NERCORMS के तहत बराक नदी कैचमेंट क्षेत्र के संरक्षण एवं पुनरुद्धार पर बैठक और क्षेत्रीय निरीक्षण

शिलचर। “असम, मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड राज्यों में बराक नदी के कैचमेंट क्षेत्र का संरक्षण एवं पुनरुद्धार” विषयक परियोजना को लेकर 25 सितंबर 2026 को कछार के उपायुक्त कार्यालय स्थित न्यू कॉन्फ्रेंस हॉल, शिलचर में बैठक आयोजित की गई।

प्रस्तावित परियोजना भारत सरकार और जर्मनी सरकार के वित्तपोषण तथा उत्तर पूर्व परिषद (NEC) के अंतर्गत लागू किए जाने का प्रस्ताव है। परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में North Eastern Region Community Resource Management Society (NERCORMS) कार्य करेगी।

बैठक में विशेष रूप से कछार जिले में बराक नदी, उसकी विभिन्न सहायक नदियों तथा आसपास के कैचमेंट क्षेत्रों के संरक्षण और पुनरुद्धार के उपायों पर चर्चा की गई। अनियोजित भूमि उपयोग, कैचमेंट क्षेत्र का क्षरण, वनों की कटाई, अत्यधिक गाद का बहाव तथा संबंधित विभागों के बीच पर्याप्त समन्वय के अभाव से उत्पन्न समस्याओं पर विचार किया गया। इन कारणों से बाढ़, नदी कटाव, भूस्खलन, नदी की धारा में बदलाव तथा अन्य नदी संबंधी समस्याओं के बढ़ने की बात सामने आई।

परियोजना का मुख्य उद्देश्य कैचमेंट क्षेत्र के समेकित प्रबंधन के माध्यम से वन, वन्यजीव और जल संसाधनों का संरक्षण, क्षतिग्रस्त कैचमेंट क्षेत्रों का पुनरुद्धार तथा स्थानीय लोगों और किसानों की आजीविका में सुधार करना है।

बैठक के बाद विभिन्न नदी कटाव प्रभावित क्षेत्रों का क्षेत्रीय निरीक्षण किया गया। इस दौरान PWRD, जल संसाधन विभाग, Assam Development Bank, NEC तथा DDMA सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों से परियोजना की योजना एवं क्रियान्वयन के लिए आवश्यक तकनीकी और क्षेत्रीय आंकड़े उपलब्ध कराने तथा अपने अनुभव और अवलोकन NERCORMS के साथ साझा करने का अनुरोध किया गया।

प्रमुख क्षेत्रीय निरीक्षण

शिवबाड़ी सिंकिंग जोन के निरीक्षण के बाद टीम ने निम्न स्थानों का दौरा किया—

  • बेतुकांदी जलभूमि: बराक नदी के कैचमेंट और बाढ़ नियंत्रण में जलभूमि की भूमिका का आकलन।
  • कराटिग्राम: बराक नदी के कटाव की स्थिति का निरीक्षण।
  • अमरनगर एवं सत्यनगर: डालू नदी के कटाव, धारा परिवर्तन तथा नदी चैनल और आसपास के भूमि उपयोग के बीच संबंधों का आकलन।

प्रमुख तकनीकी चुनौतियां

बराक नदी के कैचमेंट क्षेत्र के प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक और समेकित दृष्टिकोण आवश्यक है। नदी की घुमावदार धारा, मानसून में अत्यधिक जलप्रवाह, भारी गाद परिवहन और लगातार हो रहे तट कटाव को देखते हुए नदी की धारा में बदलाव, तट कटाव, कैचमेंट क्षेत्र का क्षरण, अत्यधिक गाद तथा जलभूमियों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार वनों की कटाई और अनुचित भूमि उपयोग से मिट्टी का कटाव एवं जलप्रवाह बढ़ सकता है, जिससे निचले क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ता है। वहीं, अत्यधिक गाद नदी के चैनल की संरचना बदलकर उसकी जलधारण एवं जलप्रवाह क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

निष्कर्ष

बराक नदी और उसके कैचमेंट क्षेत्र के दीर्घकालिक संरक्षण एवं पुनरुद्धार के लिए नदी प्रबंधन, कैचमेंट संरक्षण, वन एवं जलभूमि संरक्षण, तट कटाव नियंत्रण, जलनिकासी व्यवस्था में सुधार तथा बाढ़ जोखिम न्यूनीकरण को एक समेकित योजना के तहत लागू करना आवश्यक है।

सभी संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय तथा विश्वसनीय क्षेत्रीय आंकड़ों के आधार पर परियोजना का क्रियान्वयन किया जाए तो इससे बराक नदी और आसपास के क्षेत्रों की पर्यावरणीय स्थिरता के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा एवं आजीविका सुधार में महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है।

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