22 मई/जन्म-दिवस समाज सुधारक राजा राममोहन राय

हिन्दू समाज में सीता, सावित्री, अनसूया आदि सती-साध्वी स्त्रियों की सदा से पूजा होती रही है। सती का अर्थ है मन, वचन, कर्म से अपने पतिव्रत को समर्पित नारी; पर जब भारत में विदेशी और विधर्मियों के आक्रमण होने लगे, तो मुख्यतः राजस्थान में क्षत्रिय वीरांगनाओं ने पराजय की स्थिति में शत्रुओं के हाथों में … Read more

मुल्क चलो आंदोलन_1921 एक अनकही दास्तान

भारतीय इतिहास में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध यूँ तो अनगिनत बड़े-छोटे आन्दोलन हुए जिसमें कुछ को इतिहास में जगह मिली और कुछ नींव की ईंट बन कर रह गए।ब्रिटिश शासन के विरुद्ध दक्षिण असम (तत्कालीन सिलेट जिला) के चाय श्रमिकों द्वारा किया गया मुल्क चलो आंदोलन भी उनमें से एक है।यह एक इतना तीव्र और … Read more

21 मई/जन्म-दिवस प्रेरणा स्तम्भ राजाभाऊ सावरगांवकर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और झारखंड प्रान्त के कार्यकर्ताओं के प्रेरणा स्तम्भ राजाभाऊ का जन्म ग्राम डेहणी (यवतमाल, महाराष्ट्र) में श्री पाण्डुरंग सावरगाँवकर के घर में 21 मई, 1920 को हुआ था। उनके जन्म वाले दिन नृसिंह चतुर्दशी थी। इसलिए उनका नाम नरहरि रखा गया। इस प्रकार उनका पूरा नाम हुआ नरहरि पांडुरंग … Read more

19 मई/जन्म-दिवस आधुनिक लद्दाख के निर्माता कुशक बकुला रिम्पोछे 

भगवान बुद्ध के शरीर त्याग के समय उनके 16 शिष्यों ने प्रतिज्ञा ली  थी कि जब तक उनके विचार पूरे विश्व में नहीं फैलेंगे, तब तक वे मोक्ष से दूर रहकर बार-बार जन्म लेंगे और यह काम पूरा करेंगे। इन 16 में से एक कुशोक बकुला अब तक 20 बार जन्म ले चुके हैं। उनके … Read more

तुर्की समर्थक कीड़े मौकोडे का संहार जरूरी        —  आचार्य श्रीहरि

तुर्की विरोध पर हमारी हैरानी और परेशानी का दूसरा पहलू है। हमारा पहलू यह है जो आपको भी हैरानी-परेशानी मे डाल देगा। मैं इस बात से प्रसन्न तो हूं कि तुर्की के खिलाफ स्पष्ट राष्ट्रवाद की ध्वनि सुनी जा सकती है। पर राष्ट्रवाद में विश्वास करने लोग, संस्थान, सरकार तुर्की से मित्रता और सहयोग की … Read more

गुरुजी ने कहा कि मां के पल्लू पर निबन्ध लिखो.., तो लिखने वाले छात्र ने क्या खूब लिखा…”पूरा पढ़ियेगा आपके दिल को छू जाएगा”* 🥰

       आदरणीय गुरुजी जी…     माँ के पल्लू का सिद्धाँत माँ को गरिमामयी  छवि प्रदान करने के लिए था.   इसके साथ ही … यह गरम बर्तन को    चूल्हा से हटाते समय गरम बर्तन को       पकड़ने के काम भी आता था.         पल्लू की बात … Read more

“जब शिखर मौन होता है…”

(नेतृत्व की महानता और विवशता- मोदी की व्यक्तित्व की विशालता के प्रति समर्पित ) जब शिखर मौन होता है, तब भी वो बोल रहा होता है, भीतर ही भीतर हर चिंता का भार वो तोल रहा होता है। जो चलता हो अग्निपथ पर, वो छाँव कहाँ माँगा करता? जिसे न मिले एक नींद की घड़ी, … Read more

“शपथ सिंदूर की”

( आदरणीय मोदी जी के दृढ़ निश्चय और कुशल नेतृत्व को समर्पित ) ०८/०५/२०२५ लाल जो रेखा है ललाट की — वह रक्त नहीं है-प्रतिज्ञा है, हर बिंदी में जलता है भारत — यह नारी की भक्ति-यज्ञा है। श्रृंगार नहीं है,शस्त्र है यह — जन-जन के विश्वास का स्वर, जहाँ प्रेम की वाणी के स्वर … Read more

तुम देखोगे, हम देख चुके हैं।

हम देख चुके हैं बर्बादी, हम देख चुके हैं बगदादी। हम देख चुके शाहीन बाग़, और टुकड़े वाली आज़ादी।। हम देख चुके हैं बामियान, हम देख चुके मज़हब गंदा। देखा है जौहर पद्मा का, देखा है जलता नालंदा।। हम देख चुके हैं खिलजी को, हम देख चुके हैं अब्दाली। हम देख चुके तैमूर लंग, हम … Read more

बदला पहलगाम का

शर्म न आईं वो दहशतगर्दों , जो तुम मारे थे धर्म पूछ- पूछ कर । क्यों मारे थे पहलगाम में उन सबको , जो आए थे काश्मीर का आंनद लेने घुम-धुम कर। क्या बिगारा था उन मासुमो ने, जिसे मारे थे तुम सब धर्म पूछ- पूछ कर । शर्म करो ये देश के गद्दारों, जो … Read more