“अन्नकूट : अन्नदान की परंपरा, राम-राम : आत्मीयता का संदेश”– सुनील कुमार महला

हर वर्ष दीपावली आती है, उजियारा लाती है। दीपकों की रौशनी हर दिल में नई उम्मीद जगाती है।जित देखो तित दीपों की पंक्तियां सजतीं हैं।इन दीपों की सुंदर आवलियां हर तरफ हवाओं में स्नेह, खुशियां, उल्लास, उमंग बिखेरती हैं। धन, वैभव, मिठास का उत्सव बन जाती है, पर सबसे बड़ा उपहार ‘राम-राम’ कहलाती है। ‘राम-राम’ … Read more

प्रतिष्ठित साहित्यकार मिथिलेश भट्टाचार्य एक संस्मरण — मीता दास पुरकायस्थ

“मृत्यु कोई अंत नहीं, वह केवल जीवन के दूसरे सुर में प्रवेश है।” — रवींद्रनाथ ठाकुर अचानक जैसे आकाश का सीना फट गया और उसने एक नक्षत्र को अपने में समा लिया — 20 अक्टूबर 2025 की रात। आकाश और उज्जवल हो उठा, पर शिलचर की एक प्रकाशमयी किरण चुपचाप बुझ गई — चले गए … Read more

गीत : ज्ञान प्रकाश जला दो मन में

(धुन – “तू प्यार का सागर है”) ज्ञान प्रकाश जला दो मन में, हर तम दूर भगा दो, भयभीत न हों जीवन में हम, वो आग हृदय में जगा दो ॥ “असतो माँ सद्गमय” असत् के पथ से निकालो हमको, सत्य दिशा दिखा दो, भटके मन के अंधेरों में, दीप विवेक जला दो ॥ सच्चे … Read more

संघ पर प्रश्न करने वाले, उत्तर चाहते ही नहीं- महेश भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर कुछ लोगों के जो प्रश्न और शंकाएँ हैं, वे आज या कल की नहीं हैं — वे स्वाधीनता-काल से ही चली आ रही हैं। जो केवल प्रश्न पूछकर भाग जाते हैं, उन्हें उत्तर कैसे मिले? इसलिए वे प्रश्न बार-बार दोहराए जाते हैं और अब वे परंपरागत प्रश्न बन चुके हैं। … Read more

दीपावली : प्रकाश का पर्व और आत्मज्योति का उत्सव —  डा. रणजीत कुमार तिवारी

दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धि-विनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते। दीपक की लौ को ईश्वर का स्वरूप माना गया है, जो अज्ञान और अधर्म के अंधकार को मिटाती है। जब हम दीप जलाते हैं, तो वह केवल बाहरी रोशनी नहीं देता, बल्कि हमारे भीतर के पाप, अंधकार और नकारात्मक विचारों को … Read more

गरीब माँ और बेटी की दिवाली

एक छोटे से गाँव में एक माँ और उसकी नन्ही सी बेटी, गुड़िया, रहती थीं। उनका घर मिट्टी का था, छप्पर से ढका हुआ। माँ दिन भर दूसरों के घरों में काम करती थी — झाड़ू-पोछा, बर्तन-माँजना — ताकि शाम को चूल्हा जल सके। दिवाली नज़दीक आ रही थी। गाँव के हर घर में रोशनी … Read more

मायके की दिवाली

दिवाली तो हर साल मनाते हैं, पर जो बात मायके की दिवाली में थी, वह बात और कहाँ। दिवाले से पहले स्कूल के, बंद होने का इंतज़ार। बाज़ार से जाकर, पटाखे लाने का इंतज़ार । इनमें छुपा होता था, कितना सुखद संसार । सजना- संवरना, सुंदर दिखना और इंतज़ार होता था माँ की दालपुरी और … Read more

काली

बदरपुर श्रीगौरी गाँव अपने प्राकृतिक सौंदर्य का भंडार था, जहाँ छोटे-बड़े कच्चे-पक्के मकान और नन्हे-नन्हे पोखरों का घेरा था। गाँव के पास से गुज़रती रेल लाइन के किनारे चावल के खेतों की हरियाली मन मोह लेती थी। सुनहरी मिट्टी की पगडंडियों के किनारे खिले जंगली फूलों की रंगत आँखों को तरो-ताज़ा कर देती थी। उसी … Read more

काली – डॉ मधुछन्दा चक्रवर्ती 

बदरपुर श्रीगौरी गाँव अपने प्राकृतिक सौंदर्य का भंडार था, जहाँ छोटे-बड़े कच्चे-पक्के मकान और नन्हे-नन्हे पोखरों का घेरा था। गाँव के पास से गुज़रती रेल लाइन के किनारे चावल के खेतों की हरियाली मन मोह लेती थी। सुनहरी मिट्टी की पगडंडियों के किनारे खिले जंगली फूलों की रंगत आँखों को तरो-ताज़ा कर देती थी। उसी … Read more

मायके की दिवाली

दिवाली तो हर साल मनाते हैं, पर जो बात मायके की दिवाली में थी, वह बात और कहाँ। दिवाले से पहले स्कूल के, बंद होने का इंतज़ार। बाज़ार से जाकर, पटाखे लाने का इंतज़ार । इनमें छुपा होता था, कितना सुखद संसार । सजना- संवरना, सुंदर दिखना और इंतज़ार होता था माँ की दालपुरी और … Read more