कीई पान्योर (अरुणाचल प्रदेश): अरुणाचल प्रदेश के कीई पान्योर जिले में फूलदार पौधे की एक नई प्रजाति बेगोनिया नीलमोरम (Begonia neelamorum) की खोज और वैज्ञानिक रूप से पहचान की गई है। यह खोज पूर्वी हिमालय क्षेत्र में मौजूद समृद्ध वनस्पति विविधता को उजागर करती है।
असम के वनस्पतिशास्त्री दीपांकर बोरा, जो नागांव स्थित कलियाबोर कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग से जुड़े हैं, इस शोध-पत्र के प्रमुख लेखक हैं। यह अध्ययन सहकर्मी-समीक्षित वैज्ञानिक पत्रिका ताइवानिया (Taiwania) में ५ अगस्त, २०२६ को प्रकाशित हुआ।
यह पौधा कीई नदी के किनारे लगभग १,००० मीटर की ऊंचाई पर खड़ी और नम चट्टानी दीवारों पर उगता हुआ पाया गया। शोधकर्ताओं ने इसे एक छोटे आकार के बारहमासी शाकीय पौधे के रूप में पहचाना, जिसकी ऊंचाई लगभग १० से २० सेंटीमीटर होती है। इसके एकल हल्के हरे पत्ते के किनारे विशिष्ट दोहरी आरीदार संरचना वाले होते हैं तथा इसमें सफेद फूल लगते हैं।
हालांकि यह प्रजाति बेगोनिया प्रोलिफेरा (Begonia prolifera) से मिलती-जुलती है, लेकिन शोधकर्ताओं ने इसमें कई विशिष्ट विशेषताएं पाईं। इनमें ग्रंथियुक्त कठोर रोएंदार सतह, बेलनाकार तना, अंडाकार पत्ते जिनके किनारे दोहरी आरीदार संरचना वाले हैं, विशिष्ट पुष्पक्रम संरचना तथा अपेक्षाकृत छोटे स्टाइल शामिल हैं।
इस नई प्रजाति का नाम बेगोनिया नीलमोरम न्यीशी जनजाति के नीलम कबीले के सम्मान में रखा गया है। अभियान के दौरान कठिन और दुर्गम क्षेत्र में शोधकर्ताओं की सहायता करने में कबीले के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस पौधे को न्यीशी भाषा में “कोबीरहोपू बाबराई” नाम से भी जाना जाता है।
शोधकर्ताओं ने लगभग तीन वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में इस प्रजाति की चार आबादियों का दस्तावेजीकरण किया है। हालांकि, इसके व्यापक वितरण और कुल आबादी के आकार की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए आईयूसीएन (IUCN) के मानदंडों के तहत इसे फिलहाल “डेटा डेफिशिएंट (डीडी)” यानी “अपर्याप्त आंकड़ों वाली प्रजाति” के रूप में अस्थायी तौर पर वर्गीकृत किया गया है। शोधकर्ताओं ने इसके लिए आगे और सर्वेक्षण तथा नियमित निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया है।
यह खोज अरुणाचल प्रदेश में पौधों की विविधता के बढ़ते वैज्ञानिक रिकॉर्ड में एक महत्वपूर्ण योगदान है और क्षेत्र के दुर्गम प्राकृतिक आवासों में वनस्पति अनुसंधान तथा संरक्षण के महत्व को रेखांकित करती है।
अर्नब शर्मा
डिब्रूगढ़