इंदौर में 2 से 4 नवंबर तक होगी अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक, शताब्दी वर्ष की गतिविधियों की समीक्षा के साथ संगठन के पुनर्गठन पर होगा मंथन
नई दिल्ली/इंदौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने संगठनात्मक ढांचे में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित पुनर्गठन के तहत संघ के मौजूदा 11 क्षेत्रों की संख्या घटाकर 9 करने तथा 46 प्रांतों की जगह लगभग 85 से 90 संभाग बनाने की योजना है। इसके साथ ही पहली बार राज्य स्तर पर अलग संगठनात्मक इकाइयां गठित करने का प्रस्ताव भी सामने आया है। इन बदलावों का उद्देश्य संगठनात्मक कार्यों का विकेंद्रीकरण, जिम्मेदारियों का बेहतर वितरण और जमीनी स्तर पर समन्वय को मजबूत करना बताया जा रहा है।
राज्य स्तर पर बनेगी नई संगठनात्मक व्यवस्था
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, राज्य स्तर पर राज्य प्रचारक और राज्य कार्यवाह जैसे पद होंगे। राज्य संघचालक का पद इस प्रस्तावित ढांचे में शामिल नहीं होने की जानकारी सामने आई है। अभी संघ का संगठनात्मक ढांचा मुख्य रूप से क्षेत्र और प्रांत के आधार पर संचालित होता है। नए संभागों के गठन से संगठनात्मक जिम्मेदारियों का दायरा छोटे प्रशासनिक स्तरों तक पहुंचेगा और विभिन्न क्षेत्रों में गतिविधियों के संचालन तथा निगरानी में सुविधा होने की उम्मीद है।
इंदौर में तीन दिवसीय बैठक, शीर्ष पदाधिकारी होंगे शामिल
RSS की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल (ABKM) की बैठक मध्यप्रदेश के इंदौर में 2, 3 और 4 नवंबर 2026 को आयोजित होगी। संघ की ओर से 22 अक्टूबर को जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी छह सह-सरकार्यवाह, अखिल भारतीय विभागों के प्रमुख तथा कार्यकारी मंडल के सदस्य शामिल होंगे। देशभर के 46 प्रांतों और 11 क्षेत्रों के प्रमुख पदाधिकारी भी बैठक में भाग लेंगे।
शताब्दी वर्ष की समीक्षा और समसामयिक मुद्दों पर चर्चा
बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही सरसंघचालक के विजयादशमी संबोधन में उठाए गए विषयों, नशे की बढ़ती समस्या, संचार एवं डिजिटल माध्यमों पर प्रभावी संवाद की रणनीति, देश के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप और वैश्विक परिस्थितियों पर भी विचार-विमर्श होगा।
संगठनात्मक ढांचे में बदलाव पर रहेगी विशेष नजर
बैठक से पहले संगठनात्मक पुनर्गठन को लेकर सामने आए प्रस्तावों ने इस आयोजन का महत्व बढ़ा दिया है। क्षेत्र और प्रांत की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव के साथ संभाग तथा राज्य स्तर पर नई जिम्मेदारियां तय होने की संभावना है। हालांकि, संभागों की अंतिम संख्या और नई व्यवस्था के सभी पदों एवं अधिकारों का आधिकारिक विवरण सामने आना अभी बाकी है। इंदौर की बैठक में इन प्रस्तावों पर होने वाली चर्चा और आगे की प्रक्रिया पर विशेष नजर रहेगी।