिले से जागरूक एवं समान विचारधारा वाले लोगों को समिति से जोड़ा जाएगा।

3. सीएए (CAA) नियमों को सरल बनाकर पात्र बंगाली नागरिकों के लिए नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया सुगम बनाने की मांग की गई।

4. एनआरसी (NRC) की राजपत्र अधिसूचना जारी कर पात्र नागरिकों को पहचान पत्र प्रदान करने तथा एनआरसी से बाहर रह गए लोगों को रिजेक्शन स्लिप देकर अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग की गई।

5. डी-वोटर (D-Voter) से संबंधित समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की गई।

6. प्रचलित व्यवस्था के अनुसार भूमि पट्टा प्रदान करने की प्रक्रिया को लागू करने की मांग की गई।

7. ‘खिलंजिया’ नीति के नाम पर राज्य के भारतीय नागरिकों के बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव समाप्त करने की मांग की गई।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इन प्रस्तावों को संबंधित अधिकारियों एवं सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

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