दुविधा और चुनाव (ये, वे और जनता)
।।अ।। किसे दोष दूँ किसे सराहूँ किसकी जय जयकार करूँ। दुविधा नहीं मिटाए मिटती कितना ही उपचार करूंँ।।1।। लो चुनाव आ गए कपट की किलकारी कोरों पर है। हर नेता कस उठा कमर फिर तैयारी जोरों पर है।।1।। सबके अपने-अपने मतलब सबके ठिए ठिकाने जी। सब ने अपनी सांँस रोक कर साधे नये निशाने जी।। … Read more