दीपों का त्योंहार-दीपावली

अंधियारे को दूर भगाने आई, खुशियों की सौगात सजाने आई। हर द्वार पर दीप जले हंसते, मन में आशा के फूल खिले बसते। सज गई गलियाॅं, महके आंगन, बाजे ढोल ,खिल उठे जीवन। मां लक्ष्मी के चरण पधारे, सौभाग्य के दीप जलाने सारे। मिठास घुली हर रिश्ते में, दीप जले हर दृष्टि में। दुःख का … Read more

सोशल मीडिया का दुरुपयोग और नए आईटी नियम-एक विवेचन।

आज के इस आधुनिक और डिजिटल युग में सोशल मीडिया केवल संवाद और मनोरंजन का ही माध्यम नहीं रहा है, बल्कि यह जनमत निर्माण, राजनीतिक विमर्श और सामाजिक प्रभाव का सशक्त उपकरण बन चुका है, लेकिन कहना ग़लत नहीं होगा कि आज के समय में इसकी अनियंत्रित स्वतंत्रता और तकनीकी दुरुपयोग ने समाज में अनेक … Read more

संघ के 100 साल: हैदराबाद के निजाम की वजह से संघ को मिला गुरु गोलवलकर जैसा नेतृत्व?

‎‎हैदराबाद का निजाम जब अपने अमले के साथ मद्रास एक्वेरियम देखने के लिए पहुंचा तो मुख्य द्वार पर ड्यूटी माधव की थी. उन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करने हुए टिकट की मांग की, लेकिन ये बात निजाम को अखर गई. उन्होंने अपना परिचय दिया, लेकिन माधव अड़े रहे. फिर क्या हुआ? ‎ ‎संघ के पुराने … Read more

छठी मईया की महिमा अपरंपार

 फलदायी के महान व पावनपर्व सूर्य षष्ठी व छठ पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है| इस दिन अस्ताचलगामी तथा उदय होते साक्षात सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है अर्थात यह पावन पर्व सूर्य देव और छठी मइया के आराध्य मानकर मनाए जाने वाला चार दिवसीय निर्जला कठिन … Read more

मायके की दिवाली 

दिवाली तो हर साल मनाते हैं, पर जो बात मायके की दिवाली में थी, वह बात और कहाँ। दिवाली से पहले स्कूल के, बंद होने का इंतज़ार । बाज़ार से जाकर, पटाखे लाने का इंतज़ार । इनमें छुपा होता था, कितना सुखद संसार । सजना- संवरना, सुंदर दिखना और इंतज़ार होता था माँ की दालपुरी … Read more

“दिल्ली एनसीआर और उत्तर भारत में साफ हवा खो गई: दिवाली और पराली का मिला-जुला असर ! ” — सुनील कुमार महला

दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत में वायु प्रदूषण गंभीर समस्या बन गई है।एक प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक में प्रकाशित एक खबर के अनुसार ‘उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई। दिल्ली-एनसीआर के साथ लखनऊ, पटना, भोपाल, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, जयपुर और चंडीगढ़ में धुंध की मोटी परत छाई रही। केंद्रीय प्रदूषण … Read more

21 अक्टूबर/इतिहास स्मृति नेता जी सुभाष चंद्र बोस द्वारा भारत की अस्थाई सरकार की घोषणा

सुभाष चंद्र बोस ने आजादी से चार साल पहले ही भारत की अस्थायी सरकार गठित कर दी थी। वह खुद इस सरका के प्रमुख थे। यही नहीं कई देशों ने इस सरकार को मान्यता भी दे दी थी। 21 अक्टूबर 1943 को नेताजी सुभाष ने सिंगापुर में भारत की अस्थायी सरकार की घोषणा कर दी … Read more

अरुणाचल की धरती से जन्मी एक लिपि की अद्भुत गाथा। — समराज चौहान

कभी-कभी एक व्यक्ति का छोटा-सा संकल्प पूरे समाज की पहचान बन जाता है। यही कहानी है अरुणाचल प्रदेश के बनवांग लोसु की, जिन्होंने यह सिद्ध कर दिखाया कि लिपि बनाना सिर्फ अक्षरों का आकार तय करना नहीं होता, बल्कि वह एक समुदाय की आवाज़, अस्मिता और आत्मसम्मान का पुनर्जन्म होता है।अरुणाचल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर … Read more

मरने-मारने की हिंसा मे निपट गया माओवाद ? जीवंत लोकतंत्र में बन्दूक की क्रांति होगी नहीं, 125 से तीन जिलों में सिमट गया माओवाद — आचार्य श्रीहरि

माओवाद एक विदेशी विचारधारा है। माओवाद की आधारशिला माओत्से तुंग एक चीनी तानाशाह था। उसे चीन की अराजक और लूटरी शक्ति पर गर्व था। वह अपने पडोसी देशों भारत, वियतनाम, भूटान, नेपाल ही नहीं बल्कि जापान, फिलिपींस और कबोडिया जैसे देशों को  भी कीडे-मौकेडे की तरह देखता और समझना था, अपनी सैनिक शक्ति के बल … Read more

बदलती दीवाली: दीप नहीं, प्रदर्शन की झिलमिल — सुनील कुमार महला

हमारा देश भारत त्योहारों का देश है, जहां हर पर्व केवल उत्सव ही नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन भी होता है। दीपावली(दीपो की आवलि यानी कि दीप-पंक्ति) उन्हीं में सबसे प्रमुख, बड़ा और पवित्र त्योहार है‌।संस्कृत में दीपावली का अर्थ होता है-‘दीपानाम् आवली’ अर्थात् दीपों की पंक्ति या दीपों की श्रेणी।संक्षेप में कहा जाए तो … Read more