पुनीत दुबे की कलम से

पहलगाम में निर्दोष, असहाय और निहत्थे लोगों पर हमला करने वाले कायर हैं, दानव हैं, मानवता के शत्रु हैं। ये लोग कश्मीरियत के भी दुश्मन हैं। कश्मीर की सबसे बड़ी पहचान अतिथि सत्कार है, और इन आतंकवादियों ने कश्मीर में आए अतिथियों पर गोलियाँ चलाईं, उनका रक्त बहाया। ऐसे आतंकी किसी भी कीमत पर बख्शे … Read more

नरेन्द्र मोदी की पराजय जरूरी फिर हिन्दुओं को बनना पडेगा यहूदि – आचार्य श्रीहरि

देख लेना। कुछ नहीं होगा। नरेन्द्र मोदी के पास छेदा टोपी वाले मुसलमानों और कम्युनिस्ट विचारकों की फौज है। मुसलमानों, कम्युनिस्टों और सेक्युलरों की फौज कुछ करने नहीं देगी। कुछ दिन बाद सब कुछ सामान्य हो जायेगा। हिन्दुओ का गुस्सा क्षणिक होता है, हिन्दुओं की याद बहुत ही क्षणिक होती है। हिन्दू फिर भूल जायेगा … Read more

प्रेस की स्वतंत्रता के बिना न तो लोकतंत्र है, न पारदर्शिता है और न ही न्याय है- सुनील महला

प्रत्येक वर्ष 3 मई को अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता स्‍वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। लोकतंत्र में प्रेस का बहुत महत्व है। जैसा कि प्रेस के बारे में यह कहा गया है कि ‘प्रेस की स्वतंत्रता के बिना न तो लोकतंत्र है, न पारदर्शिता है और न ही न्याय है।’ प्रेस की स्वतंत्रता किसी देश … Read more

जातिगत जनगणना से सामाजिक-आर्थिक नीतियों को मिलेगी गति ! — सुनील कुमार महला

हाल ही में केंद्र सरकार ने जाति जनगणना कराने की बात कही है। पाठकों को बताता चलूं कि विपक्षी दल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल समेत कई विपक्षी दल लगातार देश में जाति जनगणना की लगातार मांग करते रहे हैं और अब सरकार ने जाति जनगणना कराने का एक बड़ा और साहसिक कदम उठाया है। … Read more

पहलगाम के आगे — अवधेश कुमार

पहलगाम हमले के बाद संपूर्ण देश का सामूहिक मानस ्वैसी कार्रवाई , प्रतिरोध और प्रतिशोध का है जिससे भारत को दोबारा ऐसी भयानक घटना का सामना न करना पड़े। यह स्वाभाविक है। एक समय जम्मू कश्मीर में आतंकवादी घटनाएं आम थी और तब भी लोगों के अंदर क्रोध पैदा होता था लेकिन आम मानस यह … Read more

जाति ही पूछो साधु की … – राधा रमण

पिछले माह पहलगाम के बायसरन में कश्मीर घूमने गए 26 पर्यटकों की धर्म पूछकर नृशंस हत्या से देशभर में गम और गुस्से के बीच केंद्र सरकार ने देशभर में जाति जनगणना कराने का ऐलान किया है। कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में यह फैसला किया गया। देश में आजादी के बाद पहली … Read more

वाह मानव वाह!

वाह रे मानव, वाह! नदियों को सुखा कर तूने बनाया अपना घर। पानी के अभाव में अब पूछ रहा है — “नदियां है किधर?” कूड़े का ढेर बना डाला तूने अपना शहर, स्वच्छता के अभाव में अब पूछ रहा है — “अधिकारी है किधर?” नालियों को जाम कर पानी को तूने रोका, डेंगू-मलेरिया से भुगतकर … Read more

बहता पानी

बहता पानी, शीतल, स्वच्छ, नदी की धारा, जीवन का रचयिता सच। यह बहता है, निरंतर बहता है, नया मार्ग खोजता, नए स्वप्न कहता है। इसके किनारे पेड़ों की छाया, पक्षियों की चहचहाहट, मधुर सी माया। बेहता पानी, जीवन का प्रतीक, सदैव गतिमान, कभी न रुके एक क्षण भी ठीक। इसके जल में छिपी कहानी, हर … Read more

निर्मल स्वच्छ विचार

निर्मल स्वच्छ विचार मन के, पावन बहती धारा, जीवन को ये करें पवित्र, हरियाली दें दोबारा। शुद्ध जल जैसे हों भाव ये, शांत, सरल, सुहाए, सुख-शांति के संग जीवन में, नव आशा जगाएं। आत्मा की ये करें शुद्धि, ऊर्जा भरै अपार, नई दिशा दें जीवन को, करें सृजन सत्कार। सिखलाएं ये जीवन रहस्य, प्रेम, करुणा, … Read more

नद़ी का तट

लगे कितना मनमोहक ये नद़ी का तट..! बैठू मैं जरा इत्मीनान से करू मैं बाते लतांत से  ये बहती हवाओं शीतल देने लगी हैं सुकून… ये नज़ारे,  ये  हरियालियाँ बुझाने लगी हैं पहेलियाँ आसमानो में छायी ये काली घटाँ बरसा रहीं हैं हल्की  सी वर्षा ये पेड़ की छाया देने लगी हैं मौन की माया…. … Read more