सुनीता विलियम्स: अंतरिक्ष  में  नौ  महीने और वापसी की अद्भुत यात्रा —  डॉ सुजीत तिवारी

भारत की बेटी सुनीता विलियम्स एक ऐसी अंतरिक्ष यात्री हैं, जिनका नाम अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता ने अपने शानदार करियर में कई महत्वपूर्ण मिशनों को अंजाम दिया है। उन्होंने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर लंबे समय तक रहने का रिकॉर्ड … Read more

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा: ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य — डा. रणजीत कुमार तिवारी

भारत की सनातन परंपरा में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का विशेष महत्व है। यह न केवल हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण दिवस माना जाता है। भारतीय समाज में यह दिन नवीन ऊर्जा, सृजन, और उत्साह का संचार करता है। इस दिन का महत्व केवल … Read more

आखिर फिनलैंड की तरह हम खुश क्यों नहीं हुए ? — सुनील कुमार महला

  जीवन फूलों की सेज नहीं है। यहाँ कहीं भी संघर्ष नहीं है, तनाव हैं,कष्ट हैं, लेकिन इन संघर्षों, समूहों और उत्कंठाओं में भी जो व्यक्ति हमेशा सकारात्मक सोच और ऊर्जा से जीवन जीता है वह सहजता, धैर्य, संयम और खुशी (प्रसन्नता) से जीता है, वही वास्तविक जीवन है। असल में, जीवन के हर पल … Read more

प्रतिदान

सुखदा यही नाम था उसका। मगर जीवन में उसके नाम के विपरीत परिस्थितियाँ उसे किस मोड़ पर ले आयी ये उसे समझ में न आया। मन में दुख, जलन, पीड़ा और तानों के शर से आहत घाव को लेकर वह सोच में डूबी हुई थी। गोद में नन्हीं सी बच्ची पल्लवी। अभी-अभी दूध पीकर सोई … Read more

भेदभाव

जब भी आप चारों ओर देखेंगे, तो आपको भेदभाव के उदाहरण मिलेंगे। जब लोग भौतिकवादी हो जाते हैं, तो भेदभाव के कारण भी बढ़ते जाते हैं। आपको सुनने को मिलेगा, भेदभाव के बहाने रिश्तों के टूटने की करुण कहानी। लेकिन इसकी कोई निश्चित परिभाषा नहीं है, न ही कोई तय सीमा— आखिर कितना अंतर दो … Read more

सतत विकास के लिए जल संरक्षण आवश्यकता

22 मार्च को ‘विश्व जल दिवस’ मनाया जाता है। दरअसल प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस संयुक्त राष्ट्र के एक वैश्विक नेता द्वारा मनाया जाता है जो वर्ष 1993 से मनाया जा रहा है। दरअसल, इस अंतर्राष्ट्रीय दिवस का विचार वर्ष 1992 में सामने आया, जिस रियो डी जनेरियो में पर्यावरण और विकास … Read more

भेदभाव…

जब भी आप चारों ओर देखेंगे, तो आपको भेदभाव के उदाहरण मिलेंगे। जब लोग भौतिकवादी हो जाते हैं, तो भेदभाव के कारण भी बढ़ते जाते हैं। आपको सुनने को मिलेगा, भेदभाव के बहाने रिश्तों के टूटने की करुण कहानी। लेकिन इसकी कोई निश्चित परिभाषा नहीं है, न ही कोई तय सीमा— आखिर कितना अंतर दो … Read more

हमारे ‘नागर श्री’का भावी शिलचर भ्रमण. ( एक ब्यंग )

अभी कल ही में,मैं मिला हमारे शहर के खुद मियां मिट्ठू,समझ गये होंगें, नहीं समझे तो मैं क्या करुं ?आप यूं करो हमारे नागर यानि ‘नागर श्री’, हां अभी तक तो श्री ही लिखूंगा, उनके जाने के बाद,अर्थात् सिलचर जाने के बाद भी तो श्री ही लिखूंगा,नागर श्री अपनी दार्शनिक बुद्धि के अनुसार अमर होते … Read more

22 मार्च/पुण्य-तिथि गीता प्रैस के संस्थापक भाई हनुमान प्रसाद पोद्दार

भारत ही नहीं, तो विश्व भर में हिन्दू धर्मग्रन्थों को शुद्ध पाठ एवं छपाई में बहुत कम मूल्य पर पहुँचाने का श्रेय जिस विभूति को है, उन श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाई जी) का जन्म शिलांग में 17 सितम्बर, 1892 को हुआ था। उनके पिता श्री भीमराज तथा माता श्रीमती रिखीबाई थीं। दो वर्ष की … Read more

आपणों मारवाड़ी समाज कठे जा रियो है. (लीक लखोटिया नं.6.)

‘मारवाड़ी समाज पुराणतो अर आजको”. पुराणतो अर आजका मारवाड़ी समाज का लोंगां मं भोत फर्क है.आज है शक्ति सूं उपर दिखाओ अर कर्म की अपेक्षा जर, जोरु ,जमीं मं विशेष रुचि.पहली थी साधारण आवश्यकता की पूर्ती अर सुविधा.आज जो साधारणता है ,बा पूरी बदलगी. समयानुसार कोनी बदली, पर बदलगी आवश्यकता  आपणां संस्कारां न किनारे फेंक … Read more