जुनाखी उरांग की रहस्यमय मौत पर गरमाया मामला: परिवार से मिले अमित कलवार, बोले “निष्पक्ष जांच हो, दोषी कोई भी हो कार्रवाई हो”

नाबालिग लड़की की मौत ने खड़े किए कई सवाल, बंगले में काम करने से लेकर फोरेंसिक रिपोर्ट तक उठी जांच की मांग

शिव कुमार शिलचर बोरखोला: लोटनपुर न्यू बोरखाई चाय बागान में जुनाखी उरांग की रहस्यमय मौत का मामला अब गंभीर होता जा रहा है। रविवार को जुनाखी उरांग के परिवार से मिलने अमित कलवार पहुंचे। उनके साथ जगदीश यादव, सुरुजनाथ ग्वाला, अमर तिवारी, राजेश ग्वाला सहित अन्य लोग भी मौजूद थे। सभी ने परिवार से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

गौरतलब है कि 25 जुलाई को जुनाखी उरांग चाय बागान के मालिक के बंगले में फांसी के फंदे से लटकी हुई मिली थी। बताया जा रहा है कि जुनाखी नाबालिग थी और बंगले में काम करती थी। उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। मामले की फोरेंसिक रिपोर्ट भी अभी सामने नहीं आई है।

परिवार से मुलाकात के बाद अमित कलवार ने कहा कि जुनाखी इसी चाय बागान की रहने वाली थी और उसकी इस तरह हुई रहस्यमय मौत से वे बेहद दुखी हैं। उन्होंने कहा कि काफी समय से परिवार से मिलने की इच्छा थी, लेकिन व्यस्तता के कारण पहले नहीं आ सके। रविवार को समय निकालकर वे परिवार से मिलने पहुंचे।

अमित कलवार ने कहा कि जुनाखी की मौत की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मामले में अभी फोरेंसिक रिपोर्ट भी नहीं आई है और जो भी जांच लंबित है, उसे गंभीरता से पूरा किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मांग की जाएगी कि घटना की पूरी जांच हो और यदि जांच में किसी की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

अमित कलवार ने कहा कि इस घटना के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि जुनाखी की मां भी करीब 32 वर्षों तक इसी चाय बागान में कर्मचारी रही थीं और उनका पीएफ का पैसा लंबित बताया जा रहा है।

उन्होंने मांग की कि परिवार को उनका बकाया पीएफ जल्द से जल्द दिलाया जाए, ताकि परिवार आगे अपना जीवन चला सके और इलाज सहित जरूरी खर्चों को पूरा कर सके।

इसके अलावा बागान प्रबंधन और चारों श्रमिक यूनियनों के सामने भी परिवार को आर्थिक सहायता देने तथा उनके भविष्य के लिए किसी प्रकार की जीविका की व्यवस्था करने की मांग रखी जाएगी।

इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी है कि यदि जुनाखी नाबालिग थी, तो वह चाय बागान मालिक के बंगले में किन परिस्थितियों में काम कर रही थी? उसकी मौत से पहले क्या हुआ था? आखिर वह किन परिस्थितियों में फांसी के फंदे से लटकी हुई मिली?

इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच के बाद ही सामने आ सकते हैं।

अमित कलवार ने कहा कि यूनियन और बागान प्रबंधन दोनों से इस मामले को गंभीरता से उठाया जाएगा, ताकि परिवार को न्याय मिल सके और उन्हें आर्थिक सहायता भी प्राप्त हो।

अब पूरे मामले में प्रशासन की जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। जुनाखी उरांग की मौत का सच क्या है और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

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