शीर्षक -:अहिंसा

हिंसा से बढ़ती हिंसा, भावना होती ख़राब, जटिल होता जीवन, अहिंसा मात्र जवाब , प्रेम,सौहार्द लोप होते,अपनापन करता विलाप, सुकून ना मिल पाता कदापि,हिंसा देती संताप , अहिंसा मोड़ हैं लम्बा,मिट जाते सारे विकार , ना फिसलन इस राह में ,ना होता है अंधकार , अमोघ साधन हैं सुख का ,एक मात्र अहिंसा , सुसुप्त … Read more

सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ समाज विकास के लिए बौधिक आवश्यक

मनुष्य का व्यक्तित्व एवं व्यक्तव्य से ही पता चल जाता है कि वो कितना विद्वान एवं अनुभवी व्यक्ति हैं इसके लिए दिनचर्या से सादगी मृदुल व्यवहार समदर्शिता इमानदारी एवं सदैव, जनहित की भावना प्रलक्षित होनी चाहिए। इसके लिए मन में सपष्टता सकारात्मक सोच परहित के लिए कुछ करने का जज्बा होना चाहिए। यह सत्य है … Read more

पितृसूक्त मंत्र~तृतीय भाग तृतीय अंक सात आनंद शास्त्री

प्रिय मित्रों ! अपने पितृ-गणों को समर्पित करता हुवा यह श्रृंखला ! अपने पूर्वजों के चरणों में इसकी तृतीय ऋचा का तृतीय अंक मैं प्रस्तुत करता हूँ- “आहं पितृन् त्सुविदत्रां अवित्सि नपातं च विक्रमणं च विष्णोः। बहिर्षदो ये स्धया सुतस्य भजन्त पित्वस्त इहागमिष्ठाः॥” ऋषि कहते हैं कि-उत्तम ज्ञान से युक्त पितरों को तथा अपानपात् और … Read more

गांधी विनम्रता और सेवा का एक उदाहरण – डॉ सौरभ वर्मा

नराकास सदस्य सचिव शिलचर हिंदी प्रभारी, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान शिलचर 2 अक्टूबर सिर्फ कैलेंडर की तारीख नहीं है; यह एक सच्चे दूरदर्शी के जीवन और विरासत को याद करने और जश्न मनाने का दिन है। इस दिन भारत, राष्ट्रपिता मोहन दास करमचंद गांधी की जयंती मनाता है और गांधीजी द्वारा जीवन भर प्रचारित अहिंसा की … Read more

पितृ-सूक्त मंत्र-तृतीय भाग एक अंक पांच

प्रिय मित्रों ! अपने पितृ-गणों को समर्पित करता हुवा यह श्रृंखला ! अपने पूर्वजों के चरणों में इसकी तृतीय ऋचा के प्रथम अंक  को मैं प्रस्तुत करता हूँ- “आहं पितृन् त्सुविदत्रां अवित्सि नपातं च विक्रमणं च विष्णोः। बहिर्षदो ये स्धया सुतस्य भजन्त पित्वस्त इहागमिष्ठाः॥ ऋषि कहते हैं कि-उत्तम ज्ञान से युक्त पितरों को तथा अपानपात् … Read more

” क्या होता है पितृ पक्ष , और क्यों करते हैं श्राद्ध ? ” सन्दीप अग्रवाल

हिन्दू धर्म के शास्त्रों में तीन प्रकार के ऋण कहे गये है – देव ऋण , ऋषि ऋण एवमं पितृ ऋण | और इनमें से पितृ ऋण के निवारण हेतु ही पितृ पक्ष का वर्णन किया गया है , जिसे सरल शब्दों में श्राद्ध कर्म भी कहा जाता है | शास्त्रों में वर्णन है कि … Read more

हम तेरे याद में सारा आलम खो बैठे ! खो बैठे ! तुम कहते हो कि ऐसे प्यार को भूल जाओ ! भूल जाओ ? आनंद शास्त्री

मित्रों ! अंततः शिवसेना के मार्ग पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी भागवताचार्य जी धीरे-धीरे ले जाते दिख रहे हैं ! कभी संघ की शाखाओं में ध्वज प्रणाम कर जो शपथ हमलोगों ने ली थी ! उन्होंने भी ली होगी ! आज उस शपथ की धज्जियां उड़ती देख अंतःस्थल किसी विषैले फोडे की तरह दुखता … Read more

28 सितम्बर/जन्मदिवस इन्कलाब जिन्दाबाद के उद्घोषक भगतसिंह

क्रान्तिवीर भगतसिंह का जन्म 28 सितम्बर, 1907 को ग्राम बंगा, (जिला लायलपुर, पंजाब) में हुआ था। उसके जन्म के कुछ समय पूर्व ही उसके पिता किशनसिंह और चाचा अजीतसिंह जेल से छूटे थे। अतः उसे भागों वाला अर्थात भाग्यवान माना गया। घर में हर समय स्वाधीनता आन्दोलन की चर्चा होती रहती थी। इसका प्रभाव भगतसिंह … Read more

संघर्ष

सौभाग्य जगाना है तो अपना,आत्मबल मजबूत करो। “बिन संघर्ष संसिद्धि नहीं..”,मन में यूक्ति महफूज़ करो।। सुनो कहानी तितली का, वो कैसी कष्ट उठाती है । कठिनाइयों की चार चरण को, पुरा कर के आती है।। निरंतर देढ़ महिने तक, वो खुद ही श्रम में ढलती है। अंडा लार्वा प्युपा क्रम का, तीन दशाएं बदलती है।। … Read more

भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का प्रतीक है अनंत सूत्र का 14 गांठ

बेगूसराय, 27 सितम्बर (हि.स.)। अनेकता में एकता का संदेश देने वाले भारत में कोई महीना ऐसा नहीं जब व्रत-त्योहार नहीं हो। त्योहारों की कड़ी में ही भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष में चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाले अनंत पूजा की हर घर में तैयारी की गई है। शुक्रवार को भगवान विष्णु को प्रसन्न करने … Read more