12 मई/रोचक संस्मरण परमवीर धनसिंह थापा का पुनर्विवाह

एक ओर चीनी नेता हिन्दी-चीनी भाई-भाई के नारे लगा रहे थे, तो दूसरी ओर 20 अक्तूबर, 1962 को उनकी सेना ने अचानक भारत पर हमला कर दिया। उस समय लद्दाख के चुशूल हवाई अड्डे के पास स्थित चैकी पर मेजर धनसिंह थापा के नेतृत्व में गोरखा राइफल्स के 33 जवान तैनात थे। मेजर थापा खाई … Read more

11 मई/इतिहास-स्मृति सोमनाथ में ज्योतिर्लिंग स्थापना

गुजरात के जूनागढ़ में समुद्रतट पर स्थित सोमनाथ का पावन मंदिर हमलावरों ने कई बार तोड़ा; पर यह हर बार, पहले से भी अधिक गौरव के साथ फिर सिर उठाकर खड़ा हो गया। 11 मई, 1951 का प्रसंग भी ऐसा ही है। इसमें जहां एक ओर राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद ने अपने धर्मप्रेम और दृढ़ … Read more

मां की ममता से वंचित बच्चों की ‘गुड्डी मां’ बनीं सहारा, अब तक 100 बच्चों को दिया मातृत्व का प्यार

घरौंदा बाल आश्रम में 2012 से कर रहीं सेवा, बच्चों के लिए बनीं जीवन की नई उम्मीद गाजियाबाद की ‘गुड्डी मां’ उन मासूमों की ज़िंदगी में उम्मीद की किरण बनकर आईं हैं जिन्हें जन्म देने के बाद मां-बाप ने अपनाया नहीं। ऐसे नवजात और अनाथ बच्चों को घरौंदा बाल आश्रम में सहेजकर पालने का काम … Read more

‘मां’ मुझे चट्टान सा मजबूत करतीं है। –सुनील कुमार महला

11 मई 2025 को हम सभी अंतरराष्ट्रीय मातृ दिवस मनाने जा रहें है। सर्वप्रथम सभी माताओं को इस लेखक का कोटिशः नमन। ‘मां’ एक शब्द मात्र नहीं है, अपितु यह इससे भी कहीं अधिक बढ़कर है। ‘मां’ विधाता की इस धरती पर बहुत बड़ी देन है। ईश्वर के बाद यदि कोई सबसे बड़ी पालनहार है … Read more

युद्ध  से संबंधित प्रेरक कहनी

“मैं प्लेन में बैठ चुका था, दिल्ली जा रहा था—लगभग छह घंटे की यात्रा। सोचा था—चुपचाप बैठकर थोड़ी किताब पढ़ूंगा और बीच में कुछ देर आँखें भी मूंद लूंगा। टेकऑफ से ठीक पहले देखा कि प्लेन का दरवाज़ा फिर से खोला गया और एक दल भारत के जवानों का अंदर आया—करीब दस के आस-पास। वे … Read more

सज्जनता का अनुशीलन हो, मानव को पथ का पता रहे !!’ — सुनील कुमार महला

भारतीय सेना ने भारत के 15 शहरों पर, पाकिस्तान के हमलों को नाकाम करते हुए, पाकिस्तान को करारा जबाब दे दिया है और पाकिस्तान ने भारतीय सेना के पहले ही प्रहार में भारत से मुंह की खाई है। भारतीय सेना ने जहां एक ओर पाक एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया, वहीं दूसरी ओर … Read more

कविगुरु रवीन्द्रनाथ: आत्मानुभूति से वैश्विक मानवता तक — डा. रणजीत कुमार तिवारी

भूमिका भारतीय संस्कृति और साहित्य की विराट परंपरा में कविगुरु रवीन्द्रनाथ ठाकुर का स्थान सर्वोच्च है। वे केवल एक कवि या गीतकार नहीं, बल्कि एक ऐसे युगद्रष्टा, चिंतक और आध्यात्मिक सर्जक थे, जिन्होंने भारतीय चेतना को आत्मानुभूति की गहराइयों से उठाकर वैश्विक मानवता के शिखर तक पहुँचाया। उनका रचना-संसार केवल सौंदर्यबोध या काव्यकल्पना तक सीमित … Read more

10 मई/इतिहास-स्मृति दस मई 1857, जब क्रान्ति का बिगुल बज उठा

इतिहास इस बात का साक्षी है कि भारतवासियों ने एक दिन के लिए भी पराधीनता स्वीकार नहीं की। आक्रमणकारी चाहे जो हो; भारतीय वीरों ने संघर्ष की ज्योति को सदा प्रदीप्त रखा। कभी वे सफल हुए, तो कभी अहंकार, अनुशासनहीनता या जातीय दुरभिमान के कारण विफलता हाथ लगी। अंग्रेजों को भगाने का पहला संगठित प्रयास … Read more

युद्ध से भी आती है शांति पाक का इलाज सिर्फ युद्ध है –(आचार्य श्रीहरि)

युद्ध की अनिवार्यता पर फिर बहस चली है। पाकिस्तान के आतंकवाद, हिंसा और आक्रमण ने युद्ध की अनिवार्यता को जन्म दिया है। नरेन्द्र मोदी ने प्रतिकार के अधिकार का प्रयोग किया और पाकिस्तान को सबक सिखाया। पाकिस्तान पर एयर हमला कर आतंकवादी संगठनों और उनके ठिकानों का संहार किया और उनकी हिंसा का उन्हीं की … Read more

…बंदूकों की गोली का उत्तर सद्भाव नहीं होता !

कवि हरिओम पंवार ने अपनी एक कविता में क्या खूब कहा है कि-‘…नागफनी पर बेला चंपा कभी नहीं खिलने वाले।पत्थर की आंखों में आंसू कभी नहीं मिलने वाले।।बंदूकों की गोली का उत्तर सद्भाव नहीं होता।हत्यारों के लिए अहिंसा का प्रस्ताव नहीं होता।‌।कोई विषधर कभी शांति के बीज नहीं बो सकता है‌। और भेड़िया शाकाहारी कभी … Read more