कोकराझार में हिंसक झड़प, दो की मौत, तीन घायल
आगजनी के बाद सैकड़ों लोग आश्रय शिविरों में रहने को मजबूर
कोकराझार (असम), 21 जनवरी:
असम के कोकराझार जिले में एक सड़क दुर्घटना को केंद्र कर उत्पन्न तनाव ने हिंसक रूप ले लिया। इस दौरान हुई घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरबाज़ी की, जिसके जवाब में पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और स्थिति नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए।
हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने कई घरों और दुकानों में आग लगा दी, जिससे बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए। हालात ऐसे बने कि पीड़ित परिवारों को अपना घर छोड़कर आश्रय शिविरों में शरण लेनी पड़ी।
चार आश्रय शिविरों में सैकड़ों लोग
प्रशासन के अनुसार, कोकराझार जिले में फिलहाल कुल चार आश्रय शिविर संचालित किए जा रहे हैं। इनमें से एक शिविर आदिवासी समुदाय का है, जबकि तीन शिविर बड़ो समुदाय के लोगों के लिए बनाए गए हैं। इन सभी शिविरों में सैकड़ों की संख्या में प्रभावित लोग रह रहे हैं।
कारिगांव में 463 लोग शरणार्थी
कोकराझार जिले के कारिगांव पुलिस चौकी अंतर्गत कारिगांव हाई एंड एमई स्कूल में बनाए गए आश्रय शिविर में कुल 463 लोग रह रहे हैं। इनमें 218 पुरुष और 245 महिलाएं शामिल हैं।
शिविर में रह रहे लोगों ने बताया कि मंगलवार को जब उपद्रवी आंदोलन कर रहे थे, तब उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आंदोलन करना था तो घरों और दुकानों को क्यों जलाया गया। पीड़ितों के अनुसार, गांव में करीब 30 घरों और दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे उनका सारा सामान जलकर राख हो गया। अब उनके पास जीवनयापन के लिए कुछ भी शेष नहीं है।
वृद्ध को जिंदा जलाने का आरोप
शिविर में मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि उपद्रवियों ने एक वृद्ध व्यक्ति को भी जला दिया, जो फिलहाल गंभीर रूप से घायल अवस्था में आश्रय शिविर में था। घायल वृद्ध को बुधवार दोपहर करीब 12 बजे एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया।
गर्भवती महिलाओं की स्थिति चिंताजनक
इस आश्रय शिविर में दो महिलाएं गर्भवती थीं। इनमें से एक महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि दूसरी महिला ने बिना किसी डॉक्टर की मौजूदगी के शिविर में ही बच्चे को जन्म दिया, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
भोजन और पानी की भारी कमी
शिविर में रह रही महिलाओं ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि खाद्य सामग्री की भारी कमी है। सरकारी स्तर पर जो भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, वह केवल बच्चों के लिए ही पर्याप्त है, जबकि अधिकांश वयस्क लोग भूखे रहने को मजबूर हैं। इसके अलावा पीने के साफ पानी की भी भारी किल्लत बताई जा रही है।
स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल राहत, पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पानी और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।