ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त तथा सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में कक्षा VI से VIII के विद्यार्थियों के लिए जनजातीय मातृभाषा की पाठ्यपुस्तकों को तीसरी भाषा के रूप में लागू किया है।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), अरुणाचल प्रदेश द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), २०२० के अनुरूप की गई है। इसका उद्देश्य बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ राज्य की विविध जनजातीय भाषाओं का संरक्षण करना है।
अधिसूचना के अनुसार, तीसरी भाषा के विषय को पाठ्यक्रम संचालन, उपस्थिति, आकलन, मूल्यांकन, कक्षा में प्रोन्नति तथा अंकों के आवंटन के मामले में अन्य मुख्य विषयों के समान दर्जा दिया जाएगा।
अधिसूचना में सभी विद्यालय प्रमुखों तथा संबंधित शैक्षणिक अधिकारियों को इस निर्णय को तत्काल प्रभाव से प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह कदम वर्ष २०२१–२२ के बजट में अरुणाचल प्रदेश में जनजातीय भाषाओं और लिपियों के प्रचार-प्रसार के लिए की गई घोषणा के बाद उठाया गया है। अधिसूचना के अनुलग्नक-I के अनुसार, राज्य के विभिन्न जिलों और क्षेत्रों के लिए १२ जनजातीय भाषाओं की पाठ्यपुस्तकों की पहचान की गई है।
इनमें आदि भाषा को पूर्वी सियांग, सियांग, ऊपरी सियांग तथा लोअर दिबांग वैली और शि-योमी के आदि बहुल क्षेत्रों के लिए निर्धारित किया गया है। अपातानी को लोअर सुबनसिरी के लिए और अका (ह्रुसो) को पश्चिम कामेंग के अका बहुल क्षेत्रों के लिए शामिल किया गया है।
गालो भाषा को लेपा राडा, लोअर सियांग, पश्चिम सियांग तथा ऊपरी सुबनसिरी के गालो बहुल क्षेत्रों के लिए निर्धारित किया गया है, जबकि इदु को दिबांग वैली तथा लोअर दिबांग वैली और लोहित के इदु बहुल क्षेत्रों के लिए शामिल किया गया है।
सूची में कमान भाषा को लोहित तथा अंजॉ के कमान बहुल क्षेत्रों के लिए, न्यीशी को पूर्वी कामेंग, ईटानगर राजधानी क्षेत्र, कामले, केई पन्योर, क्रा दादी, कुरुंग कुमे, पक्के केसांग और पापुम पारे के लिए शामिल किया गया है।
इसी प्रकार सिंगफो भाषा को चांगलांग और नामसाई के सिंगफो बहुल क्षेत्रों के लिए, तागिन को ऊपरी सुबनसिरी, ताई खामती को नामसाई, तांगसा को चांगलांग तथा ताराओन को अंजॉ और लोहित के ताराओन बहुल क्षेत्रों के लिए निर्धारित किया गया है।
अधिसूचना अरुणाचल प्रदेश सरकार के शिक्षा सचिव कांतो डांगगेन, आईएएस द्वारा जारी की गई है, जबकि दस्तावेज पर एससीईआरटी के निदेशक लयी बागरा ने डिजिटल हस्ताक्षर किए हैं।
स्वदेशी भाषाओं को तीसरी भाषा के विषय के रूप में औपचारिक स्कूली शिक्षा में शामिल किया जाना अरुणाचल प्रदेश की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को शिक्षा व्यवस्था के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे पहले भी सरकारी दस्तावेजों में राज्य में जनजातीय तीसरी भाषा की शिक्षा शुरू करने और उसके विस्तार के प्रयासों का उल्लेख किया गया है।
अर्नब शर्मा
डिब्रूगढ़