बुद्धू बेटा

प्रदीप देर शाम को ऑफिस से लौटा तो रसोईघर में खटर पटर की आवाज सुनाई दी। उसने झांका तो देखा कि उसकी मां बर्तन मांज रही थी। मां की उम्र हो चली है वो घुटनों के दर्द से परेशान रहती है। जनवरी का महीना मौसम बहुत ठंडा था वातावरण में धुंध थी इतनी ठंड महसूस … Read more

कीमत बड़ी चुकाई है।

गाँव बेचकर शहर खरीदा, कीमत बड़ी चुकाई है। जीवन के उल्लास बेच के, खरीदी हमने तन्हाई है॥ बेचा है ईमान धरम तब, घर में शानो शौकत आई है। संतोष बेच तृष्णा खरीदी, देखो कितनी मंहगाई है॥ बीघा बेच स्कवायर फीट, खरीदा ये कैसी सौदाई है। संयुक्त परिवार के वट वृक्ष से, टूटी ये पीढ़ी मुरझाई … Read more

आग लगी अकाश में झर-झर झरत अंगार….(४)

प्रिय मित्रों ! अशान्ति के मूल की तलाश करनी होगी ! विषयवस्तु के विभिन्न पहलुओं पर गहन चिंतन की आवश्यकता है,जिस प्रकार  किसी भी सडक,गली,बाग,परिवहन के सरकारी संशाधन ,रेलवे, यातायात व्यवस्था,पुलिस,न्यायालय, चिकित्सालय,सेना, वायु और जल सेना,जल व्यवस्था,विद्युत उत्पादन,शिक्षा, प्रशासन आदि-आदि हजारों हजार सार्वजनिक सुविधाओं के बिना हमारा-आपका जीवन निर्वाह होना असम्भव है। ये यथार्थ है … Read more

राष्ट्र-चिंतन चीन की कब्र खोद रही है बीआरआई आचार्य विष्णु हरि सरस्वती

कहते हैं कि कुंआ कोई दूसरे लिए नहीं खोदता है, अपने लिए खोदता है, चीन ने एक ऐसा कुंआ खोदा था जिसमें डूबो कर भारत और अमेरिका को मारना चाहता था और भारत व अमेरिका की आर्थिक प्रगति के विस्तार को रोकना चाहता था, विध्वंस करना चाहता था, इतना ही नहीं बल्कि कूटनीति के क्षेत्र … Read more

आग लगी अकाश में झर-झर झरत अंगार….(४)

प्रिय मित्रों ! अशान्ति के मूल की तलाश करनी होगी ! विषयवस्तु के विभिन्न पहलुओं पर गहन चिंतन की आवश्यकता है,जिस प्रकार  किसी भी सडक,गली,बाग,परिवहन के सरकारी संशाधन ,रेलवे, यातायात व्यवस्था,पुलिस,न्यायालय, चिकित्सालय,सेना, वायु और जल सेना,जल व्यवस्था,विद्युत उत्पादन,शिक्षा, प्रशासन आदि-आदि हजारों हजार सार्वजनिक सुविधाओं के बिना हमारा-आपका जीवन निर्वाह होना असम्भव है। ये यथार्थ है … Read more

आग लगी अकाश में झर-झर झरत अंगार….(१)

कर गिर जाते हैं,कूलर व्यर्थ हो जाता है,एयर कन्डीशनर शो पीस बन जाता है ! लू के थपेडों से अब तो सिल्चर भी अछूता नहीं रहा ! अब तो शिलांग में भी लू चलने लगी ! चाय बागानों के इतने बुरे दिन कभी देखे थे ? यज्ञ धूम से- हवन की धूम से पर्यावरण दूषित … Read more

जानिए पद्मिनी एकादशी क्यों है सर्वश्रेष्ठ एकादशी -डॉ. बी. के. मल्लिक

मलमास में आने वाली पद्मिनी एकादशी तीन साल में एक बार आती है। इस एकादशी को कमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पद्मिनी एकादशी का महत्व अधिक मास में विशेष  माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति सच्चे दिल और पूरी निष्ठा के साथ इस व्रत का पालन करना है उसे … Read more

आग लगी अकाश में झर-झर झरत अंगार….(१)

पूर्व से लेकर पश्चिम तक,उत्तर से लेकर दक्षिण तक,एशिया प्रायद्वीप से लेकर ऑस्ट्रेलिया,यूरोप,संयुक्त राज्य अमेरिका से लेकर अफ्रीकी देशों तक सर्वत्र आकाश से सफेद बुर्राक आग बरस रही है ! बडे बडे पहाड,पठार,सडकें,पुल,मन्दिर,मस्जिद, चर्च,गुरूद्वारे,गांव,नगर,दुकानें,बस,कारें,मोटरसाइकिलें तिनकों की तरह बह रही हैं। जंगली जानवर,हांथी,मवेशी और मानव भी इस प्रलयंकारी त्रासदी में तिनकों की तरह बह रही है … Read more

मणिपुर कांड

मणिपुर राज्य में कुछ असुरों नें, पुरुषत्व को बदनाम किया। भीड़ में शामिल हो कर के, एक ऐसा कृत्य अंजाम दिया।। नोंच कर घुंघट नारी का, उसे नंगा परेड करवा डाला। मैं लिख ना सकता, खुले तन से हरकत वही फ़रमा डाला।। जिस देश का झंडा आदि से ही, दुनिया भर में ऊंचा था। विश्व … Read more

भगत सिंह के साथ असेंबली में बम फेंकने वाले बटुकेश्वर दत्त को भी फांसी हो गई होती तो ज्यादा अच्छा था !

1947 में आजादी के पश्चात बटुकेश्वर को रिहाई मिली। लेकिन इस वीर सपूत को वो दर्जा कभी ना मिला जो हमारी सरकार और भारतवासियों से इन्हें मिलना चाहिए था। आज़ाद भारत में बटुकेश्वर नौकरी के लिए दर-दर भटकने लगे। कभी सब्जी बेची तो कभी टूरिस्ट गाइड का काम करके पेट पाला। कभी बिस्किट बनाने का … Read more